एमपी में सरकारी खजाने में बड़ा खेल! 66 तरह की गड़बड़ियां उजागर, स्कूटी से लेकर विवाह योजना तक में नियमों की अनदेखी
Aman Vaishnav | Nov 05, 2026, 12:34 IST
सरकारी ट्रेजरी में योजनाओं, मुआवजे और अफसरों के एलटीसी भुगतान में 66 तरह की बड़ी वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है।
सरकारी खजाने से जनता और कर्मचारियों को मिलने वाले पैसों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। साल 2025-26 में जिला ट्रेजरी के जरिए सरकारी योजनाओं के भुगतान में कई नियमों को नजरअंदाज किया गया। स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल (SFIC) की जांच में इसका खुलासा हुआ है। जांच टीम को कुल 66 तरह की गड़बड़ियां मिली हैं। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
किन योजनाओं के पैसों में हुआ खेल?
मुख्यमंत्री स्कूटी योजना (Mukhyamantri Scooty Scheme ): इसके तहत होने वाले भुगतानों में नियमों को अनदेखा किया गया है।मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता स्कीम (Kalyani Vivah Sahayata Scheme): इस योजना के फंड ट्रांसफर में भी भारी लापरवाही सामने आई है।- मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना (Kanya Vivah/Nikah Scheme): गरीब बेटियों के विवाह के लिए मिलने वाली सहायता राशि के वितरण में भी खामियां मिलीं है।
मुआवजे और बैंक खातों में हेरफेर
- एक खाते में कई नाम: जांच में पता चला कि एक ही बैंक खाते में अलग-अलग नामों से पैसे भेजे गए। वहीं कई मामलों में एक ही व्यक्ति के अलग-अलग बैंक खातों में भी पैसे ट्रांसफर किए गए।
- सिक्योरिटी डिपॉजिट और फंड ट्रांसफर: एक कंस्ट्रक्शन एजेंसी को 8.35 करोड़ रुपए की सुरक्षा निधि लौटाने में नियमों का उल्लंघन हुआ। पुराने अटके मामलों का 1.45 करोड़ रुपया ट्रेजरी से धार जिला पंचायत की ग्रामीण विकास निधि के खाते में डाल दिया गया।
- आपदा का मुआवजा: कई जिलों में बाढ़, प्राकृतिक आपदा और सांप काटने से हुई मौतों के मामलों में मिलने वाले मुआवजे के वितरण में भी भारी गड़बड़ी की गई।
पेंशन, टैक्स और बिलों के भुगतान में भारी लापरवाही
- पेंशन और बीमा में चूक: नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के तहत सरकार का 14% अंशदान कटना था, लेकिन उसे कम काटा गया। 1 जनवरी 2005 और उसके बाद भर्ती हुए कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था में भी नियम तोड़े गए। समूह बीमा का पैसा एनपीएस फंड से निकाल कर दे दिया गया।
- टैक्स और जीएसटी का अंतर: जीएसटी (GST) से मिली रकम और आरबीआई (RBI) में जमा कराई गई रकम के आंकड़ों में फर्क मिला है। ठेकेदारों को बिल देते समय इनकम टैक्स और जीएसटी की जरूरी कटौती नहीं की गई।
- बिना इजाजत खाते और खरीदारी: वित्त विभाग की मंजूरी लिए बिना एक से ज्यादा पर्सनल डिपॉजिट खाते खोले गए। तय सीमा से ज्यादा स्टांप जमा करके रखे गए। विभागाध्यक्ष (HOD) को बताए बिना मनमर्जी से सामान खरीदा गया और टेंडर में घालमेल करके गाड़ियां किराए पर ली गईं।
- दोहरा भुगतान: एक ही बिजली बिल का दो-दो बार भुगतान कर दिया गया। साथ ही सामान्य भविष्य निधि और विभागीय भविष्य निधि के एक ही लेटर पर दो बार पैसे निकाल लिए गए।
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