स्वच्छ हवा, लंबी उम्र
Air Pollution Report 2026: 13 हजार करोड़ में से 68% सड़क की धूल पर खर्च, 2023 में प्रदूषित हवा ने ली 20 लाख जानें, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Kaushiki | Oct 15, 2026, 11:36 IST
India Air Pollution Report 2026
Air Pollution Report 2026: भारत में वायु प्रदूषण घटाने के लिए 13 हजार करोड़ से ज्यादा जारी हुए, पर खर्च का 68% सड़क की धूल पर गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में 20 लाख मौतें प्रदूषण से जुड़ी मिलीं। 229 में से 190 शहरों में पीएम. 10 मानक से ऊपर रहा।
साल 2019 से अब तक 13 हजार करोड़ रुपए से अधिक जारी किए गए। लेकिन इस बजट का बड़ा हिस्सा कहां चला गया? Arth5R संगठन ने अपनी नई रिपोर्ट इंडिया एयर पॉल्यूशन 2026 में हैरान करने वाले खुलासे किए हैं।
दिल्ली-एनसीआर से लेकर बिहार और यूपी तक हवा में जहर घुला हुआ है। सवाल यह है कि इतना पैसा खर्च करने के बाद भी राहत क्यों नहीं मिली? आइए इस रिपोर्ट को स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं।
बजट का पैसा कहां खर्च हुआ
साल 2023 में जहरीली हवा की वजह से 20 लाख लोगों की असमय जान चली गई। यह आंकड़ा साल 2000 की तुलना में करीब 43 प्रतिशत अधिक दर्ज हुआ है। अगर हवा साफ हो जाए, तो हमारी जिंदगी के कई साल बढ़ सकते हैं।
सरकार ने प्रदूषण मिटाने के लिए 13 हजार 415 करोड़ रुपए का भारी फंड जारी किया था। इसमें से एजेंसियों ने नै हजार 929 करोड़ रुपए यानी कुल 74% रकम खर्च की। खर्च हुई कुल रकम का 68% हिस्सा केवल सड़कों की धूल हटाने पर लगा।
वाहनों के धुएं और ट्रांसपोर्ट पर सिर्फ 14% पैसा ही खर्च किया गया। कचरा और ऑर्गेनिक वेस्ट जलाने से रोकने के लिए केवल 12% बजट मिला। वहीं हवा की निगरानी क्षमता बढ़ाने पर सिर्फ 3% रकम खर्च की गई।
साफ हवा से कितनी बढ़ेगी उम्र
दिल्ली में साफ हवा मिलने पर लोगों की उम्र 8.2 साल बढ़ सकती है। बिहार के लोगों की औसत उम्र 5.6 साल तक बढ़ सकती है। हरियाणा में लोगों की जिंदगी 5.3 साल लंबी हो सकती है। उत्तर प्रदेश के निवासियों की उम्र में 5.0 साल का सुधार हो सकता है। साफ हवा हमारी सेहत के लिए बेहद जरूरी फैक्टर बन चुकी है।
2025 में प्रदूषण का नया आंकड़ा
यहां के वातावरण में स्मॉग की मोटी परत देखी गई। दिल्ली-एनसीआर के सभी 14 शहरों में पीएम.10 का लेवल खतरे के पार था। भारत दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश दर्ज किया गया है।
प्रदूषण जांच में बड़ी लापरवाही
लेकिन 28 शहरों में कंटीन्यूअस प्रदूषण मापने का एक भी स्टेशन नहीं था। देश के 40 शहरों में तो आज तक यह जांच ही पूरी नहीं हो सकी। वहां यह भी नहीं पता कि प्रदूषण किन कारणों से फैल रहा है।
यह खबर क्यों जरूरी है
Air Quality (AQI) क्या होता है?
| AQI स्तर | श्रेणी (Category) | इसका क्या मतलब है? |
| 0 से 50 | अच्छा (Good) | हवा पूरी तरह स्वच्छ है। सांस लेने के लिए सबसे सुरक्षित वातावरण है। |
| 51 से 100 | संतोषजनक (Satisfactory) | हवा ठीक है, पर बहुत संवेदनशील लोगों को थोड़ी दिक्कत हो सकती है। |
| 101 से 200 | मध्यम (Moderate) | हवा में थोड़ा प्रदूषण है। फेफड़ों और दिल के मरीजों को तकलीफ हो सकती है। |
| 201 से 300 | खराब (Poor) | हवा जहरीली होने लगती है। लंबे समय तक रहने पर बीमारियां हो सकती हैं। |
| 301 से 400 | बहुत खराब (Very Poor) | हवा काफी घातक है। स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। |
| 401 से 500 | गंभीर (Severe) | यह हेल्थ इमरजेंसी की स्थिति है। फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचता है। |
भारत में वायु प्रदूषण के स्तर के बारे में क्या जानकारी मिली है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2023 में वायु प्रदूषण के कारण 20 लाख लोगों की असामयिक मृत्यु का सामना कर चुका है। 2025 में देश के 229 में से 190 शहरों की हवा खराब रही। दिल्ली-एनसीआर के सभी 14 शहरों में पीएम10 का स्तर खतरनाक था, जिससे भारत दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश बन गया।- सरकार ने प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में कितना बजट खर्च किया है?
सरकार ने 2019 से अब तक वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 13,415 करोड़ रुपये का फंड जारी किया है। इसमें से 68% रकम केवल सड़कों की धूल सफाई पर खर्च की गई, जबकि वाहनों के धुएं और कचरे को रोकने पर कम ध्यान दिया गया। - साफ हवा मिलने पर भारतीयों की जीवन प्रत्याशा पर क्या असर पड़ेगा?
यदि भारत की हवा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार साफ हो जाए, तो आम भारतीयों की औसत जीवन प्रत्याशा 3.5 साल तक बढ़ सकती है। विशेष रूप से दिल्ली में यह आंकड़ा 8.2 साल, बिहार में 5.6 साल, और उत्तर प्रदेश में 5.0 साल का सुधार हो सकता है।
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