Monsoon 2026: कब आएगा मानसून, कब से होगी झमाझम बारिश, जानें IMD का अपडेट

Sandeep Kumar | May 02, 2026, 19:03 IST
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monsoon 2026
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मानसून इस बार सबसे पहले अंडमान में दस्तक देगा। जम्मू से मध्य प्रदेश तक मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। अल नीनो का असर रहने के बावजूद, देश में वर्षा सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।

News in Short

  • मानसून 14-16 मई को अंडमान पहुंचेगा।
  • कुछ हिस्सों में अधिक बारिश, कुछ में कमी हो सकती है।
  • तापमान में राहत, लेकिन गर्मी की तीव्रता बढ़ सकती है।
  • प्री-मानसून मध्य प्रदेश में जून में सक्रिय होगा।
  • अलनीनो का असर मानसूनी बारिश पर रहेगा, जिससे असमान बारिश हो सकती है।

News in Detail

मई में उत्तर भारत में गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। कुछ हिस्सों में अधिक बारिश और कुछ में कमी हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आगामी मानसून पूर्वानुमान जारी किया है। मानसून 14 से 16 मई के बीच अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पहुंच सकता है। अलनीनो का असर बारिश पर पड़ सकता है, जिससे बारिश असमान हो सकती है।

अंडमान-निकोबार द्वीप पहुंचेगा मानसून

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 14 से 16 मई के बीच अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पहुंचेगा। यह सामान्य मानसून आगमन के करीब है।

आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि मानसून सामान्य से पहले शुरू हो सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत और हिमालय की तराई में अधिक बारिश हो सकती है। पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर में बारिश असमान हो सकती है।
तापमान पर असर और राहत

मई में, जम्मू, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में तापमान पर नियंत्रण रहेगा, जिससे लू का असर सीमित हो सकता है। हालांकि, महीने के अंत में तापमान बढ़ने की संभावना है, जिससे गर्मी की तीव्रता अस्थायी रूप से बढ़ सकती है।

उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान सामान्य या उससे कम रह सकता है, जबकि देश के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक हो सकता है। इससे रात के समय भी गर्मी बनी रह सकती है, जिससे लोगों को पूरी राहत नहीं मिलेगी।

एमपी में प्री-मानसून

मौसम विभाग के अनुसार, 16 जून के आसपास मध्यप्रदेश में प्री-मानसून ( Monsoon )सक्रिय हो सकता है। इसके बाद कई जिलों में झमाझम बारिश की संभावना है। पिछले कुछ हफ्तों से गर्मी बढ़ी हुई है, लेकिन अब मौसम में बदलाव आ सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और सागर संभाग में प्री-मानसून की बौछारें सबसे पहले पहुंचेंगी। इन इलाकों में तेज हवा, गरज-चमक और बारिश के आसार हैं। धीरे-धीरे यह प्रभाव पूरे प्रदेश में दिखेगा।

पूर्वी भारत में बारिश की असमानता

पूर्वी भारत, विशेषकर पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार और झारखंड में बारिश की स्थिति असमान रह सकती है। यहां बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है, जो कृषि और जल प्रबंधन के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इन क्षेत्रों में अचानक भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

क्या होता है अल नीनो?

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना (Climate Phenomenon) है। इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इस गर्माहट से दुनिया भर के मौसम पैटर्न बदल जाते हैं। कहीं भीषण सूखा पड़ता है तो कहीं बाढ़ की स्थिति बनती है। भारत जैसे देशों में इसका सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ता है। मानसून कमजोर हो जाता है और बारिश सामान्य से कम होती है। साथ ही गर्मी का स्तर भी तेजी से बढ़ता है।

अल नीनो का असर

इस बार अलनीनो का असर मानसूनी बारिश पर पड़ने की संभावना है। यह समुद्र विज्ञानियों के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु है क्योंकि अलनीनो भारतीय मानसून को कमजोर कर सकता है। इस बार समुद्री कारकों में न्यूट्रल स्थिति है, जो धीरे-धीरे अलनीनो की ओर बढ़ रही है। यह स्थिति बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश की असमानता देखी जा सकती है।

आईएमडी का पूर्वानुमान

आईएमडी के मुताबिक, हिमालय की तराई, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे क्षेत्रों में लू के दिनों की संख्या सामान्य से अधिक रह सकती है। विशेष रूप से सौराष्ट्र क्षेत्र में तीन से चार दिन तक तीव्र हीटवेव की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में तापमान के बढ़ने से लोगों को कठिनाई हो सकती है।

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भारत में कब आएगा मानसून

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