सुप्रीम कोर्ट ने RERA की भूमिका पर उठाए सवाल, कहा- इसे बंद कर देना ही बेहतर है

Aman Vaishnav | Feb 13, 2026, 12:57 IST
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rera law supreme court questions builders relief
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सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे बंद कर देना बेहतर होगा। यह बात हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कही।

आम खरीदारों की बजाय बिल्डर्स को फायदा

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि राज्य सरकारें रेरा के गठन पर फिर से सोचें। यह संस्था खरीदारों की मदद करने के बजाय सिर्फ डिफॉल्टर बिल्डरों को फायदा दे रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि रेरा का जो उद्देश्य था, वह पूरी तरह से बदल चुका है।

रिटायर्ड आईएएस की नियुक्ती पर कोर्ट

सुनवाई के दौरान जब बेंच को बताया गया कि रेरा में एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी को नियुक्त किया गया है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हर राज्य में RERA रिटायर्ड अफसरों के लिए एक 'रिहैबिलिटेशन सेंटर' बन गया है। इन अथॉरिटीज में बस ऐसे ही लोग भरे पड़े हैं।

चीफ जस्टिस ने कहा कि जिन लोगों के लिए ये संस्था बनाई गई थी, वो अब पूरी तरह से निराश और दुखी हैं। उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है।

ये है पूरा मामला...

हिमाचल प्रदेश में RERA कार्यालय को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने का मामला सामने आया था। इस बारे में राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उस पर रोक लगा दी थी।

हाईकोर्ट का कहना था कि बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए, यह कदम RERA के कामकाज को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को कार्यालय ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि RERA और उसकी अपीलीय ट्रिब्यूनल का कामकाज बिना किसी रुकावट के चलता रहे। जो मामले लंबित हैं उनकी सुनवाई भी नियमित रूप से होती रहे।

वर्षों तक करना होता है इंतजार

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ये भी कहा कि RERA का मकसद घर खरीदने वालों को समय पर न्याय और पारदर्शिता देना था। जमीनी हकीकत ये है कि कई खरीदारों को सालों तक इंतजार करना पड़ता है। उन्हें कोई राहत नहीं मिलती है।

रेरा पहले भी कर चुका निराश

यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने रेरा पर सवाल उठाए हैं। सितंबर 2024 में भी जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा था कि रेरा अब पूर्व नौकरशाहों का ठिकाना बन गया है।

प्रोजेक्ट समय पर पूरे होने की कोई गारंटी नहीं

होमबायर्स की संस्था फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (FPCE) ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर कहा है कि, रेरा कानून को 9 साल हो गए हैं। अभी भी कोई गारंटी नहीं है कि रेरा-रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे। रेरा खरीदारों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है, तो इसे बेहतर बनाने की जरूरत है। साथ ही इसके अस्तित्व पर फिर से सोचने की आवश्यकता है।

क्या है RERA

रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) एक सरकारी संस्था है, जिसे 2016 में बनाया गया था। इसका मकसद रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाना, बिल्डरों को जवाबदेह बनाना और खरीदारों के हितों की सुरक्षा करना था।

सीधे शब्दों में कहें तो, रेरा यह सुनिश्चित करता है कि खरीदार को उसका घर सही समय पर, तय शर्तों के हिसाब से और बिना किसी धोखाधड़ी के मिले।

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