नाक भी होती है सेंसेटिव, जानें कौन-कौन सी बीमारी के संकेत देती है नाक

नाक में संवेदनशीलता कई बीमारियों के संकेत हो सकती है जैसे एलर्जी, साइनस इन्फेक्शन, नाक के पॉलिप्स, सर्दी-जुकाम और अस्थमा। जानिए नाक की संवेदनशीलता के लक्षण और उनसे जुड़ी बीमारियां।

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Anjali Dwivedi
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नाक सिर्फ सूंघने का काम नहीं करती, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी देती है। कई बार जब हम खुद की तबियत खराब महसूस करते हैं तो डॉक्टर हमारी आंखों की जांच करते हैं, क्योंकि आंखों से भी शरीर में हो रहे बदलावों का पता चलता है। 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाक भी हमारे शरीर की सेहत के बारे में संकेत देती है? नाक की समस्याएं न केवल श्वसन तंत्र से जुड़ी होती हैं, बल्कि यह कुछ अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों का भी संकेत देती हैं। आइए जानते हैं उन संकेतों के बारे में... 

नाक की संवेदनशीलता और इससे जुड़ी बीमारियां 

नाक सेंसिटिव होने पर कई बीमारियों के संकेत मिल सकते हैं। इनमें एलर्जी, साइनस इन्फेक्शन, नाक के पॉलिप्स, सर्दी-जुकाम और अस्थमा शामिल हैं। इन समस्याओं के दौरान नाक बंद हो सकती है। छींक आना, पानी बहना और खुजली होना भी सामान्य लक्षण हैं।

गंध का कम महसूस होना भी एक आम समस्या है। चेहरे पर दबाव और दर्द भी इन लक्षणों का हिस्सा हो सकते हैं। ये सभी लक्षण आमतौर पर मौसम, एलर्जी या अन्य परेशानियों से जुड़े होते हैं।

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नाक के संवेदनशील होने पर दिखने वाले सामान्य लक्षण और उनसे जुड़ी बीमारियां-

नाक बंद होना (Nasal Congestion):

कारण: एलर्जी (एलर्जिक राइनाइटिस), साइनस इन्फेक्शन (साइनसाइटिस), सामान्य सर्दी-जुकाम, नाक के पॉलिप्स या मौसम में बदलाव।

संकेत: सांस लेने में दिक्कत, खासकर रात में और सिरदर्द।

नाक बहना या पानी आना:

कारण: एलर्जिक राइनाइटिस (एलर्जी), सर्दी-जुकाम, साइनसाइटिस (गाढ़ा बलगम)।

संकेत: नाक से पतला या गाढ़ा, रंगहीन या हरे रंग का स्राव।

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छींकें आना (Sneezing):

कारण: एलर्जी, धूल, धुआं या मौसम में बदलाव।

संकेत: बार-बार और तेज छींकें, खासकर सुबह के समय।

खुजली (Itching):

कारण: एलर्जिक राइनाइटिस (नाक, आंख, तालू में खुजली)।

गंध और स्वाद में कमी (Loss of Smell & Taste):

कारण: साइनस इन्फेक्शन, नाक के पॉलिप्स, या गंभीर एलर्जी।

संकेत: खाने-पीने की चीजों का स्वाद न आना या गंध महसूस न होना।

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चेहरे पर दबाव या दर्द (Facial Pain/Pressure):

कारण: साइनसाइटिस (आंखों के नीचे, गालों या माथे पर दर्द)।

खांसी (Cough):

कारण: पोस्ट-नेजल ड्रिप (बलगम का गले में गिरना) या साइनसाइटिस।

थकान और बुखार (Fatigue & Fever):

कारण: साइनस इन्फेक्शन

साइनस इन्फेक्शन कैसे होता है?

नाक में साइनस इन्फेक्शन (साइनसाइटिस) तब होता है जब नाक और चेहरे की हड्डियों में हवा से भरे साइनस में सूजन आ जाती है। इससे बलगम रुक जाता है और वायरस, बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इसके लक्षण चेहरे पर दर्द दबाव, नाक बंद होना, बलगम (गाढ़ा/पीला/हरा), सिरदर्द, खांसी और थकान होते हैं। 

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इनसे बचने के क्या उपाए हैं ये भी जानते हैं

नाक की समस्याओं (विशेषकर संवेदनशीलता और एलर्जी) से राहत पाने के लिए आप इन उपायों को अपना सकते हैं। इन्हें घरेलू उपचार, जीवनशैली में बदलाव और सावधानी के आधार पर विभाजित किया गया है।

1. प्राकृतिक और घरेलू उपाय

  • भाप लेना (Steam Inhalation): यह बंद नाक और साइनस के दबाव को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। गर्म पानी में पुदीने के तेल या अजवाइन की कुछ बूंदें डालकर भाप लें।

  • जल नेति (Saline Rinse): गुनगुने पानी में थोड़ा नमक मिलाकर 'नेति पॉट' के जरिए नाक साफ करने से धूल, एलर्जी के कण और गाढ़ा बलगम बाहर निकल जाता है।

  • हल्दी वाला दूध: हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) गुण होते हैं जो नाक की अंदरूनी सूजन और इन्फेक्शन को कम करते हैं।

  • अदरक और शहद की चाय: यह गले की खराश और छींकों में राहत देता है।

2. जीवनशैली और बचाव (Prevention)

  • एलर्जी ट्रिगर्स से बचें: यदि आपको धूल या धुएं से परेशानी है, तो बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें।

  • हाइड्रेशन: दिन भर पर्याप्त पानी पिएं। यह बलगम (Mucus) को पतला रखने में मदद करता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकल जाता है।

  • बिस्तर की सफाई: धूल के कणों (Dust mites) से बचने के लिए तकिए के कवर और चादरों को गर्म पानी से धोएं।

  • ह्यूमिडिफायर (Humidifier): अगर आपके कमरे की हवा बहुत सूखी है, तो ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें। यह नाक के मार्ग को सूखने से बचाता है।

3. मेडिकल उपचार (डॉक्टर की सलाह पर)

जब घरेलू उपाय काम न करें, तो डॉक्टर निम्न दवाओं का सुझाव दे सकते हैं:

  • एंटीहिस्टामाइन (Antihistamines): छींकने और खुजली को रोकने के लिए।

  • नेजल स्प्रे (Nasal Sprays): सूजन कम करने और बंद नाक खोलने के लिए (इन्हें लंबे समय तक बिना डॉक्टरी सलाह के न लें)।

  • डिकंजेस्टेंट (Decongestants): भारीपन और साइनस के दबाव से राहत के लिए।

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

  • यदि बुखार 102°F (39°C) से अधिक हो।

  • नाक से निकलने वाला स्राव (Discharge) पीला या हरा हो और चेहरे पर तेज दर्द हो।

  • अगर 10 दिनों से ज्यादा समय तक लक्षणों में सुधार न हो।

  • सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ हो रही हो।

इस तरह से सर्दी-जुकाम ना करें नजरअंदाज यह गलत हो सकता है।

 

डॉक्टरी सलाह नाक की समस्याएं नाक में साइनस इन्फेक्शन नाक सर्दी-जुकाम ना करें नजरअंदाज
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