रथ यात्रा की तारीखों पर क्यों छिड़ा महायुद्ध? आमने-सामने आए पुरी मंदिर और इस्कॉन
Kaushiki | Jul 15, 2026, 12:25 IST
puri jagannath mandir iskcon rath yatra vivad
पुरी जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और इस्कॉन के बीच रथ यात्रा की तारीखों को लेकर विवाद गहरा गया है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि विदेशों में बिना तय समय के रथ यात्रा निकालना शास्त्रों के खिलाफ है, जबकि इस्कॉन इसे शास्त्र सम्मत बता रहा है।
Jagannath Rath Yatra:पूरी जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और इस्कॉन (ISKCON) के बीच रथ यात्रा की तारीखों को लेकर विवाद काफी गहरा गया है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) का आरोप है कि विदेशों में तय समय के बिना रथ यात्रा निकालना पूरी तरह शास्त्रों के खिलाफ है। वहीं इस्कॉन का दावा है कि उनका यह आयोजन पूरी तरह शास्त्र सम्मत है।
मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन पर जनता को गुमराह करने और पुरी के राजा के नाम पर भ्रम फैलाने का भी आरोप लगाया है। दोनों पक्ष अब एक-दूसरे पर गलत बयानी का आरोप लगा रहे हैं। फिलहाल इस मामले पर इस्कॉन ने चुप्पी साध रखी है, जिससे श्रद्धालुओं के बीच असमंजस बढ़ गया है।
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पुरी में रथ यात्रा हर साल एक तय तारीख पर होती है। लेकिन विदेशों में इस्कॉन (International ISKCON)कई अलग-अलग तारीखों पर यह उत्सव मनाता है। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (Shri Jagannath Temple Administration) ने साफ कहा है कि विदेशों में बेवक्त रथ यात्रा मनाना शास्त्रों के विरुद्ध है।
प्रशासन ने इस्कॉन के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि किसी भी दिन रथ यात्रा मनाई जा सकती है। SJTA के मुताबिक, 12 जुलाई को इस्कॉन के नेशनल कम्युनिकेशन ऑफिस की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी हुई थी। मंदिर प्रशासन ने इसे पूरी तरह झूठे बयानों से भरा बताया। प्रशासन का आरोप है कि इसका मकसद जनता को गुमराह करना था।
बता दें कि, ये विवाद नया नहीं है। इसे सुलझाने के लिए 20 मार्च 2025 को भुवनेश्वर में एक बड़ी बैठक हुई थी। इसमें SJTA और इस्कॉन मंदिर दोनों तरफ के विद्वान शामिल हुए थे। बैठक में इस्कॉन के विद्वानों ने तर्क दिया कि भारत से बाहर पूरे साल अलग-अलग तारीखों पर रथ यात्रा मनाई जा सकती है।
उन्होंने इसके लिए शास्त्रों का हवाला दिया था। लेकिन पुरी मंदिर के विद्वानों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने ऑथेंटिक शास्त्रों और पुराणों के सटीक संदर्भ दिए। मंदिर पक्ष का कहना था कि इस्कॉन के तर्क में कोई दम नहीं है।
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मंदिर अधिकारियों ने इस्कॉन पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस्कॉन ने जानबूझकर एक भ्रम फैलाया। आरोप है कि पुरी के मानद राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने बेवक्त रथ यात्रा को मंजूरी दे दी है।
मंदिर प्रशासन (जगन्नाथ मंदिर दर्शन विवाद) ने इस दावे को गलत बताया। दरअसल, महाराजा दिब्यसिंह देब बर्लिन में इस्कॉन के एक रथ यात्रा कार्यक्रम में गए थे। उनके इस दौरे को ही मंजूरी के तौर पर पेश किया गया। मंदिर प्रशासन ने इसे स्पष्ट रूप से गलत बताया है।
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इस पूरे विवाद पर इस्कॉन की प्रतिक्रिया अभी सीमित है। समाचार एजेंसी PTI ने इस्कॉन के राष्ट्रीय प्रवक्ता युधिष्ठिर गोविंद दास से संपर्क किया था। उन्होंने SJTA का बयान देखे बिना कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
उनका कहना था कि बिना बयान देखे प्रतिक्रिया देना मुश्किल है। फिलहाल यह विवाद दोनों पक्षों के आधिकारिक बयानों तक सीमित है। आने वाले दिनों में इस्कॉन की तरफ से विस्तृत प्रतिक्रिया आ सकती है। श्रद्धालुओं के बीच इस विवाद को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन पर जनता को गुमराह करने और पुरी के राजा के नाम पर भ्रम फैलाने का भी आरोप लगाया है। दोनों पक्ष अब एक-दूसरे पर गलत बयानी का आरोप लगा रहे हैं। फिलहाल इस मामले पर इस्कॉन ने चुप्पी साध रखी है, जिससे श्रद्धालुओं के बीच असमंजस बढ़ गया है।
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मंदिर प्रशासन का पलटवार
प्रशासन ने इस्कॉन के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि किसी भी दिन रथ यात्रा मनाई जा सकती है। SJTA के मुताबिक, 12 जुलाई को इस्कॉन के नेशनल कम्युनिकेशन ऑफिस की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी हुई थी। मंदिर प्रशासन ने इसे पूरी तरह झूठे बयानों से भरा बताया। प्रशासन का आरोप है कि इसका मकसद जनता को गुमराह करना था।
पुरानी बैठक का भी जिक्र
उन्होंने इसके लिए शास्त्रों का हवाला दिया था। लेकिन पुरी मंदिर के विद्वानों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने ऑथेंटिक शास्त्रों और पुराणों के सटीक संदर्भ दिए। मंदिर पक्ष का कहना था कि इस्कॉन के तर्क में कोई दम नहीं है।
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पर क्यों छिड़ा विवाद? - puri jagannath temple administration issue ultimatum on iskcon on rath yatra -
राजा के नाम पर भ्रम
मंदिर प्रशासन (जगन्नाथ मंदिर दर्शन विवाद) ने इस दावे को गलत बताया। दरअसल, महाराजा दिब्यसिंह देब बर्लिन में इस्कॉन के एक रथ यात्रा कार्यक्रम में गए थे। उनके इस दौरे को ही मंजूरी के तौर पर पेश किया गया। मंदिर प्रशासन ने इसे स्पष्ट रूप से गलत बताया है।
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इस्कॉन की तरफ से चुप्पी
उनका कहना था कि बिना बयान देखे प्रतिक्रिया देना मुश्किल है। फिलहाल यह विवाद दोनों पक्षों के आधिकारिक बयानों तक सीमित है। आने वाले दिनों में इस्कॉन की तरफ से विस्तृत प्रतिक्रिया आ सकती है। श्रद्धालुओं के बीच इस विवाद को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
FAQ
- पुरी मंदिर और इस्कॉन के बीच विवाद क्यों हुआ?
विवाद रथ यात्रा की तारीखों को लेकर हुआ है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि विदेशों में बेवक्त रथ यात्रा मनाना गलत है। इस्कॉन का दावा है कि उनका आयोजन शास्त्र सम्मत है। - क्या राजा ने इस्कॉन की रथ यात्रा को मंजूरी दी थी?
मंदिर प्रशासन के अनुसार यह दावा गलत है। राजा दिब्यसिंह देब सिर्फ बर्लिन में एक कार्यक्रम में गए थे। इसे मंजूरी के तौर पर गलत तरीके से पेश किया गया। - इस्कॉन ने विवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी?
इस्कॉन के प्रवक्ता ने अभी विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने SJTA का बयान देखे बिना कुछ भी कहने से इनकार किया। आगे की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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