Iran-Israel War: युद्ध का असर: पेट्रोल-डीजल से लेकर सोना तक हो सकता है महंगा

Jitendra Shrivastava | Mar 01, 2026, 16:43 IST
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Iran Israel War
Photograph: (thesootr)

अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के असर से पेट्रोल-डीजल के दाम 10-12 रुपए तक बढ़ सकते हैं। सोना 1.60 लाख रुपए से 1.90 लाख तक महंगा हो सकता है। युद्ध से शेयर बाजार भी गिर सकता है।

News In Short

  • युद्ध से पेट्रोल 95 रुपए से 105 रुपए तक बढ़ सकता है।
  • सोने की कीमत 1.60 लाख रुपए से 1.90 लाख तक जा सकती है।
  • शेयर बाजार में 1-1.5% गिरावट हो सकती है।
  • होर्मुज स्ट्रेट से 20% पेट्रोलियम सप्लाई होती है।
  • भारत अपनी आपूर्ति के लिए रणनीतिक भंडारण का इस्तेमाल कर सकता है।

News In Detail

iran israel war:अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले बढ़ा दिए हैं। इस वॉर से विश्व स्तर पर कच्चे तेल, सोने, चांदी और शेयर बाजार में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। विशेषकर भारत जैसे देशों के लिए, जो कच्चे तेल के आयातक हैं। इस संकट का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक किया तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर ये होगा कि पेट्रोल और डीजल के रेट 10 से 12 रुपए तक बढ़ सकते हैं। वहीं, सोने का भाव 1.60 लाख से बढ़कर 1.90 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। इसके अलावा, युद्ध के कारण निवेशकों का ध्यान सुरक्षा की ओर बढ़ेगा, जिससे शेयर बाजार में गिरावट का अनुमान है।

आइए जानते हैं, किस तरह यह युद्ध हमारे लिए चुनौती बन सकता है और कैसे इसके परिणामस्वरूप भारत पर असर पड़ सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें

Iran Israel War (2)
Iran Israel War (2)


भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करती हैं, और जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे हमारी जेब पर पड़ता है।

वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा की जरूरत का लगभग 90% हिस्सा आयात करता है, जिसमें से करीब 50% कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से आता है। अगर ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर पड़ेगा।

इससे कच्चे तेल की कीमतें $100 से $120 प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जबकि वर्तमान में ब्रेंट क्रूड $70 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। इससे पेट्रोल की कीमत दिल्ली में 95 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 105 रुपए तक पहुंच सकती है, जबकि डीजल 88 रुपए से बढ़कर 96 रुपए तक हो सकता है।

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इतिहास से देखें उदाहरण

इतिहास में जब भी युद्ध हुआ है, तब कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि देखी गई है। उदाहरण के तौर पर, 1973 के यॉम किप्पुर युद्ध में तेल कीमतें $3 से $12 तक बढ़ गई थीं, और 1990 के गल्फ युद्ध में यह $17 से $46 तक पहुंच गई थीं।

Iran Israel War (3)
Iran Israel War (3)


सोने और चांदी की कीमतें

सोना और चांदी युद्ध के समय एक सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाते हैं। जब वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो निवेशक इन धातुओं में निवेश करते हैं ताकि वे अपने पैसे को सुरक्षित रख सकें।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि युद्ध के चलते सोने की कीमत 1.60 लाख रुपए से बढ़कर 1.90 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकती है। चांदी की कीमत भी 2.67 लाख रुपए प्रति किलो से बढ़कर 3.50 लाख रुपए तक जा सकती है।

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क्यों बढ़ती हैं सोने की कीमतें?

युद्ध के समय आर्थिक अस्थिरता और मुद्रास्फीति के कारण, निवेशक सामान्य रूप से सोने जैसे स्थिर और सुरक्षित निवेश साधनों में अपना पैसा लगाते हैं, जिससे उसकी कीमतों में उछाल आता है।

शेयर बाजार पर असर

वहां की स्थिति और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के चलते, भारत जैसे देशों में शेयर बाजारों पर दबाव आ सकता है। युद्ध के दौरान निवेशक अक्सर अपनी पूंजी को जोखिम से बचाने के लिए सुरक्षित संपत्तियों जैसे सरकारी बॉन्ड्स और सोने में निवेश करते हैं।

कैसे गिर सकता है बाजार?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि शेयर बाजार में 1 से 1.5% तक गिरावट आ सकती है। सोमवार को सेंसेक्स 1300 अंक और निफ्टी 300 अंक तक गिर सकता है। निवेशक आमतौर पर ऐसे समय में अधिक जोखिम लेने से बचते हैं, और बाजार में पूंजी की निकासी होती है।

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क्या है होर्मुज स्ट्रेट

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह जलमार्ग लगभग 167 किमी लंबा है, और इसकी चौड़ाई 50 किमी तक है। यह रास्ता वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति का 20% हिस्सा है।

भारत के लिए भी यह मार्ग बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारतीय निर्यात का 10% से ज्यादा हिस्सा इस रास्ते से गुजरता है। भारत के लिए यहां से बासमती चावल, मसाले, चाय, और इंजीनियरिंग सामान की आपूर्ति होती है।

होर्मुज बंद होगा तो क्या?

यदि यह रास्ता बंद हो जाता है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ेगा। इससे न केवल भारत, बल्कि पूरे एशियाई क्षेत्र के लिए संकट खड़ा हो सकता है।

ईरान के लिए भी होर्मुज बंद होने से भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है, क्योंकि यह अपने तेल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है, और इसका सबसे बड़ा खरीदार चीन है।

सऊदी अरब का विकल्प

सऊदी अरब के पास एक वैकल्पिक पाइपलाइन है, जिसे 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' कहते हैं। यह पाइपलाइन 746 मील लंबी है और रोजाना 50 लाख बैरल कच्चा तेल भेज सकती है। यह पाइपलाइन होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने पर कच्चे तेल की आपूर्ति का एक विकल्प हो सकती है, हालांकि यह मार्ग ईरान के मुकाबले अधिक महंगा और समय लेने वाला है।

भारत की तैयारी

भारत इस संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर रहा है। सरकार खाड़ी देशों के बाहर अन्य सप्लायर्स से तेल खरीदने की योजना बना रही है। इसके अलावा, भारत अपने 'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' (SPR) से तेल भी निकाल सकता है, अगर जरूरत पड़ी।

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भारत का रणनीतिक भंडारण

भारत के पास कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है, जिसे इमरजेंसी स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह भंडार भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित है, और यह देश को 10-15 दिन तक तेल आपूर्ति की स्थिति में बनाए रख सकता है।

निष्कर्ष:

अमेरिका और इजराइल के हमले के कारण ईरान की स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। यदि यह संकट और गहरा होता है, तो इसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें, सोने और चांदी की कीमतें, और शेयर बाजार सभी पर प्रभाव पड़ने की संभावना है। सरकार को इस स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी करनी होगी, और भारतीय जनता को भी इसके संभावित असर के लिए तैयार रहना होगा।



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