हाइब्रिड और ईवी कारें होंगी सस्ती, पेट्रोल-डीजल वाले वाहन मिलेंगे महंगे!
Amresh Kushwaha | Aug 09, 2026, 08:21 IST
ईवी कारें होंगी सस्ती
केंद्र सरकार ने कारों के लिए नई फ्यूल इकोनॉमी पॉलिसी का मसौदा जारी किया है। यह 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी। इससे हाइब्रिड, ईवी और एथेनॉल कारें सस्ती होंगी। वहीं ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली पेट्रोल-डीजल कारें महंगी हो सकती हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- केंद्र सरकार ने कारों के लिए नई फ्यूल इकोनॉमी पॉलिसी का मसौदा जारी किया है।
- यह नई नीति 1 अप्रैल 2027 से देश भर में लागू होगी।
- हाइब्रिड, ईवी और एथेनॉल कारें अब सस्ती हो सकती हैं।
- ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली पेट्रोल-डीजल कारें महंगी हो सकती हैं।
- सरकार का लक्ष्य ईंधन बचाना और प्रदूषण घटाना है।
इस पॉलिसी का मकसद कारों की ईंधन दक्षता यानी माइलेज बढ़ाना है। साथ ही पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना भी बड़ा लक्ष्य है। इससे एथेनॉल, हाइब्रिड और ईवी यानी Electric Vehicle कारें सस्ती हो सकती हैं। वहीं ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली पेट्रोल-डीजल कारें महंगी हो सकती हैं।
कैसे सस्ती होंगी कारें
एक हाइब्रिड कार को 1.6 कार के बराबर माना जाएगा। इससे कंपनियों के लिए प्रदूषण घटाने का लक्ष्य पूरा करना आसान होगा। कंपनियां इसी वजह से इन कारों को कम कीमत या बेहतर ऑफर्स के साथ बेच सकती हैं। इससे ग्राहकों को सीधा फायदा मिलेगा। बाजार में हाइब्रिड और ईवी कारों की मांग भी बढ़ सकती है।
क्यों महंगी होंगी कारें
इसकी कीमत दो हजार 500 रुपए से चार हजार 500 रुपए प्रति ग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड यानी CO2 (Carbon Dioxide) तक हो सकती है। कंपनियां यह भारी जुर्माना अपनी जेब से नहीं भरेंगी। वे इसका बोझ ज्यादा प्रदूषण वाली कारों की कीमत बढ़ाकर ग्राहकों पर डालेंगी। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल की कुछ कारें महंगी हो सकती हैं।
एथेनॉल कारों को फायदा
इसी तरह ई20 पेट्रोल वाली कारों को भी राहत मिलेगी। यदि कोई ग्राहक ई20 कार खरीदता है, तो कंपनी के खाते में उस कार से निकलने वाला धुआं आठ फीसदी कम मानी जाएगी।
इससे कंपनियों को अपना प्रदूषण लक्ष्य पूरा करने में मदद मिलेगी। हालांकि ई20 कारों की शुरुआती कीमत बढ़ सकती है। इसकी वजह टायर प्रेशर मॉनिटरिंग, एलईडी लाइट्स और बेहतर गियरबॉक्स जैसी नई तकनीकें अनिवार्य होना है।
पासबुक और क्रेडिट सिस्टम
इसका मतलब है कि ज्यादा क्लीन कारें बेचने वाली कंपनी अपना क्रेडिट दूसरी कंपनी को बेच सकेगी। हालांकि जो कंपनियां साल में एक हजार से कम कारें बेचती हैं, उन्हें इस नियम से छूट मिलेगी। इससे छोटी कंपनियों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा।
क्या पुरानी कार पर असर
साथ ही भारत अब माइलेज नापने का तरीका भी बदलेगा। पुराने MIDC सिस्टम की जगह अब वैश्विक स्तर का WLTP (Worldwide Harmonised Light Vehicle Test Procedure) सिस्टम अपनाया जाएगा। यह तरीका असली माइलेज के ज्यादा करीब माना जाता है।
क्या डीजल कारें बंद होंगी
जुर्माने से बचने के लिए कंपनियां डीजल कारों की संख्या घटा सकती हैं। इसका असर आने वाले सालों में डीजल कारों की बिक्री पर पड़ सकता है। ग्राहकों को डीजल कारों के विकल्प भी कम मिल सकते हैं।
पॉलिसी का असली मकसद
आने वाले समय में ऑटो कंपनियां ज्यादा हाइब्रिड और ईवी मॉडल लॉन्च कर सकती हैं। वहीं पेट्रोल-डीजल के पुराने मॉडल धीरे-धीरे पीछे छूट सकते हैं। इससे भारत के ऑटो बाजार की दिशा भी बदल सकती है।
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