भारतीय एयरलाइंस की जांच, आधे से ज्यादा विमानों में मिली तकनीकी खामियां
Anjali Dwivedi | Feb 06, 2026, 18:35 IST
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लोकसभा में पेश डेटा के अनुसार 754 में से 377 विमानों में बार-बार खराबी पाई गई है। एअर इंडिया और इंडिगो लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। एयरलाइंस ने कहा- सुरक्षा को कोई खतरा नहीं।
क्या भारतीय एयरलाइंस के विमानों में सफर करना पूरी तरह सुरक्षित है? यह सवाल सरकार के लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के बाद उठा है। इसके अनुसार देश की प्रमुख एयरलाइंस के करीब आधे विमानों में तकनीकी खराबी पाई गई है। इस लिस्ट में एअर इंडिया और इंडिगो जैसी बड़ी कंपनियों के नाम सबसे ऊपर हैं।
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सदन में बताया कि पिछले साल जनवरी से कुल 754 विमानों का विश्लेषण किया गया। जांच में सामने आया कि इनमें से 377 विमान ऐसे थे, जिनमें बार-बार तकनीकी समस्याएं आ रही थीं। यानी देश के लगभग 50 फीसदी विमानों को बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ रही है। यह ऑडिट छह प्रमुख शेड्यूल्ड एयरलाइंस के फ्लीट पर किया गया था।
किसी एयरलाइन के बेड़े (Fleet) में वे सभी विमान शामिल होते हैं जिनका संचालन वह एयरलाइन करती है। उसकी सेवा क्षमताओं और रणनीतिक स्थिति के लिए जरूरी होते हैं। बेड़ा किसी एयरलाइन या विमानन कंपनी के स्वामित्व वाले या उसके द्वारा संचालित विमानों के समूह को सूचितकरता है।
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एअर इंडिया ग्रुप की स्थिति काफी चिंताजनक है। एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के कुल 267 विमानों की जांच की गई, जिनमें से 191 विमानों में बार-बार आने वाली खामियां पाई गईं। यह उनके कुल ऑडिट किए गए बेड़े (Fleet) का लगभग 72 फीसदी हिस्सा है। दूसरी ओर, Indigoके 405 विमानों की जांच हुई और 148 विमानों में खराबी की पुष्टि हुई।
खराबियों की यह समस्या केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। लिस्ट में स्पाइसजेट के 43 विमानों में से 16 और अकासा एयरलाइन के 32 में से 14 विमानों में बार-बार आने वाली दिक्कतें दर्ज की गईं। सरकार ने इन आंकड़ों के जरिए यह साफ कर दिया है कि एविएशन सेक्टर में मेंटेनेंस को लेकर कड़ी निगरानी की जरूरत है।
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एअर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने बहुत सावधानी बरतते हुए खुद अपने पूरे फ्लीट की गहन चेकिंग की थी, इसीलिए खामियों की संख्या अधिक दिख रही है। एयरलाइन के अधिकारियों का तर्क है कि ये खामियां कैटेगरी-D की हैं, जिनमें खराब सीटें, टूटी हुई ट्रे टेबल या सीटों के पीछे लगी स्क्रीन जैसी चीजें शामिल हैं। इनका विमान की सुरक्षा से सीधा संबंध नहीं है।
विमानन नियामक डीजीसीए (DGCA) ने पिछले साल अपनी सर्विलांस एक्टिविटी को काफी तेज कर दिया था। नियामक ने अपनी योजनाबद्ध निगरानी के तहत 3,890 सर्विलांस इंस्पेक्शन, 56 रेगुलेटरी ऑडिट और 492 रैंप इंस्पेक्शन किए हैं। इसके अलावा 84 विदेशी विमानों की भी जांच की गई है ताकि सुरक्षा मानकों में कोई चूक न हो।
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377 विमानों में मिली गड़बड़ी
एयरलाइंस का फ्लीट क्या होता है
एअर इंडिया का 72% फ्लीट बीमार
स्पाइसजेट और अकासा भी रडार पर
एयरलाइन ने सफाई में कहा
DGCA की बढ़ती निगरानी
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