Sports Genomics Program
अब डीएनए बताएगा कौन सा खेल आपके लिए है बेस्ट, चीन-उज्बेकिस्तान के बाद भारत में पहल
Kaushiki | Sept 07, 2026, 12:36 IST
Sports Genomics Program
गुजरात ने देश का पहला स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत 10 हजार खिलाड़ियों के डीएनए सैंपल लिए जाएंगे। डीएनए मैपिंग से हर एथलीट के स्टेमिना, डाइट, रिकवरी और चोट के जोखिम को समझकर बेहतर ट्रेनिंग दी जाएगी।
Sports Genomics Program: गुजरात सरकार ने स्पोर्ट्स वर्ल्ड में एक बहुत बड़ी और अनोखी शुरुआत की है। अब मैदान पर खिलाड़ियों का सिलेक्शन सिर्फ उनकी मौजूदा परफॉर्मेंस या फिजिकल स्ट्रेंथ से नहीं होगा। अब सिलेक्शन साइंटिफिक मेथड्स से उनकी असली फिजिकल कैपेबिलिटी और टैलेंट को पहचाना जाएगा।
सरकार इसके लिए स्पोर्ट्स जीनोमिक्स टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही है। गुजरात इस तरह का साइंस बेस्ड प्रोग्राम चलाने वाला भारत का पहला राज्य बनने जा रहा है। भारत में पहली बार कोई राज्य खिलाड़ियों की पहचान के लिए उनके डीएनए की जांच करेगा।
इसके जरिए एथलीट्स के बॉडी की कैपेसिटी और जेनेटिक ट्रेट को समझा जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट का काम गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर को सौंपा गया है। आइए इसके बारे में जानें...
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इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 26.50 करोड़ रुपए का बजट पास किया है। आने वाले पांच सालों में करीब दस हजार खिलाड़ियों के सैंपल इकट्ठे किए जाएंगे। इस साल दो हजार एथलीट्स का सैंपल लेने का टारगेट रखा गया है।
गुजरात स्टेट टेनिस एसोसिएशन से जुड़े एथलीट्स के डीएनए सैंपल लेकर इसकी शुरुआत भी कर दी गई है। ये प्रोग्राम खेल के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाएगा। इससे खिलाड़ियों की हिडन टैलेंट को सही समय पर पहचाना जा सकेगा।
डीएनए जांच से हर एथलीट की एक खास पर्सनल प्रोफाइल तैयार की जाएगी। इससे पता चलेगा कि खिलाड़ी की मसल्स किस तरह बनी हैं। शरीर की सहनशक्ति, मेटाबॉलिज्म और एक्सरसाइज पर रिएक्शन का सटीक पता लगेगा। इससे ये भी समझा जा सकेगा कि किस खिलाड़ी के लिए कौन सा खेल बेस्ट है।
उदाहरण के लिए ACTN3 Gene से पता चलता है कि खिलाड़ी स्प्रिंटिंग में अच्छा करेगा या पॉवर गेम्स में। इसके अलावा ACE Gene से शरीर की सहनशक्ति यानी एंड्योरेंस की क्षमता जानी जाती है। इस डेटा से कोच को सही ट्रेनिंग और गाइडेंस देने में काफी मदद मिलेगी।
खेल के दौरान खिलाड़ियों को अक्सर गंभीर चोट लग जाती है। कई बार चोट के कारण खिलाड़ी का करियर ही खत्म हो जाता है। डीएनए टेस्ट से चोट के संभावित खतरों की जानकारी पहले ही मिल जाएगी।
साइंस की मदद से खिलाड़ी के लिए One Player, One Plan की रणनीति बनेगी। इसमें हर खिलाड़ी के हिसाब से डाइट प्लान तैयार किया जाएगा।
साथ ही ट्रेनिंग के बाद रिकवरी का प्लान भी वैज्ञानिक तरीके से बनेगा। इससे खिलाड़ी लंबे समय तक फिट रहेंगे और मैदान पर अपना बेस्ट दे पाएंगे।
इस पूरे प्रोग्राम में तीन अलग-अलग उम्र के खिलाड़ियों को शामिल किया गया है।
आपको बता दें कि स्पोर्ट्स जीनोमिक्स का ये प्रयोग दुनिया के कई बड़े देशों में पहले ही हो चुका है। चीन ने 2022 ओलंपिक खेलों से पहले अपने एथलीट्स का जीनोम सीक्वेंसिंग (Genome sequencing) कराया था। चीन ने करीब 300 बेहतरीन एथलीट्स के डीएनए का इन-डेप्थ स्टडी किया था।
वहीं उज्बेकिस्तान 2014 से स्कूली बच्चों के डीएनए से खेल प्रतिभा पहचान रहा है। 2021 की एक स्टडी में 228 खिलाड़ियों के डीएनए मॉडल (DNA) से 85 फीसदी सटीक नतीजे मिले थे। अब भारत भी इस तकनीक का इस्तेमाल करके नए चैंपियन तैयार करेगा।
इस खास मिशन में कुल 24 अलग-अलग खेलों को शामिल करने की योजना बनी है। एथलेटिक्स, तैराकी, मुक्केबाजी, कुश्ती और ताइक्वांडो जैसे खेल इसमें शामिल हैं। इसके अलावा तलवारबाजी, जूडो, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन और टेबल टेनिस के खिलाड़ियों का भी डेटा बनेगा। Sports
लॉन टेनिस, कबड्डी, तीरंदाजी, निशानेबाजी, खो-खो और शतरंज के एथलीट भी इसमें जुड़ेंगे। शुरुआत टेनिस से हुई है, लेकिन जल्द ही दूसरे खेलों के खिलाड़ियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इससे हर खेल को वैज्ञानिक आधार पर नए स्टार मिलेंगे।
खिलाड़ियों के जेनेटिक डाटा एक्सट्रेमेली सेंसिटिव और पर्सनल इनफार्मेशन होते हैं। इसलिए इस डेटा की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, डेटा की सुरक्षा के लिए टू-टियर कोडन सिस्टम का यूज होगा।
डेटाबेस तक पहुंच बहुत ही सीमित और सुरक्षित रखी जाएगी। खिलाड़ियों से इसके लिए फॉर्मल रिटेन कंसेंट भी ली जा रही है। किसी भी स्थिति में ये डीएनए डेटा पब्लिक नहीं किया जाएगा।
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सरकार इसके लिए स्पोर्ट्स जीनोमिक्स टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही है। गुजरात इस तरह का साइंस बेस्ड प्रोग्राम चलाने वाला भारत का पहला राज्य बनने जा रहा है। भारत में पहली बार कोई राज्य खिलाड़ियों की पहचान के लिए उनके डीएनए की जांच करेगा।
इसके जरिए एथलीट्स के बॉडी की कैपेसिटी और जेनेटिक ट्रेट को समझा जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट का काम गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर को सौंपा गया है। आइए इसके बारे में जानें...
प्रोजेक्ट का बजट कितना है
गुजरात स्टेट टेनिस एसोसिएशन से जुड़े एथलीट्स के डीएनए सैंपल लेकर इसकी शुरुआत भी कर दी गई है। ये प्रोग्राम खेल के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाएगा। इससे खिलाड़ियों की हिडन टैलेंट को सही समय पर पहचाना जा सकेगा।
डीएनए प्रोफाइल से क्या-क्या पता चलेगा
उदाहरण के लिए ACTN3 Gene से पता चलता है कि खिलाड़ी स्प्रिंटिंग में अच्छा करेगा या पॉवर गेम्स में। इसके अलावा ACE Gene से शरीर की सहनशक्ति यानी एंड्योरेंस की क्षमता जानी जाती है। इस डेटा से कोच को सही ट्रेनिंग और गाइडेंस देने में काफी मदद मिलेगी।
चोट से बचाव और सही डाइट प्लान
साइंस की मदद से खिलाड़ी के लिए One Player, One Plan की रणनीति बनेगी। इसमें हर खिलाड़ी के हिसाब से डाइट प्लान तैयार किया जाएगा।
साथ ही ट्रेनिंग के बाद रिकवरी का प्लान भी वैज्ञानिक तरीके से बनेगा। इससे खिलाड़ी लंबे समय तक फिट रहेंगे और मैदान पर अपना बेस्ट दे पाएंगे।
तीन एज ग्रुप्स के खिलाड़ियों पर फोकस
- पहला ग्रुप 14 साल से कम उम्र के बच्चों का है।
- दूसरा ग्रुप 14 से 18 साल के युवाओं का है।
- तीसरा ग्रुप 18 साल से अधिक उम्र के खिलाड़ियों का है।
- स्टेट और नेशनल लेवल्स के चैंपियनों को इसमें पहली प्राथमिकता दी जाएगी। इससे कम उम्र में ही सही खेल का चुनाव करने में आसानी होगी।
दुनिया के अन्य देशों में इसका प्रयोग
वहीं उज्बेकिस्तान 2014 से स्कूली बच्चों के डीएनए से खेल प्रतिभा पहचान रहा है। 2021 की एक स्टडी में 228 खिलाड़ियों के डीएनए मॉडल (DNA) से 85 फीसदी सटीक नतीजे मिले थे। अब भारत भी इस तकनीक का इस्तेमाल करके नए चैंपियन तैयार करेगा।
कुल 24 खेलों के एथलीट होंगे शामिल
लॉन टेनिस, कबड्डी, तीरंदाजी, निशानेबाजी, खो-खो और शतरंज के एथलीट भी इसमें जुड़ेंगे। शुरुआत टेनिस से हुई है, लेकिन जल्द ही दूसरे खेलों के खिलाड़ियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इससे हर खेल को वैज्ञानिक आधार पर नए स्टार मिलेंगे।
डीएनए डेटा की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
डेटाबेस तक पहुंच बहुत ही सीमित और सुरक्षित रखी जाएगी। खिलाड़ियों से इसके लिए फॉर्मल रिटेन कंसेंट भी ली जा रही है। किसी भी स्थिति में ये डीएनए डेटा पब्लिक नहीं किया जाएगा।
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