सबसे ज्यादा सोने वाला देश कौन सा, बता रही है ये रिपोर्ट
Anjali Dwivedi | Jun 21, 2026, 11:31 IST
सबसे ज्यादा सोने वाला देश कौन सा
दुनिया में सबसे ज्यादा सोने वाला देश कौन है? भारत और चीन टॉप पांच में कैसे पहुंचे और कुवैत सबसे कम क्यों सोता है? जानिए पूरा डेटा और उसकी सच्चाई।
भारत के करीब 140 करोड़ लोग रोज रात औसतन आठ घंटे 48 मिनट सोते हैं। यह आंकड़ा अमेरिका के बराबर है। सुनकर अजीब लगा ना? हम सब यही सोचते हैं कि भारतीयों की नींद छिन गई है। ऑफिस का प्रेशर, स्क्रीन टाइम, लोन की EMI, सब कुछ नींद खा रहा है। यह धारणा गलत नहीं है पर पूरी सच्चाई भी नहीं है।
एक डेटा एनालिसिस टूल ने दुनिया भर के देशों की नींद के पैटर्न को मैप किया है। इसे ग्लोबल स्लीप एटलस नाम दिया गया है। इसके मुताबिक दक्षिण अफ्रीका के लोग दुनिया में सबसे ज्यादा सोते हैं। चीन इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है। और भारत ने भी टॉप पांच में जगह बना ली है।
अगर आप रात को फोन स्क्रॉल करते हुए सोचते हैं कि सिर्फ आप ही कम सो रहे हैं, तो यह डेटा आपको राहत भी दे सकता है और चौंका भी सकता है। भारत का औसत आंकड़ा भले अच्छा दिख रहा हो, लेकिन शहरों में रहने वाले ज्यादातर लोग आज भी छह घंटे से कम सोते हैं। औसत और असलियत के बीच यही फर्क सबसे बड़ा धोखा है।
पिछले कुछ सालों में नींद को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ी है। स्मार्टफोन, OTT और नाइट शिफ्ट वाली नौकरियों ने सोने का वक्त बदल दिया है। कई देशों में सरकारें और कंपनियां अब नींद को सेहत का बड़ा पैमाना मान रही हैं।
जापान जैसे देशों में तो दफ्तर में झपकी लेना भी मेहनत की निशानी समझा जाता है। इस माहौल में जब कोई डेटा यह दावा करता है कि भारत और चीन जैसे ओवरवर्क्ड देश टॉप पांच सोने वालों में हैं, तो यह खबर बनती ही है।
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डेटा के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका के लोग हर रात औसतन नौ घंटे 13 मिनट सोते हैं। चीन नौ घंटे दो मिनट के साथ दूसरे नंबर पर है। अमेरिका तीसरे, एस्टोनिया चौथे और भारत आठ घंटे 48 मिनट के साथ पांचवें नंबर पर है।
अब सवाल यह है, चीन जैसे 996 वर्क कल्चर वाले देश में लोग इतना सोते कैसे हैं? इसकी एक वजह है दोपहर की झपकी, जिसे चीन में वूजियाओ कहा जाता है। स्कूल से लेकर दफ्तर तक यह झपकी एक परंपरा की तरह चलती आई है। यह एक छोटी सी आदत है, पर इसका असर पूरे औसत आंकड़े पर पड़ता है। ठीक वैसे ही जैसे एक लंबी रेस में हर छोटा ब्रेक फिनिशिंग टाइम बदल देता है।
दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका में ज्यादा नींद की वजह सिर्फ अच्छी आदत नहीं मानी जाती है। कई रिपोर्ट बताती हैं कि वहां बेरोजगारी दर ऊंची रही है, जिसकी वजह से लोगों के पास घर पर बिताने का समय ज्यादा रहा है। इसका मतलब जो आंकड़ा सेहत की जीत जैसा दिख रहा है, उसके पीछे आर्थिक हालात की कहानी भी छिपी है। इस विषय पर कोई verified expert statement उपलब्ध नहीं था, इसलिए हम इसे संभावित वजह के तौर पर ही बता रहे हैं।
भारत की कहानी थोड़ी अलग है। यहां ज्यादा नींद की एक वजह यह बताई जाती है कि परिवार में सब लोग मिलकर बच्चों और घर का काम बांट लेते हैं, जिससे तनाव कम होता है।
उदाहरण के तौर पर मानें तो एक ज्वाइंट फैमिली में दादी रात को बच्चे को सुला देती हैं, तो मां को आराम का एक्सट्रा समय मिल जाता है। यह छोटा सा उदाहरण बताता है कि नींद सिर्फ घड़ी का मामला नहीं, सामाजिक ढांचे का भी मामला है।
इस डेटा के पीछे मुख्य रूप से दो तरह के सोर्स हैं। पहला, OECD (Organisation for Economic Co-operation and Development) का टाइम यूज सर्वे, जो लोगों की डायरी एंट्री पर आधारित है। दूसरा, वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू जैसी वेबसाइट्स जो अलग अलग स्टडी का डेटा इकट्ठा कर रैंकिंग बनाती हैं।
ग्लोबल स्लीप एटलस खुद कोई नई रिसर्च नहीं करता, वह इन्हीं दो सोर्स के आंकड़ों को एक साथ दिखाने वाला एक तुलना टूल है। यह बात पाठक को पता होनी चाहिए, क्योंकि इससे डेटा की उम्र और भरोसे का अंदाजा लगता है।
यहीं से मामला पलटता है और हर सोर्स अलग नंबर देता है। एक डेटासेट में दक्षिण अफ्रीका टॉप पर है, तो दूसरे पुराने सर्वे में वही देश सबसे नीचे के देशों में आ जाता है। एक रैंकिंग में कुवैत सबसे कम सोने वाला देश बताया गया है, जबकि कुछ दूसरी स्टडी में यह तमगा जापान के नाम है, जहां लोग करीब पांच घंटे 52 मिनट ही सो पाते हैं। कुवैत उस लिस्ट में पांचवें नंबर पर आता है, सबसे नीचे नहीं।
तब क्या यह डेटा झूठा है? जरूरी नहीं। टाइम यूज सर्वे अलग-अलग साल में होते हैं, अलग तरीकों से होते हैं, और हर देश हर साल इसमें शामिल भी नहीं होता है। नतीजा यह है कि दुनिया का सबसे ज्यादा सोने वाला देश कौन है का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस साल का, किस सर्वे का डेटा देख रहे हैं।
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि नींद की कोई एक ग्लोबल लाइव रैंकिंग है, जो हर साल अपडेट होती है। असल में लगातार चलने वाला कोई सिस्टम मौजूद नहीं है। ये जो आंकड़े आज वायरल हो रहे हैं, उनमें से कई बरसों पुराने टाइम यूज सर्वे से आए हैं। मतलब जिस नींद के डेटा पर आप भरोसा कर रहे हैं, वह शायद आज की नहीं, बल्कि एक दशक पुरानी जिंदगी की तस्वीर हो सकती है।
स्मार्टवॉच और रिंग जैसे गैजेट अब रियल टाइम स्लीप डेटा इकट्ठा कर रहे हैं। आने वाले सालों में यह डायरी आधारित पुराने सर्वे की जगह ले सकता है। तब शायद रैंकिंग पूरी तरह बदल जाए। फिलहाल सवाल यह बना रहेगा कि असली विजेता कौन है, घंटों की गिनती करने वाला देश, या नींद की क्वालिटी पर ध्यान देने वाला देश।
यह खबर सीधे किसी कानून से नहीं जुड़ी, पर डेटा पत्रकारिता की नैतिकता से जरूर जुड़ी है। जब कोई आंकड़ा ग्लोबल एटलस जैसे भरोसेमंद नाम के साथ पेश होता है, तो पाठक उसे अंतिम सच मान लेता है। असल में यह आंकड़ा अलग- अलग पुराने सर्वे का मिश्रण है। पाठक को सच्चाई और सोर्स की सीमा दोनों बताना जरूरी है, ताकि गलत जानकारी आगे न फैले।
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एक डेटा एनालिसिस टूल ने दुनिया भर के देशों की नींद के पैटर्न को मैप किया है। इसे ग्लोबल स्लीप एटलस नाम दिया गया है। इसके मुताबिक दक्षिण अफ्रीका के लोग दुनिया में सबसे ज्यादा सोते हैं। चीन इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है। और भारत ने भी टॉप पांच में जगह बना ली है।
यह आपसे क्यों जुड़ा है
पहले क्या था
जापान जैसे देशों में तो दफ्तर में झपकी लेना भी मेहनत की निशानी समझा जाता है। इस माहौल में जब कोई डेटा यह दावा करता है कि भारत और चीन जैसे ओवरवर्क्ड देश टॉप पांच सोने वालों में हैं, तो यह खबर बनती ही है।
neend mein bharat top 5 south africa china
ज्यादा नींद के पीछे का क्या कारण है
अब सवाल यह है, चीन जैसे 996 वर्क कल्चर वाले देश में लोग इतना सोते कैसे हैं? इसकी एक वजह है दोपहर की झपकी, जिसे चीन में वूजियाओ कहा जाता है। स्कूल से लेकर दफ्तर तक यह झपकी एक परंपरा की तरह चलती आई है। यह एक छोटी सी आदत है, पर इसका असर पूरे औसत आंकड़े पर पड़ता है। ठीक वैसे ही जैसे एक लंबी रेस में हर छोटा ब्रेक फिनिशिंग टाइम बदल देता है।
दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका में ज्यादा नींद की वजह सिर्फ अच्छी आदत नहीं मानी जाती है। कई रिपोर्ट बताती हैं कि वहां बेरोजगारी दर ऊंची रही है, जिसकी वजह से लोगों के पास घर पर बिताने का समय ज्यादा रहा है। इसका मतलब जो आंकड़ा सेहत की जीत जैसा दिख रहा है, उसके पीछे आर्थिक हालात की कहानी भी छिपी है। इस विषय पर कोई verified expert statement उपलब्ध नहीं था, इसलिए हम इसे संभावित वजह के तौर पर ही बता रहे हैं।
भारत की कहानी थोड़ी अलग है। यहां ज्यादा नींद की एक वजह यह बताई जाती है कि परिवार में सब लोग मिलकर बच्चों और घर का काम बांट लेते हैं, जिससे तनाव कम होता है।
उदाहरण के तौर पर मानें तो एक ज्वाइंट फैमिली में दादी रात को बच्चे को सुला देती हैं, तो मां को आराम का एक्सट्रा समय मिल जाता है। यह छोटा सा उदाहरण बताता है कि नींद सिर्फ घड़ी का मामला नहीं, सामाजिक ढांचे का भी मामला है।
कौन कौन शामिल है
ग्लोबल स्लीप एटलस खुद कोई नई रिसर्च नहीं करता, वह इन्हीं दो सोर्स के आंकड़ों को एक साथ दिखाने वाला एक तुलना टूल है। यह बात पाठक को पता होनी चाहिए, क्योंकि इससे डेटा की उम्र और भरोसे का अंदाजा लगता है।
दोनों साइड की बात
तब क्या यह डेटा झूठा है? जरूरी नहीं। टाइम यूज सर्वे अलग-अलग साल में होते हैं, अलग तरीकों से होते हैं, और हर देश हर साल इसमें शामिल भी नहीं होता है। नतीजा यह है कि दुनिया का सबसे ज्यादा सोने वाला देश कौन है का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस साल का, किस सर्वे का डेटा देख रहे हैं।
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि नींद की कोई एक ग्लोबल लाइव रैंकिंग है, जो हर साल अपडेट होती है। असल में लगातार चलने वाला कोई सिस्टम मौजूद नहीं है। ये जो आंकड़े आज वायरल हो रहे हैं, उनमें से कई बरसों पुराने टाइम यूज सर्वे से आए हैं। मतलब जिस नींद के डेटा पर आप भरोसा कर रहे हैं, वह शायद आज की नहीं, बल्कि एक दशक पुरानी जिंदगी की तस्वीर हो सकती है।
आगे क्या होगा
यह खबर क्यों जरूरी है
FAQ
- दुनिया में सबसे ज्यादा सोने वाला देश कौन सा है?
एक डेटा एनालिसिस के मुताबिक दक्षिण अफ्रीका के लोग सबसे ज्यादा सोते हैं, औसतन हर रात करीब 9 घंटे 13 मिनट। चीन दूसरे नंबर पर है। दूसरे पुराने सर्वे में यह क्रम पूरी तरह बदल भी जाता है। - भारत नींद के मामले में किस नंबर पर है?
एक एनालिसिस में भारत टॉप 5 में आता है, औसतन 8 घंटे 48 मिनट की नींद के साथ। पर एक अलग पुराने सर्वे में भारत की रैंकिंग इससे काफी नीचे भी दिखती है। यह आंकड़ा सोर्स और साल के हिसाब से बदलता है। - कम सोने से सेहत पर क्या असर पड़ता है?
लगातार कम नींद से डिप्रेशन, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ता है। यह दिमाग में टॉक्सिन जमा कर इम्यूनिटी को कमजोर करता है। डॉक्टर रोज 7 से 9 घंटे सोने की सलाह देते हैं।
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