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NEWS IN SHORT
- नाबालिग को फ्लाइंग किस देना अब होगा यौन अपराध।
- मुंबई की कोर्ट नौ साल पुराने मामले में सुनाया फैसला।
- आरोपी को मुंबई कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा।
- युवक ने लड़की को ट्यूशन जाते वक्त दिया था फ्लाइंग किस।
NEWS IN DETAIL
मुंबई की कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। नाबालिग को 'फ्लाइंग किस' देना अब जुर्म होगा। कोर्ट ने इसे एक यौन इशारा माना है। यह लड़की की गरिमा के खिलाफ माना जाएगा। यह मामला करीब नौ साल पुराना है।
अब जाकर आरोपी को कड़ी सजा मिली है। यह फैसला समाज को सख्त संदेश देता है। गलत व्यवहार करने वाले अब बच नहीं पाएंगे। कानून महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा करेगा। किसी भी तरह का अनुचित व्यवहार बर्दाश्त नहीं होगा।
2017 से शुरू हुआ विवाद
यह मामला साल 2017 की शुरुआत का है। उस समय पीड़ित लड़की की उम्र केवल 16 साल (नाबालिग) थी, जबकि आरोपी 19 साल का था। घटना मुंबई के एक रिहायशी इलाके की है।
पहली घटना: जनवरी 2017 में जब लड़की ट्यूशन जा रही थी, तब आरोपी ने उसका हाथ पकड़कर उसे खींचा। बच्ची इतनी डर गई कि उसने लोक-लाज के कारण घर पर कुछ नहीं बताया।
हल्दी-कुमकुम की घटना: 31 जनवरी 2017 को एक कार्यक्रम के दौरान आरोपी ने सबके सामने लड़की को 'फ्लाइंग किस' दिया। एक पड़ोसी ने यह देख लिया और तुरंत लड़की की मां को पूरी बात बताई।
समझौते से पुलिस केस तक: जब लड़की के पिता ने आरोपी के घरवालों को समझाने की कोशिश की, तो उन्होंने उल्टा गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद परिवार ने हार मानकर पुलिस में रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट में वकील ने अजीब दलील पेश की। उन्होंने कहा फ्लाइंग किस देना एक सामान्य इशारा था। उनका दावा था कि आरोपी बस डांस कर रहा था। जज ने इस बात को तुरंत खारिज कर दिया। उन्होंने आरोपी के तर्क को बिल्कुल नहीं माना। कोर्ट ने इसे लड़की का अपमान (पॉक्सो एक्ट) माना है।
कोर्ट ने बताई यौन उत्पीड़न की परिभाषा
कोर्ट ने यौन उत्पीड़न पर बड़ी बात कही है। इसके लिए शरीर को छूना जरूरी नहीं है। अगर कोई इशारा लड़की को डराता है, तो वह जुर्म है। मर्यादा को ठेस पहुंचाना भी अपराध की श्रेणी में आएगा। 'फ्लाइंग किस' देना एक गलत यौन संकेत है। इससे नाबालिग के सम्मान को गहरी चोट पहुंचती है।
युवक पर लगे ये एक्ट
आज आरोपी शादीशुदा है और एक छोटे बच्चे का पिता है। उसने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए कम सजा की मांग की थी। लेकिन कोर्ट ने अपराध की गंभीरता और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए उसे 3 साल के कठोर कारावास और 3000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
SOOTR KNOWLEDGE
क्या है पॉक्सो एक्ट
POCSO Act: प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट 2012 के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का यौन दुर्व्यवहार अपराध है।
कानूनी अधिकार: किसी भी अनुचित स्पर्श या इशारे के खिलाफ बच्चे या उनके अभिभावक स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
बचाव पक्ष के दावों को कोर्ट ने किया खारिज
आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया। उसका कहना था कि पड़ोसी ने उसे फंसाया है। पुरानी दुश्मनी के कारण झूठा केस दर्ज हुआ। कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। जज ने कहा कि माता-पिता ऐसा नहीं करेंगे।
वे अपनी बेटी की इज्जत दांव पर नहीं लगाएंगे। पड़ोसी के लिए कोई अपना भविष्य खराब नहीं करेगा। पीड़िता की गवाही सजा के लिए काफी थी। कोर्ट ने सभी सबूतों को सही माना। आरोपी को अंततः दोषी करार दिया गया।
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