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News In Short
पीसीओडी हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्या है जो अंडाशय में छोटी गांठें पैदा करती है।
खराब जीवनशैली, मोटापा और आनुवांशिक कारण इस बीमारी के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं।
अनियमित पीरियड्स, चेहरे पर अनचाहे बाल और अचानक वजन बढ़ना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
डॉक्टरों के अनुसार संतुलित आहार और नियमित व्यायाम ही इसे नियंत्रित करने का सबसे बेहतर तरीका है।
सही समय पर ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करवाकर इस स्थिति का सटीक उपचार संभव है।
News In Detail
आजकल बहुत सी महिलाएं पीसीओडी ( पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) से परेशान हैं। इसमें शरीर के हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, जिससे मोटापा, बालों का झड़ना, शरीर पर दाने और अनियमित पीरियड जैसी समस्याएं होती हैं। इस समस्या को हल करने के लिए महिलाएं अक्सर प्राकृतिक उपायों की तलाश करती हैं। आइए आज PCOD के बारें में विस्तार से जानते हैं...
पीसीओडी क्या है?
पीसीओडी महिलाओं की एक ऐसी स्थिति है जो हार्मोन में बदलाव के कारण होती है। यह समस्या अक्सर 14 से 45 साल की उम्र की महिलाओं में देखी जाती है। हार्मोन का संतुलन बिगड़ने पर अंडाशय में छोटी-छोटी गांठें या सिस्ट बनने लगते हैं।
सामान्य तौर पर हर महीने अंडाशय से एक स्वस्थ अंडा बाहर निकलता है, लेकिन पीसीओडी में अंडे पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते हैं। ये अधपके अंडे बाद में तरल पदार्थ से भरी छोटी थैलियां बन जाते हैं। इसी कारण से अंडाशय का आकार बढ़ जाता है और उसमें सूजन आ जाती है।
शरीर में पुरुष हार्मोन यानी 'एंड्रोजन' की मात्रा बढ़ने से पीरियड्स अनियमित होते हैं। इस स्थिति में वजन बढ़ना, बाल झड़ना और गर्भधारण में भी काफी समस्या आती है। चेहरे पर अनचाहे बाल निकलना भी हार्मोन के इसी असंतुलन का एक हिस्सा है।
पीसीओडी के क्या कारण हैं?
वैज्ञानिक तौर पर पीसीओडी का अभी तक कोई एक ठोस कारण नहीं मिला है। हालांकि, खराब जीवनशैली और आनुवांशिक कारण इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माने जाते हैं। पीसीओडी होने के ये प्रमुख कारण हैं-
परिवार में पहले से किसी को यह समस्या होना।
शरीर में इंसुलिन की मात्रा का बहुत अधिक बढ़ जाना।
गलत खान-पान और शारीरिक मेहनत की बहुत ज्यादा कमी होना।
शरीर में लंबे समय तक रहने वाली कोई अंदरूनी सूजन।
वजन का बहुत ज्यादा होना या मोटापा बढ़ना।
शरीर में एंड्रोजन का ज्यादा उत्पादन होना।
अनहेल्दी लाइफस्टाइल।
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पीसीओडी के लक्षण क्या है?
पीसीओडी की पहचान शरीर में होने वाले इन बदलावों से की जा सकती है-
पीरियड्स का समय पर न आना या देरी से आना।
पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होना।
चेहरे, छाती या पेट पर बहुत ज्यादा बालों का उगना।
बालों का बहुत पतला होना या सिर पर गंजापन आना।
अचानक से वजन बढ़ना और उसे कम करने में परेशानी होना।
स्वभाव में चिड़चिड़ापन, तनाव या बहुत ज्यादा मूड स्विंग्स होना।
त्वचा का काला पड़ना, खासकर गर्दन और अंडरआर्म्स के पास।
नींद कम आना।
सिर में अक्सर दर्द रहना।
पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द होना।
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Sootr Expert
भारत की फेमस स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषिकेश पाई के अनुसार-
पीसीओडी आज के समय में एक लाइफस्टाइल बीमारी बन चुकी है। इसे केवल दवाओं से नहीं बल्कि अनुशासन से ठीक किया जा सकता है। हर महिला को रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम जरूर करना चाहिए। संतुलित आहार और तनाव मुक्त जीवन इस बीमारी का सबसे बड़ा समाधान है।
पीसीओडी की जांच और उपचार
डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री देखकर और शारीरिक जांच करके इसका पता लगाते हैं। इसमें ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के जरिए ओवरी की स्थिति जांची जाती है। समय पर सही जांच होने से इसका इलाज बहुत आसान हो जाता है।
Sootr Knowledge
उपचार के कुछ आसान तरीके यहां दिए गए हैं-
हेल्दी डाइट: ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज को भोजन में शामिल करें।
नियमित व्यायाम: पैदल चलना या योग करना हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करता है।
वजन नियंत्रण: वजन कम करने से पीसीओडी के लक्षणों में सुधार आता है।
डॉक्टरी सलाह: जरूरत पड़ने पर डॉक्टर हार्मोन को ठीक करने की दवाएं देते हैं।
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