तालिबान का नया क्रूर कानून: पति अपनी पत्नी और बच्चों की कर सकता पिटाई, बस हड्डी न टूटे

तालिबान ने अफगानिस्तान में नया दंड संहिता लागू किया है। इसमें महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा को अब कानूनी मान्यता दी गई है। इस कानून के तहत पति अपनी पत्नी और बच्चों को शारीरिक सजा दे सकता है।

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Manya Jain
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देश दुनिया न्यूज. अफगानिस्तान में तालिबान ने नया और खौफनाक कानून लागू किया है। यह तालिबान का फरमान घरेलू हिंसा के लिए छूट देता है। अब पति अपनी पत्नी और बच्चों को पीट सकता है। पिटाई तब तक जायज है जब तक हड्डी न टूटे। शरीर पर गहरा घाव होने पर ही अपराध माना जाएगा। मानवाधिकार संगठन 'रवादारी' ने इस पर गहरी चिंता जताई है। 

यह नया कानून 2009 के महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने वाले कानून के खिलाफ है। इस कानून के बाद घरेलू हिंसा को एक तरह से कानूनी संरक्षण मिलेगा ।

घरेलू हिंसा को कानूनी मान्यता: "हड्डी न टूटे तो पीटना सही"

इस नए कानून के सबसे विवादित और क्रूर प्रावधानों में से एक घरेलू हिंसा से संबंधित है। कानून के अनुसार, एक पति अपनी पत्नी और बच्चों को शारीरिक सजा (मानवाधिकार उल्लंघन) दे सकता है।

  • मारपीट की छूट: अब पत्नी या बच्चों को पीटना तब तक अपराध नहीं है, जब तक कि उनकी हड्डी न टूट जाए या कोई गहरा घाव न हो जाए। शरीर पर पड़ने वाले नीले निशानों या सामान्य चोटों को अब जुर्म नहीं माना जाएगा।

  • नाममात्र की सजा: अगर पति बहुत ज़्यादा ताकत का इस्तेमाल करता है और हड्डी टूट भी जाती है, तो उसे ज़्यादा से ज़्यादा सिर्फ 15 दिन की जेल होगी।

  • इंसाफ की मुश्किल: पीड़ित महिला को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए पति या किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ ही कोर्ट जाना होगा। साथ ही, उसे पूरी तरह पर्दे में रहकर जज को अपनी चोटें दिखानी होंगी, जो असल में नामुमकिन और अपमानजनक है।

हैसियत के हिसाब से होगा न्याय 

नया कानून समाज को चार श्रेणियों में बांटता है। यह नियम पुरानी सामंती व्यवस्था की याद दिलाता है। इसमें अपराधी के सामाजिक वर्ग के अनुसार सजा तय होगी। सजा का फैसला अब जुर्म की गंभीरता पर नहीं होगा। बड़े वर्ग के लोगों को कम सजा मिल सकती है।

समाज के चार वर्ग और अलग-अलग सजा:

  • धर्म गुरु (उलेमा): अगर ये कोई जुर्म करते हैं, तो इन्हें सिर्फ प्यार से समझाकर या सलाह देकर छोड़ दिया जाएगा।

  • अमीर और रसूखदार (उच्च वर्ग): इस क्लास के लोगों को सिर्फ कोर्ट बुलाकर चेतावनी दी जाएगी कि आगे से ऐसा न करें

  • आम आदमी (मध्यम वर्ग): अगर यही जुर्म कोई मिडिल क्लास व्यक्ति करता है, तो उसे सीधे जेल की सजा काटनी होगी।

  • गरीब और मजदूर (निचला वर्ग): सबसे बुरा हाल इनका होगा; इन्हें जेल भी भेजा जाएगा और भयानक शारीरिक प्रताड़ना भी दी जाएगी।

यह व्यवस्था स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि तालिबान एक ऐसी 'जाति व्यवस्था' स्थापित कर रहा है जहां रसूखदार लोग कानून के दायरे से बाहर हैं।

पति से बिना पूछे मायके जाना गुनाह

यदि कोई विवाहित महिला अपने पति की अनुमति के बिना अपने रिश्तेदारों के घर जाती है, तो उसे 3 महीने तक की जेल हो सकती है। यह महिलाओं की आवाजाही की स्वतंत्रता पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और डर का माहौल

तालिबान ने कानून की आलोचना को अपराध घोषित किया है। अब लोग चुपके से भी राय देने से डरते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे महिलाओं के लिए भयावह बताया है। मानवाधिकार संगठन 'रवादारी' ने कड़े कदम उठाने की अपील की है।

दुनिया भर के विशेषज्ञ तालिबान की हरकतों से परेशान हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव सिर्फ बयानों तक सीमित है। तालिबान को अब किसी भी बड़ी कार्रवाई का डर नहीं है। वह मानता है कि उसे कोई रोकने वाला नहीं है।

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