क्या कम हो जाएगी आपकी इन-हैंड सैलरी, जानें क्या कहता है New Labour Code 2025
Kaushiki | Apr 21, 2026, 11:50 IST
New Labour Codes 2025
New Labour Codes 2025: नए लेबर कोड और टैक्स नियमों से टेक-होम सैलरी बदल सकती है। कंपनियां अब सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही हैं।
New Labour Codes 2025: साल 2026 के अप्रैजल के दौरान एम्प्लाइज के मन में कई बड़े सवाल हैं। एम्प्लाइज के मन में सवाल है कि क्या नए लेबर कोड 2025 आपकी इन-हैंड सैलरी को कम कर देंगे?
कंपनियां नए टैक्स नियमों को सैलरी पैकेज में कैसे शामिल करेंगी? फिलहाल ज्यादातर कंपनियां अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में बनी हुई हैं। उन्होंने इंटरनल प्लानिंग तो की है पर बदलाव लागू नहीं किए हैं।
राज्य सरकारों की ओर से अभी फाइनल नोटिफिकेशन आना बाकी है। नियमों में क्लैरिटी न होने से कंपनियां अभी थोड़ा रुकना चाहती हैं। वे बार-बार सैलरी स्ट्रक्चर बदलने की झंझट से बचना चाहती हैं।
![New Labour Codes 2025]()
नए लेबर कोड के मुताबिक, वेजेस (wedges) की डेफिनिशन अब बदल जाएगी। अब कर्मचारी की बेसिक सैलरी कुल CTC (Cost to Company) का 50% होनी चाहिए। अभी कंपनियां बेसिक सैलरी को 30 से 40% तक ही रखती हैं।
बेसिक सैलरी बढ़ने से आपका पीएफ (Employees' Provident Fund) योगदान भी बढ़ जाएगा। ग्रेच्युटी की रकम भी अब पहले के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ेगी।
अगर कंपनी आपका कुल CTC नहीं बढ़ाती तो नुकसान हो सकता है। ज्यादा पीएफ कटने से आपकी इन-हैंड सैलरी कम हो जाएगी। हालांकि, लंबे ड्यूरेशन में ये आपकी बचत के लिए अच्छा है।
बता दें कि, रिटायरमेंट के समय मिलने वाला पैसा अब काफी ज्यादा बढ़ जाएगा। जिन कंपनियों में पीएफ बेसिक सैलरी पर बेस है वहां असर दिखेगा। कर्मचारी अपनी रिटायरमेंट लाइफ को अब ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगे। लेकिन महीने के खर्चों के लिए मिलने वाली सैलरी घट सकती है।
आप पीएफ योगदान को 18 सौ रुपए पर सीमित भी कर सकते हैं। ये ऑप्शन चुनकर आप अपनी टेक-होम सैलरी को बचा सकते हैं। आपको अपनी कंपनी की पॉलिसी के बारे में डिटेल से पूछना चाहिए।
अप्रैल 2026 से नए इनकम टैक्स नियम भी लागू हो चुके हैं। बजट 2025 के बाद न्यू टैक्स रिजीम काफी पॉपुलर हुआ है। अब पुराने रिजीम में मिलने वाले अलाउंस की लिमिट बढ़ गई है। बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल फीस पर अब ज्यादा छूट मिलेगी।
मील बेनिफिट (Meal Benefit) अब दोनों टैक्स रिजीम में उपलब्ध है। आपको दोनों रिजीम की तुलना करके ही फैसला लेना चाहिए। अपनी कंपनी से सैलरी ब्रेकअप पर खुलकर चर्चा जरूर करें। अपनी जरूरतों के हिसाब से सबसे बेस्ट टैक्स रिजीम चुनें।
आने वाले समय में सैलरी स्ट्रक्चर पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट होगा। लेबर कोड लागू होने के बाद कंप्लायंस काफी बढ़ जाएगा। कर्मचारियों को अब अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग दोबारा करनी पड़ सकती है।
अपनी फ्यूचर सेविंग्स और आज की जरूरत में तालमेल बिठाएं। कंपनियों को भी अपने कर्मचारियों को इन बदलावों को समझाना होगा। सही जानकारी ही आपको सही फैसला लेने में मदद करेगी। अपनी सैलरी स्लिप के हर कॉम्पोनेंट को बारीकी से समझें।
भारत सरकार ने 29 पुराने लेबर कानूनों को मिलाकर चार नए लेबर कोड तैयार किए हैं। ये संविधान के Article 246 के तहत कंकररेंट लिस्ट का हिस्सा है। इसका मतलब है कि केंद्र और राज्य दोनों इस पर नियम बना सकते हैं।
इन बदलावों से हमें दो बड़े फायदे होंगे। पहला, आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स (PF और ग्रेच्युटी) काफी बढ़ जाएगी, जिससे आपका फ्यूचर सिक्योर होगा। दूसरा, टैक्स (Income Tax Rules) नियमों में बदलाव और बढ़े हुए अलाउंस से आप अपनी टैक्स प्लानिंग को बेहतर बनाकर ज्यादा बचत कर पाएंगे। कुल मिलाकर, ये नए नियम आपको आज के खर्चों और कल की सुरक्षा के बीच एक सही बैलेंस बनाने में मदद करेंगे।
इस नई लेबर कोड में बदलाव यह है कि अब आपकी बेसिक सैलरी कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए। इससे आपका पीएफ योगदान बढ़ जाएगा, जिससे रिटायरमेंट सेविंग्स ज्यादा होगी, लेकिन हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है। ये कानून पूरे देश में काम करने के तरीके को डिजिटल और आसान बनाने के लिए लाया गया है।
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कंपनियां नए टैक्स नियमों को सैलरी पैकेज में कैसे शामिल करेंगी? फिलहाल ज्यादातर कंपनियां अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में बनी हुई हैं। उन्होंने इंटरनल प्लानिंग तो की है पर बदलाव लागू नहीं किए हैं।
राज्य सरकारों की ओर से अभी फाइनल नोटिफिकेशन आना बाकी है। नियमों में क्लैरिटी न होने से कंपनियां अभी थोड़ा रुकना चाहती हैं। वे बार-बार सैलरी स्ट्रक्चर बदलने की झंझट से बचना चाहती हैं।
New Labour Codes 2025
बेसिक सैलरी और पीएफ का नया रूल
बेसिक सैलरी बढ़ने से आपका पीएफ (Employees' Provident Fund) योगदान भी बढ़ जाएगा। ग्रेच्युटी की रकम भी अब पहले के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ेगी।
अगर कंपनी आपका कुल CTC नहीं बढ़ाती तो नुकसान हो सकता है। ज्यादा पीएफ कटने से आपकी इन-हैंड सैलरी कम हो जाएगी। हालांकि, लंबे ड्यूरेशन में ये आपकी बचत के लिए अच्छा है।
रिटायरमेंट सेविंग्स में होगा बड़ा इजाफा
आप पीएफ योगदान को 18 सौ रुपए पर सीमित भी कर सकते हैं। ये ऑप्शन चुनकर आप अपनी टेक-होम सैलरी को बचा सकते हैं। आपको अपनी कंपनी की पॉलिसी के बारे में डिटेल से पूछना चाहिए।
इनकम टैक्स के नए नियम
मील बेनिफिट (Meal Benefit) अब दोनों टैक्स रिजीम में उपलब्ध है। आपको दोनों रिजीम की तुलना करके ही फैसला लेना चाहिए। अपनी कंपनी से सैलरी ब्रेकअप पर खुलकर चर्चा जरूर करें। अपनी जरूरतों के हिसाब से सबसे बेस्ट टैक्स रिजीम चुनें।
एक्सपर्ट्स की सलाह
अपनी फ्यूचर सेविंग्स और आज की जरूरत में तालमेल बिठाएं। कंपनियों को भी अपने कर्मचारियों को इन बदलावों को समझाना होगा। सही जानकारी ही आपको सही फैसला लेने में मदद करेगी। अपनी सैलरी स्लिप के हर कॉम्पोनेंट को बारीकी से समझें।
क्या है New Labour Codes 2025
ये कोड क्या करते हैं?
- Wages Code: यह सुनिश्चित करता है कि सबको मिनिमम सैलरी और बोनस समय पर मिले।
- Social Security Code: यह पीएफ, बीमा और ग्रेच्युटी जैसे फायदों को और मजबूत बनाता है।
- Industrial Relations: यह कंपनियों और वर्कर के बीच विवादों को जल्दी सुलझाने में मदद करता है।
- Occupational Safety: यह काम करने की जगह पर सुरक्षा और हेल्थ स्टैंडर्ड्स तय करता है।
इन बदलावों से क्या फायदा होगा
इस नई लेबर कोड में बदलाव यह है कि अब आपकी बेसिक सैलरी कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए। इससे आपका पीएफ योगदान बढ़ जाएगा, जिससे रिटायरमेंट सेविंग्स ज्यादा होगी, लेकिन हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है। ये कानून पूरे देश में काम करने के तरीके को डिजिटल और आसान बनाने के लिए लाया गया है।
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