वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर करेंगे प्रदर्शन, मांगेंगे ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
Amresh Kushwaha | Oct 21, 2026, 16:26 IST
निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर का बड़ा ऐलान।
चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के खिलाफ 23 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन होगा। इस आंदोलन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर भी शामिल होंगे। वह जाने-माने अर्थशास्त्री और राजनीतिक विश्लेषक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे। साथ ही SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग भी उठाएंगे।
23 अक्टूबर को होगा प्रदर्शन
इस प्रदर्शन का आयोजन पीपल्स अगेंस्ट एसआईआर (People Against SIR) नाम का समूह करेगा। इसका गठन 14 अक्टूबर को हुआ था।
इस समूह से छात्र और युवा जुड़े हैं। किसानों और मजदूरों के साथ महिला संगठन भी शामिल हैं। दलित और आदिवासी समुदायों के लोग भी इससे जुड़े हैं। अल्पसंख्यक और दिव्यांग समुदायों सहित अन्य वर्गों की भी भागीदारी है।
आयोजकों ने इस आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जोड़ा है। उनका नारा है हर हाथ तिरंगा, हर गली जंतर-मंतर। इसके जरिए देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की अपील की गई है।
Har gali me Jantar Mantar !Friday, 23 October, 2026People’s March to Restore Democracy Let’s Rise to the Challenge https://t.co/JFq3tzujsS
— Parakala Prabhakar (@parakala) October 21, 2026
कई बड़े चेहरे होंगे शामिल
उनके साथ कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी रहेंगे। अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज भी हिस्सा लेंगे।
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल होंगी।
किसान नेता राकेश टिकैत के आने की भी संभावना है। महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी भी शामिल हो सकते हैं। जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष के पहुंचने की भी संभावना जताई गई है।
आयोजकों ने इंडिया गठबंधन के राजनीतिक दलों को भी निमंत्रण दिया है।
प्रदर्शनकारियों की क्या मांग है?
प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा चाहते हैं। वे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी मांग कर रहे हैं।
दूसरी मांग मौजूदा SIR प्रक्रिया को रद्द करने की है। तीसरी मांग मतदाता सूची से हटाए गए नामों को वापस जोड़ने की है।
आयोजकों का आरोप है कि इस प्रक्रिया से लोगों के Voting Rights प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटने पर नागरिक मतदान नहीं कर पाएंगे।
SIR पर परकला प्रभाकर ने क्या कहा?
उन्होंने इस प्रक्रिया को नागरिकों का रक्तहीन राजनीतिक संहार बताया है।
प्रभाकर ने अपनी टिप्पणी में जर्मनी और रवांडा का उदाहरण दिया है। उन्होंने कहा कि वहां अलग-अलग पहचान के आधार पर उत्पीड़न हुआ था।
उनके मुताबिक भारत में लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। इससे नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं।
उन्होंने दावा किया कि इससे नागरिकों के बीच दो वर्ग बनेंगे। एक वर्ग के पास मतदान का अधिकार होगा। दूसरा वर्ग इस अधिकार से वंचित रह जाएगा।
ये आरोप और आशंकाएं परकला प्रभाकर की अपनी टिप्पणी का हिस्सा हैं।
कौन हैं परकला प्रभाकर?
परकला प्रभाकर देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। उनकी चर्चित किताब The Crooked Timber of New India में भी कई सवाल उठाए गए हैं। इसमें देश की राजनीति, आर्थिक स्थिति और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर चर्चा की गई है।
दिलचस्प बात यह है कि उनकी पत्नी केंद्र सरकार में वित्त मंत्री हैं। इसके बावजूद वह मोदी सरकार की कई नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। अब वह 23 अक्टूबर को SIR के खिलाफ होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेंगे।
मोदी सरकार पर पहले भी उठाए सवाल
1. नोटबंदी और आर्थिक नीतियों पर सवाल
2. चुनावी बॉन्ड को बताया बड़ा घोटाला
हालांकि ये प्रभाकर के आरोप थे। इन्हें किसी अपराध के साबित होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
3. बेरोजगारी और महंगाई पर सरकार को घेरा
4. अब चुनाव आयोग और SIR पर सवाल
प्रभाकर ने SIR की तुलना NRC और CAA को पिछले दरवाजे से लागू करने की कोशिश से भी की है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।
अब वह 23 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। इस आंदोलन में SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग उठाई जाएगी। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की जाएगी।
हालांकि SIR को लेकर प्रभाकर के ये आरोप और आशंकाएं हैं। इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग का पक्ष और मतदाता सूची से नाम हटाने की वास्तविक प्रक्रिया भी इस मामले में महत्वपूर्ण है।
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