पीरियड्स में मंदिर जाएं या नहीं? जानें कथावाचक जया किशोरी ने क्या कहा
Kaushiki | Jun 07, 2026, 15:15 IST
Periods Mein Mandir Jana
पीरियड्स के दौरान मंदिर जाने और पूजा करने पर कथावाचक जया किशोरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि माहवारी अपवित्र नहीं है। उन्होंने महाभारत और विज्ञान का हवाला देकर पुरानी सोच को बदला है। वहीं प्रेमानंद महाराज की राय थोड़ी अलग है।
समझें क्या है पूरा मामला
मशहूर कथावाचक जया किशोरी ने इस विषय पर खुलकर बात की है।
जया किशोरी के अनुसार पीरियड्स कोई अपवित्र या अछूत चीज नहीं है।
उन्होंने अपनी बात को समझाने के लिए महाभारत का उदाहरण दिया है।
दूसरी तरफ संत प्रेमानंद महाराज की राय इस मुद्दे पर अलग है।
Jaya kishori on women periods: पीरियड्स में महिलाओं को मंदिर जाना चाहिए या नहीं? जया किशोरी ने दी राय |
पीरियड्स को लेकर जया किशोरी से सवाल
यह बात लगभग हर धर्म के परिवारों में देखने को मिलती है। यह एक ऐसा सवाल है जो हर महिला के मन में होता है। जया किशोरी ने इसका बहुत ही सुंदर और लॉजिकल जवाब दिया। आइए जानें उन्होंने क्या कहा।
Periods Mein Mandir Jana
पुराने जमाने में पीरियड्स के नियम बनाने की वजह
इसलिए उन्हें घर से बाहर जाने के लिए मना किया जाता था।आज के समय में बाजार में हर तरह की चीजें उपलब्ध हैं। इसलिए पुराने नियमों को आज के समय पर थोपना ठीक नहीं है।
क्या समय के साथ पीरियड्स से जुड़े नियमों का गलत मतलब निकाला गया
जया किशोरी ने कहा कि ऐसा सोचना पूरी तरह से गलत है। जिसने भी ये नियम बनाए थे उसका इरादा बहुत अलग था। वह केवल महिलाओं की सेहत और आराम का ध्यान रखना चाहता था।
Periods Mein Mandir Jana
पीरियड्स में खट्टा-मीठा खाने से मना क्यों
Periods में मंदिर जाना चाहिए या नहीं? जान लें कथावाचक जया किशोरी का जवाब | Jaya Kishori: Why women are not allowed in temple during periods me mandir kyu nahi jaye -
महाभारत के द्रौपदी प्रसंग को लेकर जया ने क्या बताया
जया ने माहवारी के रक्त को पवित्र क्यों बताया है
प्रेमानंद महाराज की राय क्या है
आज की सोच क्या होनी चाहिए
- समय के साथ बदलाव (Adaptability): कथावाचिका जया किशोरी के मुताबिक, पुराने समय के नियम परिस्थितियों के हिसाब से बने थे। आज के हाइजीनिक और आधुनिक युग में उन नियमों का गलत मतलब निकालकर अछूतपन से जोड़ना पूरी तरह गलत है।
- सम्मानजनक नजरिया (Respectful Approach): आज की सोच महिलाओं को कमतर दिखाने वाली नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान देने वाली होनी चाहिए। पीरियड्स एक पूरी तरह से नेचुरल और बायोलॉजिकल प्रोसेस है, जिससे पूरी मानव जाति का अस्तित्व जुड़ा है।
- साइंटिफिक लॉजिक (Scientific Logic): प्राचीन समय में महिलाओं को आराम देने और भारी शारीरिक काम से बचाने के लिए कुछ पाबंदियां लगाई जाती थीं। आज हमें उन नियमों के पीछे छिपे असली इरादे यानी महिलाओं की सेहत और आराम को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- आस्था और भक्ति का संतुलन (Balance of Faith): जैसा कि संत प्रेमानंद महाराज भी कहते हैं कि इस दौरान बाहरी पूजा-पाठ भले ही वर्जित हो, लेकिन मन में भगवान का नाम जपने पर कोई रोक नहीं है। इसलिए, आज के समाज को अंधविश्वास से ऊपर उठकर लॉजिकल और सेंसिबल सोच अपनानी चाहिए ताकि धर्म और विज्ञान दोनों का सम्मान बना रहे।
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