रामायण पार्ट 1 रिव्यू: रणबीर की मर्यादा और यश का रौद्र रूप छाया, VFX शानदार
Arohi Raj | Sootr Creatives | Nov 05, 2026, 14:51 IST
रामायण में दिखी भव्यता, रणबीर और यश की एक्टिंग ने बांधा समां
एक तरफ मर्यादा और धर्म के रास्ते पर चलने वाले भगवान राम हैं। दूसरी तरफ शक्ति, ज्ञान और अहंकार से भरा रावण है। इन दोनों के बीच की कहानी को बड़े पर्दे पर दिखाना आसान नहीं है। खासकर तब, जब यह कहानी करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी हो। निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म रामायण पार्ट 1 बड़ी जिम्मेदारी के साथ आई है।
इसका बजट करीब चार सौ करोड़ रुपए बताया गया है। रणबीर कपूर ने भगवान राम की भूमिका निभाई है। वहीं, यश रावण बने हैं।फिल्म में अयोध्या की भव्यता और लंका का वैभव दिखाया गया है। VFX से पौराणिक दुनिया को बड़े स्तर पर बनाया गया है। रणबीर अपने शांत और गंभीर अंदाज से प्रभावित करते हैं। वहीं, यश का रौद्र रूप खास नजर आता है।
हालांकि, फिल्म का संगीत ज्यादा असर नहीं छोड़ता। कुछ संवाद भी कमजोर लगते हैं। फिल्म की अवधि 3 घंटे 15 मिनट है। इसे 5 में से 3.5 स्टार दिए जा सकते हैं। आइए जानते हैं फिल्म की कहानी और खूबियां।
फिल्म की शुरुआत भगवान राम से नहीं, बल्कि रावण से होती है। कहानी सबसे पहले लंका के राजा रावण की दुनिया दिखाती है। उसके पास ज्ञान, शक्ति और कई वरदान हैं। लेकिन उसके अंदर अहंकार भी बढ़ता जाता है। रावण का किरदार यश ने निभाया है। वह कठोर तपस्या करके ब्रह्मा को प्रसन्न करता है। इसके बाद उसे कई वरदान मिलते हैं। अपनी ताकत से वह इंद्र को भी हरा देता है। फिर अपने सौतेले भाई कुबेर से लंका छीन लेता है।
फिल्म में रावण के दस सिरों की कहानी भी दिखाई गई है। उसे दशानन क्यों कहा जाता है, इसका पौराणिक कारण भी बताया गया है। फिल्म रावण के कई पहलुओं को सामने लाती है। इसमें उसका ज्ञान, तपस्या और अहंकार शामिल है।
इसके बाद कहानी अयोध्या पहुंचती है। यहां राजा दशरथ के घर भगवान राम का जन्म होता है। राम को भगवान विष्णु का अवतार बताया गया है। रणबीर कपूर ने राम की भूमिका निभाई है। फिल्म में उनका बचपन भी दिखाया गया है। इसके बाद ऋषि विश्वामित्र के साथ उनकी यात्रा दिखाई जाती है।
फिर कहानी मिथिला पहुंचती है। यहां सीता का स्वयंवर आयोजित होता है। राम स्वयंवर में शिव धनुष तोड़ देते हैं। इसके बाद उनका विवाह सीता से होता है। सीता का किरदार साई पल्लवी ने निभाया है। सब कुछ ठीक चल रहा होता है। तभी राजमहल की राजनीति कहानी बदल देती है। कैकेयी अपने दो वरदान मांगती हैं। इसके चलते राम को 14 साल का वनवास मिलता है। राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन जाते हैं।
वनवास के दौरान शूर्पणखा का प्रसंग आता है। इसके बाद मारीच सोने के हिरण का रूप धारण करता है। वह अपनी चाल से राम को भ्रमित करता है। राम और लक्ष्मण हिरण के पीछे चले जाते हैं। इसी मौके का फायदा रावण उठाता है। वह साधु का रूप धारण करके आश्रम पहुंचता है। इसके बाद वह सीता का हरण कर लेता है।
सीता को बचाने के लिए जटायु रावण से लड़ता है। इस लड़ाई में जटायु बुरी तरह घायल हो जाता है। बाद में वह राम को सीता हरण की जानकारी देता है। इसके बाद जटायु दम तोड़ देता है। यहीं फिल्म का पहला भाग भावुक मोड़ पर खत्म होता है। हालांकि, कहानी यहीं पूरी नहीं होती। फिल्म के पोस्ट क्रेडिट सीन में हनुमान जी की झलक दिखाई जाती है। उनका किरदार सनी देओल ने निभाया है।
इस सीन में हनुमान जी उड़ते हुए नजर आते हैं। उन्हें पीछे और साइड से दिखाया गया है। इस दौरान 'जय श्री राम' का उद्घोष सुनाई देता है। हालांकि, उनका चेहरा नहीं दिखाया जाता। पहले भाग में रावण का उदय और राम का वनवास दिखाया गया है। इसमें सीता हरण तक की कहानी भी शामिल है। अब हनुमान जी की लंका यात्रा बाकी है। अशोक वाटिका का प्रसंग भी अगले भाग में आएगा। रामसेतु और लंका युद्ध के लिए भी इंतजार करना होगा।
भगवान राम का किरदार निभाना किसी भी अभिनेता के लिए चुनौती है। रणबीर कपूर इस भूमिका में गंभीर और शांत नजर आते हैं। उनके चेहरे पर शालीनता और हाव-भाव में मर्यादा दिखाई देती है। रणबीर ने राम के किरदार को सहज रखने की कोशिश की है। उन्होंने अपने अभिनय में ज्यादा नाटकीयता नहीं दिखाई। उनका शांत अंदाज किरदार को खास बनाता है।
वहीं, यश रावण के किरदार में छा जाते हैं। उनका रौद्र रूप और अंदाज काफी प्रभावशाली है। वह रावण के अहंकार और ताकत को बखूबी दिखाते हैं। साई पल्लवी सीता के किरदार में सहज नजर आती हैं। उनकी अदाकारी में भावनाएं साफ दिखाई देती हैं। रवि दुबे ने लक्ष्मण की भूमिका निभाई है। उनके अभिनय में भाई के प्रति प्रेम और समर्पण नजर आता है।
हालांकि, कुछ जगहों पर संवाद कमजोर लगते हैं। किरदारों के हिसाब से संवादों में और दम होना चाहिए था। रामायण जैसी कहानी में संवादों का खास महत्व है। इस मामले में फिल्म थोड़ी पीछे रह जाती है।
रामायण की कहानी ज्यादातर दर्शकों को पहले से पता है। इसे नए अंदाज में दिखाना आसान नहीं है। निर्देशक ने कहानी की शुरुआत रावण के जीवन से की है। इसके बाद राम का जन्म और सीता हरण दिखाया गया है।
फिल्म में राम और रावण की दुनिया दिखाई गई है। पहले भाग में कहानी को सीमित रखा गया है। इसका मकसद आगे के संघर्ष की जमीन तैयार करना है। फिल्म 3 घंटे 15 मिनट लंबी है। इसके बावजूद कुछ हिस्सों में कहानी धीमी लगती है। कुछ घटनाओं को कम समय में दिखाया जा सकता था। इससे कहानी की रफ्तार बेहतर हो सकती थी।
फिल्म का अंत किसी बड़े युद्ध से नहीं होता। न ही इसमें किसी की जीत दिखाई गई है। इसका अंत आगे की कहानी के संकेत देता है। अब दर्शकों को राम और रावण के संघर्ष का इंतजार रहेगा।
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका विजुअल ट्रीटमेंट है। अयोध्या के महल और लंका का साम्राज्य भव्य नजर आते हैं। दोनों जगहों को बड़े पैमाने पर तैयार किया गया है। फिल्म में महल और प्राकृतिक दृश्य शानदार दिखाए गए हैं। पौराणिक दुनिया को भी खूबसूरती से पर्दे पर उतारा गया है। VFX का इस्तेमाल कई दृश्यों में प्रभावशाली है। बड़े पर्दे पर ये दृश्य अच्छा अनुभव देते हैं।
प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम पर भी खास ध्यान दिया गया है। कलाकारों के कपड़े उनके किरदारों के हिसाब से तैयार किए गए हैं। आसपास का माहौल भी कहानी के अनुरूप नजर आता है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म की भव्यता को और बढ़ाती है। एक्शन दृश्यों को भी बड़े स्तर पर फिल्माया गया है।
हालांकि, कुछ राक्षसों और मायावी जीवों के दृश्य कमजोर हैं। उनके लुक और चलने के तरीके में बनावटीपन दिखता है। इसके बावजूद फिल्म का विजुअल अनुभव शानदार है।
फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान और हंस जिमर ने तैयार किया है। दोनों से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। उम्मीद थी कि फिल्म का संगीत भी भव्य होगा। राम की एंट्री पर खास धुन सुनने की उम्मीद थी। यह धुन उनके किरदार की गरिमा दिखा सकती थी। रावण की एंट्री पर भी दमदार संगीत चाहिए था। इससे उसका रौद्र रूप और प्रभावशाली बन सकता था।
लेकिन फिल्म में कोई धुन लंबे समय तक याद नहीं रहती। कुछ दृश्यों में बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा लगता है। इसके बावजूद संगीत फिल्म की ताकत नहीं बन पाता। इतनी बड़ी कहानी में संगीत की अहम भूमिका होती है। लेकिन इस मामले में फिल्म निराश करती है।
FAQs
हालांकि, फिल्म का संगीत ज्यादा असर नहीं छोड़ता। कुछ संवाद भी कमजोर लगते हैं। फिल्म की अवधि 3 घंटे 15 मिनट है। इसे 5 में से 3.5 स्टार दिए जा सकते हैं। आइए जानते हैं फिल्म की कहानी और खूबियां।
रावण की तपस्या और विजय से होती कहानी की शुरुआत
फिल्म में रावण के दस सिरों की कहानी भी दिखाई गई है। उसे दशानन क्यों कहा जाता है, इसका पौराणिक कारण भी बताया गया है। फिल्म रावण के कई पहलुओं को सामने लाती है। इसमें उसका ज्ञान, तपस्या और अहंकार शामिल है।
राम का जन्म, सीता से विवाह और 14 साल का वनवास
फिर कहानी मिथिला पहुंचती है। यहां सीता का स्वयंवर आयोजित होता है। राम स्वयंवर में शिव धनुष तोड़ देते हैं। इसके बाद उनका विवाह सीता से होता है। सीता का किरदार साई पल्लवी ने निभाया है। सब कुछ ठीक चल रहा होता है। तभी राजमहल की राजनीति कहानी बदल देती है। कैकेयी अपने दो वरदान मांगती हैं। इसके चलते राम को 14 साल का वनवास मिलता है। राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन जाते हैं।
वनवास के दौरान शूर्पणखा का प्रसंग आता है। इसके बाद मारीच सोने के हिरण का रूप धारण करता है। वह अपनी चाल से राम को भ्रमित करता है। राम और लक्ष्मण हिरण के पीछे चले जाते हैं। इसी मौके का फायदा रावण उठाता है। वह साधु का रूप धारण करके आश्रम पहुंचता है। इसके बाद वह सीता का हरण कर लेता है।
सीता हरण के बाद कहानी में आएगा बड़ा मोड़
इस सीन में हनुमान जी उड़ते हुए नजर आते हैं। उन्हें पीछे और साइड से दिखाया गया है। इस दौरान 'जय श्री राम' का उद्घोष सुनाई देता है। हालांकि, उनका चेहरा नहीं दिखाया जाता। पहले भाग में रावण का उदय और राम का वनवास दिखाया गया है। इसमें सीता हरण तक की कहानी भी शामिल है। अब हनुमान जी की लंका यात्रा बाकी है। अशोक वाटिका का प्रसंग भी अगले भाग में आएगा। रामसेतु और लंका युद्ध के लिए भी इंतजार करना होगा।
रणबीर के शांत व्यक्तित्व के साथ यश का रौबदार लुक
वहीं, यश रावण के किरदार में छा जाते हैं। उनका रौद्र रूप और अंदाज काफी प्रभावशाली है। वह रावण के अहंकार और ताकत को बखूबी दिखाते हैं। साई पल्लवी सीता के किरदार में सहज नजर आती हैं। उनकी अदाकारी में भावनाएं साफ दिखाई देती हैं। रवि दुबे ने लक्ष्मण की भूमिका निभाई है। उनके अभिनय में भाई के प्रति प्रेम और समर्पण नजर आता है।
हालांकि, कुछ जगहों पर संवाद कमजोर लगते हैं। किरदारों के हिसाब से संवादों में और दम होना चाहिए था। रामायण जैसी कहानी में संवादों का खास महत्व है। इस मामले में फिल्म थोड़ी पीछे रह जाती है।
स्क्रीनप्ले: कहानी की रफ्तार कई जगह धीमी पड़ती है
फिल्म में राम और रावण की दुनिया दिखाई गई है। पहले भाग में कहानी को सीमित रखा गया है। इसका मकसद आगे के संघर्ष की जमीन तैयार करना है। फिल्म 3 घंटे 15 मिनट लंबी है। इसके बावजूद कुछ हिस्सों में कहानी धीमी लगती है। कुछ घटनाओं को कम समय में दिखाया जा सकता था। इससे कहानी की रफ्तार बेहतर हो सकती थी।
फिल्म का अंत किसी बड़े युद्ध से नहीं होता। न ही इसमें किसी की जीत दिखाई गई है। इसका अंत आगे की कहानी के संकेत देता है। अब दर्शकों को राम और रावण के संघर्ष का इंतजार रहेगा।
VFX और टेक्निकल काम: भव्यता फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम पर भी खास ध्यान दिया गया है। कलाकारों के कपड़े उनके किरदारों के हिसाब से तैयार किए गए हैं। आसपास का माहौल भी कहानी के अनुरूप नजर आता है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म की भव्यता को और बढ़ाती है। एक्शन दृश्यों को भी बड़े स्तर पर फिल्माया गया है।
हालांकि, कुछ राक्षसों और मायावी जीवों के दृश्य कमजोर हैं। उनके लुक और चलने के तरीके में बनावटीपन दिखता है। इसके बावजूद फिल्म का विजुअल अनुभव शानदार है।
बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी का असर बढ़ाने में कमजोर
लेकिन फिल्म में कोई धुन लंबे समय तक याद नहीं रहती। कुछ दृश्यों में बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा लगता है। इसके बावजूद संगीत फिल्म की ताकत नहीं बन पाता। इतनी बड़ी कहानी में संगीत की अहम भूमिका होती है। लेकिन इस मामले में फिल्म निराश करती है।
FAQs
रामायण पार्ट 1 को कितनी रेटिंग मिली है?
फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार दिए गए हैं।- रामायण पार्ट 1 में मुख्य पात्र कौन हैं?
रामायण पार्ट 1 में राम का किरदार रणबीर कपूर ने निभाया है, जबकि रावण का किरदार यश ने निभाया है। - फिल्म रामायण पार्ट 1 की कुल अवधि कितनी है?
फिल्म की कुल अवधि 3 घंटे 15 मिनट है।
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