2027 तक महंगी होंगी खाने-पीने की चीजें, सुपर अल नीनो की दोहरी मार बनेगी वजह
Aman Vaishnav | Aug 19, 2026, 10:30 IST
2027 तक महंगी होंगी खाने-पीने की चीजें
2027 तक अल नीनो और मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण खाने-पीने की चीजें 5% तक महंगी हो सकती हैं। भारत पर खाद सब्सिडी और मानसून की दोहरी मार पड़ेगी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- जेपी मॉर्गन ने 2027 तक महंगाई बढ़ने की चेतावनी दी है।
- सुपर अल नीनो, ईरान-अमेरिका तनाव और महंगी खाद इसकी बड़ी वजह हैं।
- कमजोर मानसून से भारत में फसलों की पैदावार घट सकती है।
- सरकार पर खाद सब्सिडी का बोझ 3 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ सकता है।
- हालांकि सरकारी गोदामों में पर्याप्त अनाज भंडार मौजूद है।
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2027 की पहली छमाही में खाद्य महंगाई 5% तक पहुंच सकती है। 2026 की पहली छमाही में यह आंकड़ा सिर्फ 2.8% था। यानी बढ़ोतरी लगभग दोगुनी हो सकती है।
भारत के लिए यह खबर खास मायने रखती है। यहां की अर्थव्यवस्था में खेती की बड़ी भूमिका है। कम बारिश और महंगी खाद दोनों मिलकर फसलों पर असर डाल सकते हैं।
फिलहाल यह सिर्फ एक अनुमान है लेकिन हालात को हल्के में लेना ठीक नहीं होगा। खाद्य सुरक्षा और महंगाई दोनों मोर्चों पर तैयारी जरूरी है।
खाद संकट की बड़ी वजह
खाद बनाने में नेचुरल गैस का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। गैस महंगी हुई तो खाद बनाना भी महंगा हो जाएगा। महंगी खाद से किसान उसका कम इस्तेमाल करेंगे।
वहीं अगर खाद कारखाने इस संकट से प्रभावित हुए तो नुकसान लंबा चलेगा। ऐसे प्लांट को दोबारा ठीक होने में 1 से 5 साल तक लग सकते हैं।
सब्सिडी का बढ़ता बोझ
अधिकारियों के मुताबिक इस साल यह सब्सिडी खर्च 3 लाख करोड़ रुपए से ऊपर जा सकता है। मिडिल ईस्ट का संकट लंबा खिंचा तो यह बोझ और बढ़ेगा। सरकार के सामने कठिन फैसला होगा।
मानसून पर मंडराता खतरा
अल नीनो के दौरान ऑस्ट्रेलिया और एशिया के ऊपर हाई प्रेशर बनता है। इससे भारत में बारिश कम होती है और सूखे के हालात बनते हैं।
इसके उलट साउथ अमेरिका के ऊपर लो प्रेशर बनने से वहां भरपूर बारिश होती है। यही वजह है कि अल नीनो को भारत के मानसून का दुश्मन माना जाता है।
आईएमडी के मुताबिक इस साल मानसून में औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान है। लंबे समय का औसत 87 सेंटीमीटर रहा है। यानी सामान्य से करीब 10% कम बारिश होगी। इस बार सूखे का खतरा भी लगभग दोगुना हो चुका है।
1997 का उदाहरण
किसानों पर सीधी मार
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के मुताबिक बाजरा का 89% उत्पादन मानसूनी बारिश पर निर्भर है। दालों का 88% और तिलहन का 69% उत्पादन भी इसी पर टिका है। शुरुआती महीनों में बारिश कम हुई तो किसान बुवाई से बचेंगे।
साल 2023 में सिर्फ सामान्य अल नीनो आने पर कृषि उत्पादन में 6% गिरावट का अनुमान लगाया गया था। अगर 2026 में सुपर अल नीनो आया तो नुकसान इससे 2 से 3 गुना ज्यादा हो सकता है।
घरेलू महंगाई पहले से बढ़त पर
यानी सिर्फ सात महीनों में महंगाई दर लगभग दोगुनी हो चुकी है। अगर वैश्विक खाद्य महंगाई भी बढ़ी तो घरेलू बजट पर दोहरा दबाव पड़ सकता है।
अनाज भंडार अभी पर्याप्त
1 अप्रैल 2026 के आंकड़ों के मुताबिक चावल का मौजूदा स्टॉक 386.10 लाख टन था, जबकि तय मानक सिर्फ 135.8 लाख टन है। गेहूं का स्टॉक 217.92 लाख टन था, जबकि जरूरत 74.6 लाख टन ही थी।
आने वाले महीनों में मौसम और वैश्विक हालात दोनों पर नजर रखनी होगी। सरकार, किसान और आम उपभोक्ता तीनों के लिए यह समय सतर्क रहने का है। सही समय पर उठाए कदम महंगाई का असर कम कर सकते हैं।
FAQ
- 2027 तक महंगाई क्यों बढ़ सकती है?
जेपी मॉर्गन के मुताबिक कमजोर मानसून, ईरान-अमेरिका तनाव और महंगी खाद इसकी मुख्य वजहें हैं। इनसे फसलों की पैदावार घट सकती है। इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों के दाम पर पड़ेगा। - अल नीनो का भारत पर क्या असर होगा?
सुपर अल नीनो से मानसून कमजोर पड़ सकता है और सूखे का खतरा बढ़ जाता है। इससे फसलों की पैदावार औसतन 3.5% तक घट सकती है। खासतौर पर खरीफ फसलों को नुकसान होने की आशंका है। - 2027 में क्या भारत में अनाज की कमी होगी?
फिलहाल ऐसी आशंका नहीं है। भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में तय बफर स्टॉक से करीब 3 गुना ज्यादा अनाज मौजूद है। यह स्टॉक अचानक आई किसी कमी को संभालने के लिए काफी है।
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