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टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) ने राज्यसभा के लिए सुप्रीम कोर्ट की सीनियर वकील मेनका गुरुस्वामी को उम्मीदवार बनाया है। इससे LGBTQ समुदाय, खासकर लेस्बियन महिलाओं के लिए संसद में नई राह खोल दी है। मेनका ने धारा 377 के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी थी। साथ ही, अपने साथी व सह-वकील अरुंधति काटजू के साथ खुद को खुले तौर पर कपल बताया था।
इस कदम से वे भारत के पहले सार्वजनिक रूप से सामने आए हाई-प्रोफाइल लेस्बियन जोड़ों में शामिल हो गईं। यदि वे चुनी जाती हैं, तो वे भारत की पहली ओपन LGBTQ सांसद बनेंगी, जो भारतीय संसद में एक अहम बदलाव साबित होगा।
एक बार फिर खड़े हुए सवाल
इस खबर के साथ ही एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है- ये LGBTQ का मतलब क्या होता है? तो चलिए हम बताते हैं…
LGBTQ का मतलब और समाज में इसकी अहमियत
LGBTQ एक छोटा सा शब्द है, लेकिन इसके अंदर अलग-अलग पहचान और रिश्तों की पूरी दुनिया शामिल होती है।
LGBTQ का फुल फॉर्म और मूल बात
L = Lesbian (लेस्बियन)
G = Gay (गे)
B = Bisexual (बाइसेक्शुअल)
T = Transgender (ट्रांसजेंडर)
Q = Queer या Questioning (क्वीयर या अपनी पहचान खोज रहे लोग)
साधारण भाषा में कहें तो, LGBTQ उन लोगों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है जिनकी यौन आकर्षण (sexual orientation) या जेंडर पहचान (gender identity) पारंपरिक मर्द-औरत, पति-पत्नी वाले ढांचे में फिट नहीं बैठती।
हर अक्षर का मतलब
Lesbian (लेस्बियन) – औरत को औरत से प्यार
लेस्बियन वह महिला होती है जिसे दूसरी महिलाओं की ओर आकर्षण होता है। जैसे, यदि कोई लड़की दूसरी लड़की के साथ रिश्ते में रहना चाहती है, तो वह खुद को लेस्बियन कह सकती है।
Gay (गे) – मर्द को मर्द से प्यार
गे शब्द उन पुरुषों के लिए इस्तेमाल होता है जिन्हें पुरुषों से आकर्षण महसूस होता है। जैसे, दो लड़के एक-दूसरे के साथ कपल की तरह रहना चाहते हैं, तो उन्हें गे कहा जा सकता है।
Bisexual (बाइसेक्शुअल) – दोनों तरफ आकर्षण
बाइसेक्शुअल वह व्यक्ति होता है जिसे लड़कों और लड़कियों दोनों की तरफ आकर्षण हो सकता है। जैसे, एक व्यक्ति कभी लड़की से रिलेशनशिप में हो सकता है और कभी लड़के से भी।
Transgender (ट्रांसजेंडर) – जेंडर पहचान और जन्म का सेक्स अलग
ट्रांसजेंडर वह व्यक्ति होता है जिनकी जेंडर पहचान उनके जन्म के समय दिए गए सेक्स से मेल नहीं खाती। जैसे, अगर किसी का जन्म ‘लड़का’ था, लेकिन वह खुद को ‘लड़की’ महसूस करता है, तो वह ट्रांसजेंडर हो सकता है।
Queer / Questioning (क्वीयर / क्वेश्चनिंग)
क्वीयर वह लोग हैं जो महसूस करते हैं कि वे "सिर्फ स्ट्रेट" ढांचे में नहीं आते, लेकिन अपनी पहचान को किसी एक लेबल में सीमित नहीं करना चाहते। क्वेश्चनिंग वे लोग हैं जो अभी अपनी पहचान को लेकर सोच रहे हैं, और एक्सप्लोर कर रहे हैं।
Sexual Orientation बनाम Gender Identity
यह दो अलग-अलग चीजें हैं जिन्हें अक्सर लोग मिला देते हैं:
Sexual Orientation: यह बताता है कि आप किसकी ओर रोमांटिक/शारीरिक आकर्षण महसूस करते हैं – पुरुष, महिला, दोनों या किसी की नहीं (जैसे लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल, एसेक्शुअल आदि)।
Gender Identity: यह बताता है कि आप खुद को अंदर से क्या महसूस करते हैं – पुरुष, महिला, दोनों, बीच का या कोई और जेंडर (जैसे ट्रांसजेंडर, नॉन-बाइनरी आदि)।
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति ट्रांसजेंडर भी हो सकता है और साथ ही गे या लेस्बियन भी, यह दोनों बातें अलग-अलग लेवल पर काम करती हैं।
LGBTQ के आगे + या IA+ क्यों लगाया जाता है?
I = Intersex (जिनके शरीर में जन्म के समय पुरुष और महिला दोनों जैविक विशेषताएं होती हैं)
A = Asexual / Aromantic (जो यौन या रोमांटिक आकर्षण बहुत कम या बिल्कुल नहीं महसूस करते)
+ = इसका मतलब है कि इसके अलावा भी कई और पहचानें हैं (जैसे pansexual, non-binary आदि) जो पारंपरिक मर्द-औरत, स्ट्रेट सिस्टम से बाहर आती हैं।
समाज में यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
पारंपरिक सोच (heteronormativity) मानती है कि सिर्फ लड़का-लड़की का रिश्ता सामान्य है। वहीं, LGBTQ इस सोच से बाहर आने वाले लोगों की पहचान को नाम और जगह देता है।
दुनिया भर में और भारत में भी LGBTQ लोगों को कई सालों तक अपराधी, पापी या गलत मानकर कानून, परिवार और समाज तीनों स्तर पर भेदभाव झेलना पड़ा है।
जब हम LGBTQ जैसे शब्दों को समझते हैं और इस्तेमाल करते हैं, तो असल में हम यह स्वीकार कर रहे होते हैं कि इंसान एक ही तरह का नहीं होता है। अलग-अलग तरह के रिश्ते और पहचान भी सम्मान के हकदार हैं।
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