राजस्थान पंचायत चुनाव की अनूठी कहानी, एक ही गांव की तीन बेटियां बनीं अलग-अलग पंचायतों में सरपंच
Jageshwar Prasad | Nov 05, 2026, 13:30 IST
एक गांव की तीन बेटियां बनीं सरपंच, तीनों ने पहली बार लड़ा पंचायत चुनाव और जीता
राजस्थान में चल रहे पंचायत राज चुनावों के बीच कई ऐसी और रोचक खबरें सामने आ रही हैं, जो राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कहीं बेटियों की शानदार जीत ने नया इतिहास रचा है, तो कहीं अनोखे चुनाव प्रचार और दिलचस्प मुकाबले देखने को मिल रहे हैं।
एक ही गांव की तीन बेटियां बनीं सरपंच
पूजा वर्मा (28 वर्ष): बीए-बीएड पास पूजा ने भगेगा ग्राम पंचायत में सामान्य महिला सीट पर पहली बार चुनाव लड़ते हुए 182 वोटों से जीत दर्ज की। वे गांवों में लाइब्रेरी, ओपन जिम और डिजिटल सुविधाएं विकसित करना चाहती हैं।मनीषा देवी (34 वर्ष): दसवीं तक पढ़ी मनीषा रामपुरा थोई ग्राम पंचायत में एससी आरक्षित सीट से पहली बार चुनाव लड़कर सरपंच बनी हैं। उनकी प्राथमिकता महिलाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की है।सुनीता वर्मा (37 वर्ष): किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुनीता ने बुर्जा की ढाणी ग्राम पंचायत में, जहां पहली बार एससी महिला के लिए सीट आरक्षित हुई थी, 398 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। उनकी प्राथमिकता बच्चों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी बनवाना है।
ब्यावर में कारों की छत पर सोफा-कुर्सी बांधकर प्रचार
चुनाव चिह्न मिलते ही प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। जिन प्रत्याशियों को निर्वाचन आयोग (State Election Commission) की ओर से कुर्सी और सोफा चुनाव चिह्न मिला, उन्होंने अनोखा तरीका अपनाते हुए उन्हें अपनी कारों की छत पर रस्सियों से बांधकर पूरे क्षेत्र में अनोखा प्रचार किया।
इसी तरह सरवीना ग्राम पंचायत में एक बेहद दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है, जहां पिता और पुत्र आमने-सामने खड़े हैं। पारिवारिक रिश्ते के बावजूद चुनावी मैदान में उतरी इस जोड़ी पर पूरे इलाके की विशेष निगाहें टिकी हुई हैं।
चूरू के लूदी झाबर में नहीं होगा सरपंच का चुनाव
यहां एसटी वर्ग के लिए सरपंच पद आरक्षित था, लेकिन मैदान में एक भी योग्य प्रत्याशी नहीं होने के कारण निर्वाचन प्रक्रिया अटक गई है। बुधवार को एक आवेदन जरूर प्राप्त हुआ था, लेकिन अनुसूचित जनजाति का वैध प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाने के कारण वह भी निरस्त कर दिया गया।
FAQs
- छापर ग्राम पंचायत की तीन बेटियों का राजस्थान पंचायत चुनाव में कैसा प्रदर्शन रहा?
छापर ग्राम पंचायत की तीन बेटियां, पूजा वर्मा, मनीषा देवी, और सुनीता वर्मा, ने पहली बार पंचायत चुनाव लड़ा और सभी ने अपने-अपने क्षेत्र से सरपंच के पद पर जीत हासिल की। - बीच छापर ग्राम पंचायत चुनाव में क्या खास बात थी?
इस चुनाव में एक खास बात यह थी कि तीनों जीती हुई बेटियां एससी वर्ग से ताल्लुक रखती हैं और उनका मुख्य लक्ष्य गांव की तस्वीर को बदलना था। - राजस्थान में चूरू जिले के लूदी झाबर में सरपंच चुनाव क्यों नहीं हो पा रहा है?
चूरू जिले के लूदी झाबर में सरपंच पद के लिए मतदान नहीं हो पा रहा है क्योंकि यहां एसटी वर्ग के लिए पद आरक्षित था, लेकिन कोई योग्य प्रत्याशी नहीं होने के कारण निर्वाचन प्रक्रिया अटक गई है।
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