मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत का बड़ा दांव: ओमान से सीधे आएगी गैस, जानें कैसे

Manya Jain | Jun 10, 2026, 18:44 IST
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india oman undersea gas pipeline project
india oman undersea gas pipeline project

भारत और ओमान मिलकर अरब सागर में 2000 KM लंबी डीप-सी गैस पाइपलाइन बिछाएंगे। 40 हजार करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास किया जाएगा। GAIL और IOC को फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भारत और ओमान मिलकर समुद्र के नीचे एक विशाल गैस पाइपलाइन बनाएंगे।
  • यह पाइपलाइन अरब सागर से होकर करीब 2 हजार किलोमीटर लंबी होगी।
  • इस रास्ते से भारत बिना किसी रुकावट के सीधे प्राकृतिक गैस मंगा सकेगा।
  • इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
  • तीन बड़ी सरकारी कंपनियां मिलकर इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर रही हैं।
भारत ने ओमान के साथ मिलकर अरब सागर के नीचे 2000 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन बिछाने के प्रोजेक्ट का ऐलान किया है। इस पाइपलाइन से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बायपास किया जा सकेगा।

प्रोजेक्ट पर करीब 40 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। पेट्रोलियम मंत्रालय ने GAIL, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच यह प्रोजेक्ट भारत की एनर्जी सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

होर्मुज की टेंशन ने जगाई नई चिंता

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर जंग के हालात हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बनी टेंशन ने पूरी दुनिया की एनर्जी सप्लाई को खतरे में डाल दिया है। भारत अपनी कच्चे तेल की अधिकांश जरूरत आयात से पूरी करता है। नेचुरल गैस और एलएनजी के लिए भी खाड़ी देशों पर बड़ी निर्भरता है।

इस गैस का ज्यादातर हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है। इस रास्ते पर कोई भी रुकावट ईंधन की कीमतों और सप्लाई चेन दोनों को बिगाड़ सकती है।

30 साल पुराना सपना अब हकीकत की तरफ

ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन कोई नया आइडिया नहीं है। पिछले 30 सालों में इस पर कई बार विचार हुआ। लेकिन भारी खर्च, तकनीकी चुनौतियां और आर्थिक फायदे को लेकर सवालों के चलते यह प्रोजेक्ट कभी कागज से आगे नहीं बढ़ पाया।

अब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने इस प्रोजेक्ट में नई जान फूंक दी है। साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज यानी SAGE सालों से इसे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही थी। SAGE का कहना है कि वे पहले ही रूट का तकनीकी और वित्तीय आकलन कर चुके हैं। समुद्र की सतह का सर्वे भी हो चुका है।

कैसी होगी यह पाइपलाइन

यह पाइपलाइन अरब सागर के पार करीब 2000 किलोमीटर लंबी होगी। इसका कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3000 मीटर यानी 3 किलोमीटर से भी ज्यादा नीचे होगा। यह दुनिया के सबसे गहरे समुद्री रास्तों में से एक होगा। ओमान से सीधे गुजरात के पश्चिमी तट तक नेचुरल गैस पहुंचेगी।

प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 40 हजार करोड़ रुपये है। गैस भेजने की लागत 2 से 2.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के बीच रह सकती है।

पाइपलाइन से क्यों सस्ती पड़ेगी गैस

अभी भारत एलएनजी मंगाता है। इसमें पहले गैस को तरल रूप में बदला जाता है, फिर टैंकरों से लाया जाता है और भारत पहुंचने पर दोबारा गैस में बदला जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया में समय, पैसा और जोखिम तीनों ज्यादा होते हैं। पाइपलाइन के जरिए गैस सीधे आएगी। न टैंकर की जरूरत, न बार-बार रूपांतरण और न होर्मुज का जोखिम। यही इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खूबी है।

सरकारी कंपनियों को मिला काम

पेट्रोलियम मंत्रालय ने SAGE की प्री-फीजिबिलिटी स्टडी के आधार पर तीन बड़ी सरकारी कंपनियों को काम सौंपा है। GAIL, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन मिलकर विस्तृत फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करेंगी।

इस रिपोर्ट के बाद ओमान के साथ गैस सप्लाई, फाइनेंसिंग और अमल को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू हो सकेगी। भारत के लिए यह प्रोजेक्ट ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने का मौका है। ओमान को एक स्थिर और दीर्घकालिक एक्सपोर्ट मार्केट मिलेगा।

FAQ

  1. ओमान-गुजरात पाइपलाइन क्या है और यह क्यों बनाई जा रही है?
    यह अरब सागर के नीचे बिछाई जाने वाली 2000 किलोमीटर लंबी डीप-सी गैस पाइपलाइन है। इसका मकसद भारत को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता से मुक्त करना है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच यह एनर्जी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम माना जा रहा है।
  2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्या है और यह भारत के लिए क्यों अहम है?
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ओमान और ईरान के बीच का एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के कच्चे तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यहां कोई भी रुकावट भारत की एनर्जी सप्लाई और ईंधन कीमतों को सीधे प्रभावित कर सकती है।
  3. इस प्रोजेक्ट पर कितना खर्च होगा और यह कब तक बनेगा?
    प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 40,000 करोड़ रुपये है। अभी GAIL, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। निर्माण की समयसीमा अभी तय नहीं हुई है।
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