नेपाल में Gen Z प्रधानमंत्री की तैयारी, भारत के कैसे होंगे रिश्ते? जानें कौन हैं बालेन शाह

नेपाल के चुनावों में बालेन शाह की पार्टी बढ़त में है। उनके प्रधानमंत्री बनने से भारत-नेपाल रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? जानिए बालेन शाह और उनके विवादों के बारे में।

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Jitendra Shrivastava
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Photograph: (thesootr)

News In Short

  • बालेन शाह की पार्टी ने नेपाल चुनाव में 119 सीटों पर बढ़त बनाई है।
  • बालेन शाह का मुख्य उद्देश्य एंटी-करप्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट है।
  • बालेन शाह का काठमांडू में मेयर रहते हुए कार्यकाल प्रभावशाली रहा।
  • बालेन शाह के पुराने बयान भारत-नेपाल रिश्तों पर असर डाल सकते हैं।
  • उनके रुख में हाल के महीनों में बदलाव देखने को मिला है।

News In Detail

नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 165 सीटों पर हो रहे चुनावों में, बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 7 मार्च तक 36 सीटों पर जीत हासिल कर ली है और 83 सीटों पर वह आगे चल रहे हैं। कुल मिलाकर पार्टी को 119 सीटों पर बढ़त मिल चुकी है, जबकि सरकार बनाने के लिए 138 सीटों की जरूरत है।

इन परिणामों से बालेन शाह की पार्टी स्पष्ट रूप से जीत की ओर बढ़ रही है। अगर उनकी पार्टी जीतती है, तो बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन सकते हैं। लेकिन, यह सवाल भी उठता है कि अगर बालेन शाह प्रधानमंत्री बनते हैं, तो इसका भारत-नेपाल रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? आइए, इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

बालेन शाह: रैपर से नेता तक का सफर

balen shah (2)

बालेन शाह का जन्म 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआत नेपाल के अंडरग्राउंड हिप-हॉप सीन से की और जल्द ही रैपर के रूप में पहचान बना ली।

2013 में उन्होंने Raw Barz नाम से रैप बैटल प्लेटफॉर्म शुरू किया, जहां उन्होंने भ्रष्टाचार, असमानता और सामाजिक मुद्दों पर अपनी टिप्पणियां कीं। लेकिन, राजनीति में उनका प्रवेश 2022 में हुआ, जब उन्होंने काठमांडू के मेयर पद के लिए चुनाव लड़ा और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) का गठन किया।

बालेन शाह की पार्टी, जो जेन-जी आंदोलन के बाद युवाओं के बीच असंतोष का प्रतीक बन गई है, अब नेपाल के चुनावी परिदृश्य में एक प्रमुख भूमिका निभा रही है। उनकी पार्टी का मुख्य फोकस एंटी-करप्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और बैलेंस्ड फॉरेन पॉलिसी पर है।

काठमांडू के मेयर के रूप में कार्यकाल

बालेन शाह ने 2022 में काठमांडू के मेयर के रूप में चुनाव लड़ा और भारी जीत हासिल की। उन्होंने कचरा प्रबंधन, सड़क सुधार और भ्रष्टाचार विरोधी कदमों से काठमांडू को नई दिशा दी। उनके कार्यकाल के दौरान, उन्होंने अपने काम से यह साबित किया कि वह बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका दृष्टिकोण और कार्यशैली युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय हो गए। हालांकि, कुछ आलोचक उनका यह मानना है कि वे अपने वादों को पूरा करने में पूरी तरह सफल नहीं हुए।

गाने से चुनाव तक का सफर

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नेपाल में एक गाना बड़ा हिट हुआ था-

"गफ धेरै भयो, अब काम चाहिन्छ, नेपालको मुहार फेर्ने, बालेन चाहिन्छ"।

गाने का हिंदी अर्थ है, "बातें अब काफी हो चुकीं, अब काम चाहिए, नेपाल की तस्वीर बदलने के लिए बालेन चाहिए। पुराने नेताओं को अलविदा और नए को अवसर, सभी का एक ही नारा है- अबकी बार, बालेन सरकार।" यह गाना अब नेपाल की राजनीति का हिस्सा बन चुका है।

बालेन शाह का यह राजनीतिक स्लोगन सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच काफी वायरल हुआ। यह गाना उनके चुनावी अभियान का अहम हिस्सा बना और युवाओं को एक नई उम्मीद दी। यह गाना बालेन शाह की राजनीति को पॉप कल्चर का हिस्सा बना दिया, जो पहले कभी किसी नेता के लिए ऐसा इस्तेमाल नहीं हुआ था।

बालेन शाह की पीएम बनने की राह

बालेन शाह ने अब तक 27 सीटें जीती हैं और 119 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रहे हैं। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी, केपी शर्मा ओली की सीपीएन-यूएमएल पार्टी ने केवल 7 सीटों पर लीड किया है। अगर ये रुझान इसी तरह बने रहते हैं, तो बालेन शाह प्रधानमंत्री बनने के सबसे प्रबल दावेदार बन सकते हैं।

बालेन शाह का राजनीतिक करियर शॉर्ट लेकिन प्रभावशाली रहा है। वह 35 साल की उम्र में नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं। अगर वह प्रधानमंत्री बनते हैं, तो उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती नेपाल की जटिल राजनीतिक स्थिति को संभालने की होगी, क्योंकि नेपाल का राजनीतिक परिदृश्य हमेशा से ही अस्थिर रहा है।

बालेन शाह के विवादित बयान और चिंता

बालेन शाह के कुछ पुराने बयानों ने भारत को चिंता में डाल दिया है। 2023 में, उन्होंने बॉलीवुड फिल्म में सीता को "भारत की बेटी" कहने पर भारतीय फिल्मों पर बैन की मांग की थी, क्योंकि नेपाल के लोग मानते हैं कि सीता का जन्म नेपाल या नेपाल-बिहार बॉर्डर पर हुआ था। इसके अलावा, उन्होंने अपने ऑफिस में "ग्रेटर नेपाल" का मैप लगाया था, जिसमें कुछ भारतीय क्षेत्र भी शामिल थे। इस मैप को भारत के संसद में "अखंड भारत" म्यूरल का जवाब बताया गया था।

इसी तरह, 2025 में बालेन शाह ने भारत, अमेरिका और चीन के खिलाफ अपशब्द लिखे थे, जो बाद में उन्होंने डिलीट कर दिए। हालांकि, उनके रुख में हाल के महीनों में बदलाव भी दिखा है। RSP ने अपने मेनिफेस्टो से चीन के बीआरआर प्रोजेक्ट को हटा दिया, जो भारत के लिए राहत की बात हो सकती है।

भारत और नेपाल रिश्तों पर असर

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अगर बालेन शाह सत्ता में आते हैं, तो भारत-नेपाल रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? उनका पार्टी घोषणापत्र संतुलित विदेश नीति का समर्थन करता है, और यदि वह सत्ता में आते हैं, तो उनकी प्राथमिकता आर्थिक सहयोग, बुनियादी ढांचा विकास और भ्रष्टाचार विरोधी सुधारों पर हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बालेन शाह का विदेश नीति पर सीमित अनुभव है, जिससे कभी-कभी उनकी नीतियां अप्रत्याशित हो सकती हैं।

भारत के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है कि बालेन शाह के पुराने बयान और उनकी "ग्रेटर नेपाल" की विचारधारा से भारत के साथ रिश्ते पर असर पड़ सकता है। फिर भी, उनका वर्तमान रुख और पार्टी का घोषणापत्र यह संकेत देते हैं कि वे एक संतुलित विदेश नीति की दिशा में बढ़ रहे हैं, जो भारत के लिए सकारात्मक हो सकता है।

बालेन शाह से Gen Z की उम्मीदें

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बालेन शाह का मुख्य आधार नेपाल के युवा हैं, जिन्होंने उनके नेतृत्व में बदलाव की उम्मीद जताई है। नेपाल में पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन के बाद, बालेन शाह के प्रति युवाओं का समर्थन बढ़ा है। यही कारण है कि उनकी पार्टी, RSP, एक नई उम्मीद के रूप में उभरी है।

नेपाल में सितंबर में हुए Gen Z प्रोटेस्ट ने राजनीतिक माहौल में उथल-पुथल मचाई थी, और इसके बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। उस समय बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा गर्म थी, और वे युवाओं के बीच एक बड़े नेता के रूप में उभरने लगे थे। हमने Gen Z प्रोटेस्ट के नेताओं से बातचीत की, जिनमें से 25 साल की तनुजा पांडे ने अपनी राय साझा की।

तनुजा शाह की राजनीति को पॉपुलिस्ट और विभाजनकारी मानती हैं। उनका कहना है, "बालेन शाह एक युवा नेता हैं, जिनसे लोगों की उम्मीदें बहुत हैं, लेकिन काठमांडू के मेयर रहते हुए उन्होंने जरूरी काम नहीं किए। उनकी 'हम बनाम वे' की राजनीति और उकसाने वाले बयान मुझे परेशान करते हैं। हम प्रोटेस्ट में इसी तरह की राजनीति से छुटकारा चाहते थे। तनुजा ने यह भी कहा कि नेपाल की भौगोलिक स्थिति के कारण भारत और चीन जैसे देशों की दिलचस्पी स्वाभाविक है, और यह लीडरशिप पर निर्भर करता है कि वह इस स्थिति को अवसर में बदलते हैं या नहीं।

वहीं, जेन-Z प्रोटेस्ट के एक और लीडर टंका धामी भी बालेन शाह से नाखुश हैं। उनका कहना है कि हमें बालेन शाह के एजेंडे और विकास के रोडमैप पर संदेह है। हमें यह साफ तौर पर समझना होगा कि वे देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। टंका ने यह भी स्पष्ट किया कि हम चाहते हैं कि भारत नेपाल के विकास में मदद करे। कुछ लोग एंटी-इंडिया प्रचार करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम भारत के प्रति नकारात्मक भावना नहीं रखते। हम दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्ते चाहते हैं।

भारत-नेपाल के रिश्तों पर भविष्य

नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव लाने वाले बालेन शाह की भूमिका निश्चित रूप से महत्वपूर्ण होगी। उनका प्रभाव नेपाल के युवाओं पर तो होगा ही, साथ ही भारत-नेपाल के रिश्तों पर भी असर डालेगा। भारत-नेपाल के रिश्तों में भविष्य में सकारात्मक बदलाव की संभावना भी है, यदि बालेन शाह अपनी संतुलित विदेश नीति को जारी रखते हैं।

निष्कर्ष

बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनने का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन उनके नेतृत्व में नेपाल में बदलाव की लहर उठ चुकी है। भारत-नेपाल के रिश्तों पर उनका प्रभाव भविष्य में देखा जाएगा, और यह पूरी तरह से उनके नेतृत्व और विदेश नीति पर निर्भर करेगा।

FAQ

बालेन शाह कौन हैं और उनका राजनीतिक करियर कैसे शुरू हुआ?
बालेन शाह, नेपाल के एक युवा नेता हैं, जिन्होंने पहले रैपर के रूप में पहचान बनाई। 2022 में काठमांडू के मेयर बने और बाद में अपनी पार्टी आरएसपी का गठन किया।
बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनने से भारत-नेपाल रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?
बालेन शाह के पुराने बयान भारत-नेपाल रिश्तों पर असर डाल सकते हैं, लेकिन उनके मेनिफेस्टो में संतुलित विदेश नीति का संकेत है, जो रिश्तों में सुधार कर सकता है।
बालेन शाह की पार्टी का प्रमुख एजेंडा क्या है?
बालेन शाह की पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP), भ्रष्टाचार विरोधी, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और संतुलित विदेश नीति पर ध्यान केंद्रित करती है।
बालेन शाह के "ग्रेटर नेपाल" मैप को लेकर भारत को क्या चिंताएं थीं?
बालेन शाह ने अपने ऑफिस में "ग्रेटर नेपाल" का मैप लगाया था, जिसमें भारतीय क्षेत्र भी शामिल थे, जो भारत के लिए चिंता का कारण बना।
बालेन शाह की लोकप्रियता नेपाल में क्यों बढ़ी?
बालेन शाह की लोकप्रियता का कारण उनका युवा नेतृत्व, भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष, और काठमांडू में किए गए विकास कार्य हैं, जिन्होंने उन्हें युवाओं के बीच एक आइकॉन बना दिया।

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