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News In Short
ट्रस्टीफाइड की जांच में नामी दूध ब्रांड्स में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया तय सीमा से 98 गुना अधिक मिला।
दूध में झाग बनाने के लिए डिटर्जेंट और गाढ़ापन बढ़ाने के लिए यूरिया का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।
उत्तर भारत के राज्यों में मिलने वाला दूध मिलावट के मामले में सबसे ज्यादा असुरक्षित पाया गया है।
FSSAI की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में लिए गए 38% नमूने मिलावटी निकले।
भारत दुनिया का 25% दूध पैदा करता है, फिर भी हर तीसरा सैंपल गुणवत्ता में फेल है।
News In Detail
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन इसी के समानांतर एक कड़वा सच यह भी है। यहां बिकने वाला दूध गुणवत्ता के पैमाने पर लगातार पिछड़ रहा है। हाल ही में एक स्वतंत्र लैब टेस्टिंग प्रोग्राम ट्रस्टीफाइड की रिपोर्ट ने देश के बड़े डेयरी ब्रांड्स की साख पर सवालिया निशान लगा दिया है। जांच में सामने आया है कि कई नामी कंपनियों का दूध भी सुरक्षित मानकों पर खरा नहीं उतरा है।
लैब रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
ट्रस्टीफाइड की जांच के नतीजे बेहद खौफनाक हैं। कुछ नामी ब्रांड्स के दूध के पाउच में कोलीफॉर्म का लेवल FSSAI (भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण) की तय सीमा से 98 गुना अधिक पाया गया। इसके अलावा, टोटल प्लेट काउंट का स्तर भी सुरक्षा मानकों से कहीं ज्यादा था। इसका सीधा मतलब है कि यह दूध न केवल दूषित है, बल्कि गंभीर बीमारियों को न्योता भी दे रहा है।
दूध की शुद्धता कैसे चेक करें
आजकल बाजार में मिलावटी दूध बिक रहा है? चाहे आप गाय-भैंस का दूध खरीदें या पैकेट वाला, दूध में मिलावट होने की संभावना हमेशा रहती है। इसलिए, यह जानना बहुत जरूरी है कि आपका दूध शुद्ध है या नहीं। आइए इन पांच टिप्स से पता करें दूध की शुद्धता...
1. रंग की पहचान: शुद्ध दूध उबालने के बाद भी सफेद ही रहता है। यदि दूध कुछ देर रखने के बाद पीला पड़ने लगे, तो समझ लीजिए कि इसमें यूरिया जैसी हानिकारक मिलावट की गई है।
2. उबालकर परखें: दूध को धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक उबालें। यदि अंत में बचा हुआ हिस्सा सख्त और दानेदार दिखे तो इसमें स्टार्च मिला है, जबकि शुद्ध दूध का मावा हमेशा चिकना और मुलायम होता है।
3. स्वाद और गंध: असली दूध में एक प्राकृतिक मिठास और हल्की खुशबू होती है। अगर दूध सूंघने पर साबुन जैसी तीखी या आर्टिफिशियल गंध आए, तो यह डिटर्जेंट की मिलावट का साफ संकेत है।
4. झाग का टेस्ट: एक कांच की बोतल में थोड़ा दूध लेकर उसे जोर से हिलाएं। यदि बहुत ज्यादा झाग बने और काफी देर तक न बैठे, तो समझ जाएं कि झाग बनाने के लिए इसमें डिटर्जेंट मिलाया गया है।
5. बहने की रफ्तार: दूध की एक बूंद को किसी चिकनी सतह या उंगली पर टपकाएं। असली दूध धीरे-धीरे सफेद लकीर छोड़ते हुए बहता है, जबकि पानी मिला हुआ दूध बिना कोई निशान छोड़े तेजी से बह जाता है।
भारत सबसे बड़ा दूध उत्पादक
आंकड़े बताते हैं कि भारत वैश्विक दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है, लेकिन मिलावट के खेल में भी पीछे नहीं हैं। हाल के वर्षों में लिए गए हर तीन नमूनों में से एक नमूना फेल पाया गया है। साल 2025 में FSSAI (fssai servay ) की जांच में 38 प्रतिशत नमूने मिलावटी पाए गए, जो इस संकट की गहराई को दर्शाते हैं।
उत्तर भारत में सबसे ज्यादा सफेद जहर का कारोबार
दूध में मिलावट के मामले में क्षेत्रीय आंकड़े भी चौंकाते हैं। FSSAI की मिल्क सर्विलांस रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत में अनपाश्चुराइज्ड यानी कच्चा दूध सबसे ज्यादा असुरक्षित है, जहां 47 प्रतिशत नमूने फेल रहे। इसके मुकाबले दक्षिण भारत में 18 प्रतिशत, पश्चिम भारत में 23 प्रतिशत और पूर्वी भारत में करीब 13 प्रतिशत नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।
पानी, डिटर्जेंट और यूरिया, क्या पी रहे हैं हम?
इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन की एक विस्तृत पड़ताल में दूध के असली जहर का पता चला है। जांचे गए 330 सैंपल्स में से 70.6 प्रतिशत में मिलावट मिली। इसमें से अधिकांश नमूनों में पानी की मिलावट थी, लेकिन सबसे डरावनी बात यह है कि 23.9 प्रतिशत नमूनों में डिटर्जेंट और 9.1 प्रतिशत में यूरिया पाया गया। यह मिश्रण शरीर के अंगों को धीरे-धीरे डैमेज करने के लिए काफी है।
अगर पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड देखें, तो मिलावट का ग्राफ लगातार बढ़ा है-
2015-2018 के बीच: मिलावटी नमूनों में 16.64 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
वित्त वर्ष 2022: जांचे गए 798 नमूनों में से आधे मिलावटी पाए गए।
2025 की रिपोर्ट: 38 प्रतिशत दूध के सैंपल शुद्धता की कसौटी पर फेल रहे।
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