ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना रेप की कोशिश के बराबर: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। कोर्ट ने ब्रेस्ट पकड़ने और पायजामे का नाड़ा खींचने को रेप की कोशिश माना। कोर्ट ने इसे क्रिमिनल ज्यूरिस्प्रूडेंस के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।

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Sandeep Kumar
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News in Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया।
  • कोर्ट ने पायजामे का नाड़ा खींचने और ब्रेस्ट पकड़ने को रेप की कोशिश माना।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे रेप की तैयारी माना था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत आरोपियों पर कड़े चार्ज लगाए।
  • यह मामला 2021 में कासगंज में हुआ था।

News in Detail

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बदल दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि पायजामे का नाड़ा खींचना और ब्रेस्ट पकड़ना रेप की कोशिश नहीं है। शीर्ष न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को फटकार लगाई।

कोर्ट ने कहा कि पायजामे का नाड़ा खोलना बलात्कार की कोशिश है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला 17 मार्च 2025 को सुनाया था। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की बेंच ने फैसला सुनाया। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजारिया शामिल थे। कोर्ट ने यौन अपराधों में कानूनी तर्क और सहानुभूति की आवश्यकता बताई।

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क्या बोला सुप्रीम कोर्ट ?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना रेप की कोशिश के बराबर है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित आदेश को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि यह केवल रेप की तैयारी है।

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एन वी अंजारिया की बेंच ने आदेश रद्द किया। बेंच ने कहा कि यह फैसला क्रिमिनल ज्यूरिस्प्रूडेंस के सिद्धांतों का गलत इस्तेमाल था।

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क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

कोर्ट ने 10 फरवरी को सुओ मोटो याचिका पर आदेश दिया। इसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का संज्ञान लिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का डोरा खींचना रेप का अपराध नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया। कोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत आरोपियों पर कड़े चार्ज बहाल किए। कोर्ट ने कहा कि आरोप सिर्फ रेप की तैयारी के नहीं हैं।

17 मार्च, 2025 को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का डोरा खींचना रेप का जुर्म नहीं है। हालांकि, यह किसी महिला के कपड़े उतारने या उसे नंगा करने के इरादे से हमला कर सकता है।

यह आदेश जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने दिया। दो लोगों ने कासगंज के स्पेशल जज के आदेश को चुनौती दी थी। जज ने IPC की धारा 376 के तहत समन भेजा था।

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यह था पूरा मामला

यह पूरा मामला 10 नवंबर, 2021 का है, जब एक महिला अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ अपनी ननद के घर से लौट रही थी। महिला और उसकी बेटी को रास्ते में आरोपी पवन, आकाश, और अशोक ने रोक लिया, जो उस गांव के ही निवासी थे। आरोपियों ने महिला की बेटी को लिफ्ट देने की पेशकश की, जिसके बाद वे लड़की को अपनी बाइक पर बैठा कर लेकर चले गए।

रास्ते में आरोपियों ने अपनी बाइक रोकी और वहां एक घिनौनी हरकत शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि आकाश ने कथित तौर पर लड़की को घसीटते हुए पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश की और उसके पायजामे का नाड़ा खींच लिया। यह देखकर लड़की की हालत बिगड़ी और वह जोर-जोर से रोने लगी। उसकी चीखों की आवाज सुनकर दो लोग मौके पर पहुंचे, जिससे आरोपी घबरा कर मौके से फरार हो गए।

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