भारत की पहली ओपन लेस्बियन सांसद बनेंगी मेनका गुरुस्वामी!

Amresh Kushwaha | Mar 01, 2026, 11:42 IST
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india first open lesbian mp menaka guruswami
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टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट की वकील मेनका गुरुस्वामी को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है, जो LGBTQ समुदाय, खासकर लेस्बियन महिलाओं के प्रतिनिधित्व का प्रतीक बन सकती हैं। यदि वे चुनी जाती हैं, तो यह भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक कदम होगा।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • मेनका गुरुस्वामी को टीएमसी ने राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है।
  • वे भारत की पहली ओपन लेस्बियन सांसद बन सकती हैं।
  • मेनका ने सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी थी।
  • उनका चयन LGBTQ समुदाय के लिए एक नई उम्मीद का संकेत है।
  • इस कदम से समाज में समलैंगिक अधिकारों की स्वीकार्यता बढ़ सकती है।

मेनका गुरुस्वामी की राज्यसभा के लिए उम्मीदवारी

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने राज्यसभा चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट की सीनियर वकील मेनका गुरुस्वामी को उम्मीदवार बनाया है। मेनका की पहचान एक प्रमुख LGBTQ कार्यकर्ता के रूप में रही है। उनकी उम्मीदवारी से इस समुदाय को संसद में प्रतिनिधित्व मिल सकता है। यदि वे चुनी जाती हैं, तो वे भारत की पहली ओपन लेस्बियन सांसद बन जाएंगी, जो भारतीय राजनीति में एक अहम बदलाव होगा।

गुरुस्वामी ने IPC की धारा 377 को दी थी चुनौती

मेनका गुरुस्वामी ने अपनी पार्टनर अरुंधति काटजू के साथ मिलकर साल 2018 में आईपीसी की धारा 377 को चुनौती दी थी। इसके चलते समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। उनका सार्वजनिक रूप से लेस्बियन कपल के रूप में सामने आना LGBTQ समुदाय के लिए एक ताकतवर कदम था।

टीएमसी को सोच को दिखाता है उनका नामांकन

मेनका का चुनाव केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि LGBTQ समुदाय, खासकर लेस्बियन महिलाओं के अधिकारों की एक बड़ी जीत हो सकता है। उनका नामांकन टीएमसी की तरफ से एक संदेश है कि पार्टी न केवल मुस्लिम और दलित मुद्दों पर, बल्कि जेंडर और सेक्सुअल माइनॉरिटी के अधिकारों पर भी काम कर रही है।

LGBTQ के मुद्दे पर राज्यसभा में हो सकती है चर्चा!

राज्यसभा में उनके पहुंचने से LGBTQ समुदाय के मुद्दे, जैसे समलैंगिक विवाह, सिविल यूनियन और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन लॉ पर गंभीरता से चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही, समाज में सफल, शिक्षित, एलीट लेवल की लेस्बियन महिला का उदाहरण सामने आएगा, जो युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन सकता है।

हालांकि, इस कदम के बावजूद, मेनका गुरुस्वामी को होमोफोबिया और ट्रोलिंग जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन मेनका के लिए यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि उन्होंने पहले भी धारा 377 को चुनौती देने में समाज के विरोध का सामना किया है।

FAQ

  1. मेनका गुरुस्वामी कौन हैं और उनकी उम्मीदवारी क्यों महत्वपूर्ण है?
    मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट की सीनियर वकील और LGBTQ अधिकारों की प्रमुख कार्यकर्ता हैं। उनकी उम्मीदवारी से LGBTQ समुदाय, खासकर लेस्बियन महिलाओं के लिए संसद में प्रतिनिधित्व मिल सकता है, जो भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।
  2. क्या मेनका गुरुस्वामी की उम्मीदवारी LGBTQ समुदाय के लिए एक सकारात्मक कदम है?
    हां, मेनका की उम्मीदवारी LGBTQ समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे उनके अधिकारों को संसद में आवाज मिल सकती है और समलैंगिक विवाह और समान अधिकारों के लिए कानूनी बदलाव की संभावना बढ़ सकती है।
  3. क्या मेनका गुरुस्वामी को लेकर ट्रोलिंग और विरोध की संभावना है?
    हां, मेनका को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और होमोफोबिक हमलों का सामना करना पड़ सकता है, जैसा कि उन्होंने पहले भी झेला है। हालांकि, वे इसे पहले भी पार कर चुकी हैं और इस बार यह लड़ाई संसद में होगी।
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