NEET पेपर लीक में पुणे का केमेस्ट्री प्रोफेसर अरेस्ट: CBI ने बताया मास्टरमाइंड
Pawan Modiya | May 16, 2026, 24:11 IST
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NEET Paper Leak मामले में पुणे के केमेस्ट्री प्रोफेसर की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई Investigation और Telegram Mafia Group को लेकर बड़े खुलासे हुए हैं। दावा है कि कुलकर्णी कई साल तक नीट एग्जाम पैनल से जुड़ा रहा।
देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी NEET-UG परीक्षा एक बार फिर गंभीर विवाद में घिर गई है। NEET Paper Leak (नीट पेपर लीक) मामले में Central Bureau of Investigation यानी CBI ने पुणे के एक केमेस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी उन्हें इस पूरे नेटवर्क का “मास्टरमाइंड” मान रही है।
CBI Investigation (सीबीआई जांच) के अनुसार कुलकर्णी कई वर्षों तक NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने वाले पैनल का हिस्सा रह चुका है। आरोप है कि उसने अपनी विशेषज्ञता और अंदरूनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए छात्रों तक परीक्षा से पहले सवाल और उनके सही जवाब पहुंचाए।
इस मामले ने न केवल परीक्षा प्रणाली बल्कि मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CBI के मुताबिक पीवी कुलकर्णी महाराष्ट्र के लातूर का रहने वाला है और केमिस्ट्री विषय का विशेषज्ञ माना जाता है। वह पुणे में अपने घर से कोचिंग क्लास संचालित करता था।
जांच एजेंसी का दावा है कि कुलकर्णी कई साल तक NEET Exam Panel (नीट एग्जाम पैनल) से जुड़ा रहा। उसे प्रश्नपत्रों तक सीधी पहुंच थी। उसने अप्रैल के अंतिम सप्ताह में कुछ छात्रों को कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए।आरोपी मनीषा वाघमारे की मदद से छात्रों तक सवाल और उत्तर पहुंचाए गए। CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच में सामने आया कि NEET 2026 का कथित लीक पेपर 1 मई की रात एक Telegram Mafia Group (टेलीग्राम माफिया ग्रुप) पर अपलोड किया गया था।
“Private Mafia” नाम के इस ग्रुप में लगभग 402 सदस्य बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ग्रुप पासवर्ड से लॉक था। पेपर PDF फॉर्मेट में शेयर किया गया। एडमिन ने दावा किया था कि “99.99 प्रतिशत यही पेपर आएगा।”
हालांकि यह अभी जांच का विषय है कि अपलोड किया गया पेपर वही अंतिम प्रश्नपत्र था या नहीं। लेकिन कई सवाल और डायग्राम कथित लीक पेपर और असली पेपर में समान पाए गए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार NEET प्रश्नपत्र में शामिल कुछ सवाल कथित लीक PDF से मेल खाते पाए गए। उदाहरण के तौर पर वर्टिकल मोशन और वेलोसिटी से जुड़ा सवाल, मोनोक्रोमेटिक लाइट और प्रिज्म वाला प्रश्न, इलेक्ट्रिक सर्किट डायग्राम आधारित सवाल।
इन सवालों में प्रश्न संख्या समान थी, ऑप्शन भी समान बताए गए और डायग्राम और फिगर तक मैच करने के दावे किए गए। यही कारण है कि जांच एजेंसियां इसे बड़े संगठित Exam Scam (एग्जाम स्कैम) के रूप में देख रही हैं।
CBI Investigation के दौरान कई राज्यों से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई है। एजेंसी ने अब तक नासिक, जयपुर, गुरुग्राम, पुणे सहित कई शहरों में कार्रवाई की है। अब तक कुल आठ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
स्पेशल CBI कोर्ट ने पांच आरोपियों को सात दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है। जांच एजेंसी का कहना है कि पेपर लीक नेटवर्क राष्ट्रीय स्तर पर फैला था। प्रिंटिंग प्रेस और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की जांच जरूरी है। डिजिटल चैट्स और बैंक लेन-देन की फॉरेंसिक जांच चल रही है।
NEET Exam Scam (नीट एग्जाम स्कैम) ने लाखों मेहनती छात्रों और अभिभावकों को मानसिक रूप से प्रभावित किया है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में छात्र वर्षों की मेहनत और लाखों रुपये खर्च करते हैं। ऐसे में पेपर लीक की खबरें छात्रों के आत्मविश्वास को गहरा झटका देती हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार पेपर लीक विवाद से तनाव में आए कुछ छात्रों ने आत्महत्या जैसा गंभीर कदम भी उठाया। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और गोवा से जुड़े तीन युवाओं की मौत की खबरों ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस तरह की घटनाएं दिखाती हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा भी है।
पिछले कुछ वर्षों में कई भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप सामने आए हैं। इससे यह सवाल उठने लगा है
WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर एन्क्रिप्टेड चैट की सुविधा होती है। यही कारण है कि जांच एजेंसियों को ऐसे नेटवर्क पकड़ने में कठिनाई आती है।
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार निजी ग्रुप्स तेजी से वायरल होते हैं। डिजिटल पेमेंट से ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है। फर्जी और असली पेपर में फर्क करना चुनौतीपूर्ण होता है।
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CBI Investigation (सीबीआई जांच) के अनुसार कुलकर्णी कई वर्षों तक NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने वाले पैनल का हिस्सा रह चुका है। आरोप है कि उसने अपनी विशेषज्ञता और अंदरूनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए छात्रों तक परीक्षा से पहले सवाल और उनके सही जवाब पहुंचाए।
इस मामले ने न केवल परीक्षा प्रणाली बल्कि मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कौन है पीवी कुलकर्णी, जिसे CBI ने बताया मास्टरमाइंड?
जांच एजेंसी का दावा है कि कुलकर्णी कई साल तक NEET Exam Panel (नीट एग्जाम पैनल) से जुड़ा रहा। उसे प्रश्नपत्रों तक सीधी पहुंच थी। उसने अप्रैल के अंतिम सप्ताह में कुछ छात्रों को कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए।आरोपी मनीषा वाघमारे की मदद से छात्रों तक सवाल और उत्तर पहुंचाए गए। CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
Telegram Mafia Group से कैसे फैला लीक पेपर?
“Private Mafia” नाम के इस ग्रुप में लगभग 402 सदस्य बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ग्रुप पासवर्ड से लॉक था। पेपर PDF फॉर्मेट में शेयर किया गया। एडमिन ने दावा किया था कि “99.99 प्रतिशत यही पेपर आएगा।”
हालांकि यह अभी जांच का विषय है कि अपलोड किया गया पेपर वही अंतिम प्रश्नपत्र था या नहीं। लेकिन कई सवाल और डायग्राम कथित लीक पेपर और असली पेपर में समान पाए गए हैं।
असली पेपर और कथित लीक पेपर में कैसे मिले सवाल?
फिजिक्स और ऑप्टिक्स के सवाल हुए मैच
इन सवालों में प्रश्न संख्या समान थी, ऑप्शन भी समान बताए गए और डायग्राम और फिगर तक मैच करने के दावे किए गए। यही कारण है कि जांच एजेंसियां इसे बड़े संगठित Exam Scam (एग्जाम स्कैम) के रूप में देख रही हैं।
CBI Investigation में अब तक क्या-क्या सामने आया?
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
7 दिन की कस्टडी मिली
NEET Exam Scam का छात्रों पर क्या असर पड़ा?
दुखद घटनाएं भी आईं सामने
परीक्षा प्रणाली पर उठ रहे बड़े सवाल
क्या सुरक्षित हैं भारत की प्रतियोगी परीक्षाएं?
- क्या परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है?
- क्या अंदरूनी लोगों की पहुंच रोकी जा सकती है?
- क्या डिजिटल एन्क्रिप्शन पर्याप्त है?
डिजिटल प्लेटफॉर्म बने नई चुनौती
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार निजी ग्रुप्स तेजी से वायरल होते हैं। डिजिटल पेमेंट से ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है। फर्जी और असली पेपर में फर्क करना चुनौतीपूर्ण होता है।
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