अस्पतालों में लागू होगा नया बिलिंग नियम, मरीजों को होगी आसानी

भारत सरकार ने अस्पतालों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नया बिलिंग फॉर्मेट जारी किया है। अब मरीजों को सभी फीस की विस्तार से जानकारी मिलेगी, जिससे विवाद कम होंगे।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • नया बिलिंग फॉर्मेट से अब अस्पतालों में आइटम-वाइज बिलिंग होगी।

  • रूम रेंट, डॉक्टर की फीस, दवाइयां और इलाज के पैकेज का विवरण होगा।

  • डिजिटल और फिजिकल बिल अब डिजिटल रूप में भी उपलब्ध होंगे।

  • इस प्रक्रिया से मरीजों का अस्पतालों पर भरोसा बढ़ेगा।

  • यह कदम उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करेगा और विवादों को कम करेगा।

News In Detail

भारत सरकार ने अब अस्पतालों की बिलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी और समझने में आसान बनाने के लिए नया भारतीय मानक पेश किया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस  के मौके पर ‘IS 19493: 2025’ नामक नए भारतीय मानक को जारी किया।

इसके तहत अस्पतालों, नर्सिंग होम्स और डायग्नोस्टिक सेंटरों में अब आइटम-वाइज बिलिंग होगी। इसका उद्देश्य मरीजों को हर सेवा के लिए अलग-अलग फीस की जानकारी देना है, ताकि कोई भी भ्रम या विवाद न हो।

नई बिलिंग प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी

इस नए मानक का प्रमुख उद्देश्य बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और अस्पतालों के बिलों में शामिल सभी खर्चों को स्पष्ट रूप से दिखाना है। इसके तहत अस्पतालों को रूम रेंट, डॉक्टर परामर्श, दवाइयां और इलाज के पैकेज जैसी सेवाओं का विस्तृत विवरण देना होगा। इसके अलावा, बिल में मरीज की पहचान, फीस डीटेल्स, टैक्स, इंश्योरेंस कवरेज, पेमेंट मोड और ऑथोराइजेशन की जानकारी भी शामिल की जाएगी।

 बिल पढ़ने में होगी आसानी

अस्पतालों के बिलों को लेकर मरीजों को पहले अक्सर समझने में कठिनाई होती थी, क्योंकि फॉन्ट और भाषा ठीक से स्पष्ट नहीं होते थे। अब इस नए मानक में अस्पतालों को स्पष्ट फॉन्ट और पठनीय फॉर्मेट का पालन करने की सलाह दी गई है।

अब अस्पताल न केवल कागजी रूप में, बल्कि डिजिटल मोड में भी बिल प्रदान करेंगे, जिससे मरीजों के पास अपने खर्चों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।

एक्सपर्ट्स ने की सिफारिश

यह मानक BIS (Bureau of Indian Standards) की हेल्थ, फिटनेस और स्पोर्ट्स सर्विसेज सेक्शनल कमेटी ने तैयार किया है। इसमें एम्स (AIIMS), स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS), NABH और CII जैसे प्रमुख संस्थानों के एक्सपर्ट ने भी योगदान दिया है। यह मानक अस्पतालों में बिलिंग प्रक्रिया को एक समान और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा, जिससे विवादों की संभावना कम होगी।

मरीजों का बढ़ेगा भरोसा

इस बदलाव के साथ अस्पतालों और मरीजों के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद रिश्ता बनेगा। जब बिलिंग प्रक्रिया स्पष्ट और जवाबदेह होगी, तो मरीजों को फैसले लेने में आसानी होगी और उनकी शिकायतें भी कम होंगी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम भारत में पारदर्शी और मरीज-अनुकूल स्वास्थ्य प्रणाली बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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