Nature Report: भारत में 56% महिलाएं पेट के मोटापे की शिकार
Anjali Dwivedi | Mar 23, 2026, 17:50 IST
india abdominal obesity women men
Nature की Scientific Reports में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार भारत में 56.6% महिलाएं और 48.9% पुरुष पेट के मोटापे से पीड़ित हैं। देश के 707 जिलों के डेटा पर आधारित यह रिसर्च बताता है कि उत्तर और पूर्वी भारत में स्थिति सबसे गंभीर है।
समझें क्या है पूरा मामला
- Nature में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भारत में 56.6% महिलाएं और 48.9% पुरुष पेट के मोटापे के शिकार हैं।
- यह शोध NFHS के डेटा पर आधारित है जिसमें 707 जिलों के 7 लाख 60 हजार से ज्यादा लोगों का अध्ययन किया गया।
- पेट का मोटापा WHR से मापा गया। महिलाओं के लिए 0.85 और पुरुषों के लिए 0.90 से ज्यादा को खतरे की सीमा माना गया।
- उत्तर और पूर्वी भारत के जिलों में यह समस्या सबसे ज्यादा गंभीर है और शहरी, अमीर और बुजुर्ग लोगों में यह दर सबसे ऊंची है।
- शोधकर्ताओं का कहना है कि राष्ट्रीय औसत असली तस्वीर नहीं दिखाता क्योंकि जिलेवार आंकड़ों में बहुत बड़ा अंतर है।
Nature की प्रतिष्ठित पत्रिका Scientific Reports के एक बड़े अध्ययन ने भारत की असली तस्वीर सामने रखी है। यह तस्वीर चिंताजनक है।
707 जिलों पर हुआ बड़ा अध्ययन
इतने बड़े और प्रतिनिधि नमूने पर आधारित यह रिसर्च अब तक के सबसे व्यापक अध्ययनों में से एक है। रिसर्च का नेतृत्व Pratheeba John, Rimjhim Bajpai और Nishikant Singh समेत कई एक्सपर्ट्स ने किया।
महिलाओं की स्थिति ज्यादा गंभीर
उम्रदराज लोगों में, अमीर तबके में और शहरी इलाकों में रहने वालों में यह दर और भी ऊंची है। शहरीकरण और बदलती जीवनशैली इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।
उत्तर और पूर्वी भारत में हालात सबसे खराब
शोधकर्ताओं का कहना है कि राष्ट्रीय औसत इस असमानता को छुपा देता है। इसीलिए जिलेवार नीति और योजना बनाना जरूरी है।
मोटापे की वजह क्या है
शोधकर्ताओं ने जोर दिया कि BMI (Body Mass Index) के साथ-साथ WHR(Waist-to-Hip Ratio) को भी सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल करना चाहिए क्योंकि सिर्फ वजन देखने से पेट की चर्बी का सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
क्या करने की जरूरत है
भारत में डायबिटीज और दिल की बीमारियों का बोझ पहले से भारी है। पेट का मोटापा इन बीमारियों का एक बड़ा जोखिम कारक है। इसलिए अभी से कदम न उठाए गए तो आने वाले सालों में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है।
FAQ
- पेट का मोटापा यानी एब्डॉमिनल ओबेसिटी क्या होती है और इसे कैसे मापते हैं?
पेट का मोटापा तब होता है जब कमर के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा हो जाती है। इसे WHR यानी Waist-to-Hip Ratio से मापा जाता है। WHO के मानकों के अनुसार महिलाओं में यह अनुपात 0.85 से ज्यादा और पुरुषों में 0.90 से ज्यादा होना खतरे की निशानी है। यह BMI से ज्यादा सटीक संकेतक माना जाता है क्योंकि पेट की चर्बी सीधे दिल की बीमारी, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के खतरे से जुड़ी होती है। - Nature के इस अध्ययन में भारत की सबसे बुरी स्थिति कहां पाई गई?
अध्ययन के अनुसार उत्तर और पूर्वी भारत के जिलों में पेट के मोटापे की दर सबसे ज्यादा है। शहरी इलाकों, अमीर तबके और बुजुर्गों में यह समस्या सबसे गंभीर पाई गई। महिलाओं और पुरुषों में इसके भौगोलिक पैटर्न भी अलग-अलग हैं। 707 जिलों में से अलग-अलग जिलों में बहुत बड़ा अंतर देखा गया जो राष्ट्रीय औसत में छिप जाता है। - इस शोध के नतीजे भारत की स्वास्थ्य नीति के लिए क्यों अहम हैं?
यह अध्ययन बताता है कि सिर्फ राष्ट्रीय आंकड़ों के आधार पर नीति बनाना काफी नहीं है। हर जिले की अलग स्थिति है इसलिए जिलेवार लक्षित कार्यक्रम बनाने जरूरी हैं। WHR को भी BMI के साथ सरकारी स्वास्थ्य सर्वेक्षणों में शामिल करना चाहिए। पेट का मोटापा डायबिटीज और दिल की बीमारियों का बड़ा कारण है और भारत में इन बीमारियों का बोझ पहले से भारी है। इसलिए अभी से जिलेवार योजनाएं बनाना जरूरी है।
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