बगावत से लेकर भाजपा गठबंधन तक, जानें अजित पवार के राजनीतिक संघर्ष की कहानी
Aman Vaishnav | Jan 28, 2026, 12:15 IST
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महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में राजनीति में कदम रखा था। अजीत पवार ने कई अहम विभागों में मंत्री रहते हुए अपनी पहचान बनाई। साल 2019 में उन्होंने बीजेपी से गठबंधन भी किया था।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन
अजित पवार की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही, जिनके शायद ही कोई दुश्मन होंगे। चाहे पार्टी कोई हो, और नेता कहीं का हो, उनके हमेशा अच्छे रिश्ते रहे। यही वजह है कि उनके निधन के बाद विरोधी दलों के नेता भी उन्हें अजातशत्रु कहकर सम्मानित कर रहे हैं।
अजित पवार का संघर्षपूर्ण सफर
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अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर में कई अहम मंत्री पद संभाले हैं।
- जून 1991 से नवंबर 1992 तक, वह कृषि और बिजली के राज्य मंत्री रहे थे।
- नवंबर 1992 से फरवरी 1993 तक, जल आपूर्ति, बिजली और योजना राज्य मंत्री बने थे।
- अक्टूबर 1999 से जुलाई 2004 तक, वह सिंचाई और बागवानी मंत्री रहे थे।
- जुलाई 2004 से नवंबर 2004 तक, उन्होंने ग्रामीण विकास, जल आपूर्ति और स्वच्छता, और सिंचाई मंत्री के रूप में भी काम किया था।
- नवंबर 2004 से नवंबर 2009 तक, वह जल संसाधन मंत्री रहे (कृष्णा घाटी सिंचाई को छोड़कर), साथ ही जल संसाधन और स्वच्छता विभाग भी देखे।
- नवंबर 2009 से नवंबर 2010 तक, वह जल संसाधन मंत्री रहे (कृष्णा घाटी और कोंकण सिंचाई को छोड़कर) और ऊर्जा मंत्री भी थे।
- नवंबर 2010 से सितंबर 2012 तक, वह उपमुख्यमंत्री बने। वित्त, योजना और ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी भी संभाली थी।
- दिसंबर 2012 से सितंबर 2014 तक, उन्होंने फिर से उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। वित्त, योजना और ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी उठाई।
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जब अपने चाचा के खिलाफ की बगावत
फिर दिसंबर 2019 में, अजित पवार अपने चाचा के साथ लौटे और उद्धव ठाकरे के महा विकास अघाड़ी गठबंधन के साथ उपमुख्यमंत्री बनकर सरकार में फिर से शामिल हो गए। ये कदम उनके लिए एनसीपी में अपनी स्थिति को फिर से मजबूत करने और अपनी पकड़ बनाए रखने की रणनीति थी।
फिर जुलाई 2023 में, महा विकास अघाड़ी सरकार गिरने के बाद अजित पवार ने एक बार फिर अपने चाचा के खिलाफ बगावत की। इसके बाद उनकी पार्टी में बटवारा हो गया। अजित पवार बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना सरकार में शामिल हो गए।
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2024 का लोकसभा और विधानसभा चुनाव
जब बीजेपी, शिवसेना और NCP के महायुति गठबंधन ने 2024 का विधानसभा चुनाव लड़ा, तब अजित पवार को बहुत कम आंका जा रहा था। कई लोगों ने तो उन्हें पहले ही खारिज कर दिया था। लेकिन जब नतीजे आए, तो अजित पवार ने सबको चौंका दिया।
महायुति गठबंधन को शानदार सफलता मिली, और ये जीत सिर्फ एकनाथ शिंदे या देवेन्द्र फडणवीस की नहीं, बल्कि अजित पवार की भी थी। 41 सीटों के साथ अजित पवार ने साबित कर दिया कि वह अकेले भी जनता को अपने पक्ष में लाने की ताकत रखते हैं।
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