सीएम मोहन यादव का सख्त फैसला: एमपी में एनालॉग पनीर की बिक्री पर बैन, जानें क्यों

Manya Jain | Aug 07, 2026, 14:30 IST
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maharashtra analog paneer ban fda order
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मध्य प्रदेश सरकार ने एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगा दिया है। सीएम मोहन यादव ने यह फैसला अधिकारियों की बैठक में लिया। राज्य में रोज 300 से 400 क्विंटल नकली पनीर बिकने का अनुमान था। मानवाधिकार आयोग ने भी इस पर चिंता जताई थी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश सरकार ने एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगा दिया है।
  • महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद यह फैसला लेने वाला एमपी चौथा राज्य बन गया है।
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों की बैठक में यह निर्देश दिया।
  • राज्य में रोजाना करीब 300 से 400 क्विंटल नकली पनीर बिकने का अनुमान था।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले में गंभीर चिंता जताई है।

बैठक में लिया गया अहम फैसला

बुधवार को गुजरात रवाना होने से पहले सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। इसी बैठक में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने का फैसला हुआ।

सीएम ने कहा, "मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर हम प्रतिबंध लगा रहे हैं, जैसा अन्य राज्यों ने लगाया है।" उन्होंने आगे कहा कि सरकार प्राकृतिक रूप से दुग्ध उत्पादन बढ़ाएगी और प्राकृतिक तरीके से ही पनीर बनाने पर जोर देगी।

रोज सैकड़ों क्विंटल की हो रही थी बिक्री

मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की रोजाना आवक और बिक्री करीब 300 से 400 क्विंटल होने का अनुमान लगाया गया है। इस हिसाब से हर महीने राज्य में करीब 9 हजार से 12 हजार क्विंटल यानी 900 से 1200 टन एनालॉग पनीर की खपत हो रही थी।

इतनी बड़ी मात्रा में बिक्री को देखते हुए सरकार ने इस पर सख्त कदम उठाने का फैसला लिया।

एक्सपर्ट कोट्स

डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
"मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर हम प्रतिबंध लगा रहे हैं, जैसा अन्य राज्यों ने लगाया है। हम प्राकृतिक रूप से दुग्ध उत्पादन को बढ़ाएंगे।"

प्रियंक कानूनगो, सदस्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)
"एनालॉग पनीर घातक है। सिर्फ एरोबिक स्टार्च वाला टेस्ट करने से एनालॉग पनीर पकड़ में नहीं आता है।"

एनालॉग पनीर आखिर होता क्या है

एनालॉग पनीर एक ऐसा प्रोडक्ट है जो देखने में बिल्कुल पनीर जैसा लगता है। लेकिन इसमें दूध की चर्बी की जगह वनस्पति तेल या दूसरी नॉन-डेयरी फैट मिलाई जाती है। असली पनीर पूरी तरह दूध से बनता है, जबकि इसमें कई अलग चीजें मिलती हैं।

ANALOG PANEER
ANALOG PANEER


इसमें स्किम्ड मिल्क पाउडर, वनस्पति फैट, स्टार्च, इमल्सीफायर और स्टेबलाइजर जैसी चीजें शामिल होती हैं। इसे बनाने की लागत असली पनीर से काफी कम आती है। इसी वजह से रेस्टोरेंट, कैटरिंग सर्विस और प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री में इसका इस्तेमाल आम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सही तरीके से बनाया गया एनालॉग पनीर खाने में असुरक्षित नहीं होता। लेकिन असली समस्या पारदर्शिता की है। ग्राहक को साफ तौर पर बताया जाना चाहिए कि वह असली पनीर नहीं, बल्कि दूध का विकल्प खरीद रहा है।

महाराष्ट्र में बैन

महाराष्ट्र सरकार ने एनालॉग नकली पनीर के उत्पादन, वितरण और बिक्री पर पूरे एक साल की रोक लगा दी है। यह आदेश 30 जुलाई 2026 को गजट नोटिफिकेशन के जरिए जारी हुआ। FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने इसे मंजूरी दी।

सभी फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को इस आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर कोई व्यक्ति या कंपनी एनालॉग पनीर बनाते, स्टोर करते, बांटते या बेचते पकड़ी गई, तो कानूनी कार्रवाई होगी। इसमें जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा भी शामिल हो सकती है।

यह सख्ती अचानक नहीं आई है। हाल की लैब रिपोर्ट्स में चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। महाराष्ट्र में जांचे गए पनीर सैंपल में से 35 प्रतिशत से ज्यादा वनस्पति फैट मिलावट के कारण फेल पाए गए। इसी के बाद सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया।

ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह

FDA ने ग्राहकों को कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं। पनीर हमेशा भरोसेमंद ब्रांड या लाइसेंस प्राप्त डेयरी दुकान से ही खरीदें। पैकेट पर लिखी सामग्री की सूची को ध्यान से जरूर पढ़ें।

अगर किसी प्रोडक्ट पर वनस्पति फैट लिखा हो, या उसे एनालॉग या इमिटेशन डेयरी प्रोडक्ट बताया गया हो, तो समझ लें कि यह असली पनीर नहीं है। यह दूध से बने पारंपरिक पनीर से बिल्कुल अलग होता है।

FDA ने आम लोगों से भी अपील की है। अगर कहीं मिलावटी या गलत लेबल वाला पनीर मिले, तो इसकी शिकायत फूड सेफ्टी अधिकारियों से जरूर करें। इससे बाजार में मिलावट रोकने में मदद मिलेगी।

कौन हैं तुकाराम मुंढे

तुकाराम मुंढे 2005 बैच के IAS (Indian Administrative Service) अधिकारी हैं। वे महाराष्ट्र के बीड जिले के एक छोटे किसान परिवार से आते हैं। बचपन में पिता के साथ खेत में काम किया और सब्जी भी बेची। इसके बाद उन्होंने IAS बनने तक का सफर तय किया। उनकी पहचान बिना डरे काम करने वाले अफसर की रही है।

IAS OFFICER TUKARAM MUNDHE
IAS OFFICER TUKARAM MUNDHE


लगभग 20 साल के करियर में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। इसके बावजूद उनके काम करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं आया। 2015 में उन्होंने एक प्रभावशाली मंत्री का काफिला तक रोक दिया था। सोलापुर में पोस्टिंग के दौरान सूखा प्रभावित गांवों तक पानी पहुंचाया। इसी वजह से उन्हें "वाटर मैन" कहा जाने लगा।

FDA कमिश्नर बनते ही एक्शन शुरू

25 मई को तुकाराम मुंढे को FDA कमिश्नर बनाया गया। सिर्फ 3 दिन बाद ही उन्होंने मिलावटखोरों पर कार्रवाई शुरू कर दी। 2 महीने में महाराष्ट्र भर में 1100 से ज्यादा छापे मारे गए। इस दौरान 56 जाने-माने रेस्टोरेंट और ब्रांड के लाइसेंस रद्द किए गए।

करीब 49 करोड़ रुपये का खराब और मिलावटी खाना जब्त किया गया। गुटखा माफिया पर मकोका (MCOCA – Maharashtra Control of Organised Crime Act) तक लगाया गया। पहले साल भर में करीब 15,000 सैंपल जांचे जाते थे। मुंढे के आने के बाद सिर्फ 15 दिन में 8700 सैंपल की जांच हो गई।

हाईकोर्ट की कैंटीन तक पहुंची जांच

नवी मुंबई के एक फाइव स्टार होटल का लाइसेंस रद्द होने पर मामला मुंबई हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने FDA से सवाल किया कि सिर्फ प्राइवेट होटलों पर ही कार्रवाई क्यों हो रही है। कोर्ट ने सरकारी दफ्तरों और हाईकोर्ट की कैंटीन में भी जांच करने को कहा।

इसके बाद FDA की टीम ने हाईकोर्ट परिसर की कैंटीन में भी छापा मारा। इस कार्रवाई ने तुकाराम मुंढे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया। नेता उन्हें जिद्दी मानते हैं, लेकिन आम जनता में उनकी छवि हीरो जैसी है। विपक्ष के नेता भी कह रहे हैं कि उनका तबादला नहीं होना चाहिए।

FAQ

  1. मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध कब लगाया गया?
    सीएम डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को अधिकारियों की बैठक में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया। यह फैसला महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद लिया गया है।
  2. एनालॉग पनीर क्या होता है?
    एनालॉग पनीर असली दूध से बने पनीर का सस्ता विकल्प है। इसमें दूध की जगह वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य सामग्री मिलाई जाती है।
  3. मध्य प्रदेश में रोज कितना एनालॉग पनीर बिकता था?
    राज्य में रोजाना करीब 300 से 400 क्विंटल एनालॉग पनीर बिकने का अनुमान था। इस हिसाब से हर महीने करीब 900 से 1200 टन इसकी खपत हो रही थी।
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