गुजरात यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जाएगी मोदी की लीडरशिप, आरएसएस भी होगा कोर्स का हिस्सा
Arun Tiwari | May 03, 2026, 13:23 IST
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वडोदरा की महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में नरेंद्र मोदी की लीडरशिप पर नया कोर्स शुरू होगा। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और आधुनिक नेतृत्व के सामाजिक प्रभावों का अध्ययन कराया जाएगा।
गुजरात के वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय ने अपने शैक्षणिक पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए एक नया कोर्स शुरू करने की पहल की है। इस कोर्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उसके सामाजिक प्रभाव का अकादमिक अध्ययन किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा तैयार इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को समकालीन नेतृत्व के विभिन्न आयामों से परिचित कराना है। इसके अलावा कोर्स में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी शामिल किया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस नए मॉड्यूल के तहत छात्रों को मोदी की नेतृत्व शैली, जनसंपर्क क्षमता और उनके निर्णयों के समाज पर पड़ने वाले प्रभावों का वैज्ञानिक विश्लेषण कराया जाएगा। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास और सामाजिक योगदान को भी शामिल किया गया है, ताकि छात्रों को व्यापक संदर्भ मिल सके।
समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह कोर्स समाजशास्त्र के पारंपरिक सिद्धांतों को आधुनिक राजनीतिक नेतृत्व के साथ जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से इस बात पर केंद्रित होगा कि किस प्रकार एक नेता अपनी नीतियों और विचारधारा के माध्यम से समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अध्ययन पूरी तरह अकादमिक और विश्लेषणात्मक होगा। इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक पक्षपात नहीं रखा जाएगा।
डॉ. सिंह के अनुसार इस कोर्स में प्रसिद्ध समाजशास्त्री मैक्स वेबर के करिश्माई नेतृत्व के सिद्धांत से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की तुलना भी की जाएगी। वेबर के सिद्धांत के अनुसार करिश्माई नेता अपने व्यक्तित्व और दृष्टिकोण के बल पर लोगों को प्रभावित करते हैं। साथ ही, सामाजिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसी दृष्टिकोण से छात्रों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि आधुनिक भारतीय राजनीति में करिश्माई नेतृत्व की भूमिका क्या है।
मोदी तत्व का नया मॉड्यूल तैयार किया गया है। पाठ्यक्रम में मीडिया, डिजिटल राष्ट्रवाद, नागरिकता, अस्मिता, वैश्वीकरण और पहचान जैसे विषयों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। छात्रों को यह समझाया जाएगा कि किस प्रकार आधुनिक तकनीक और संचार माध्यमों ने नेतृत्व की शैली को प्रभावित किया है। इसके अलावा, राजनीति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए यह भी विश्लेषण किया जाएगा कि किसी नेता की लोकप्रियता किन कारणों से बढ़ती है। वह लंबे समय तक जनमानस में कैसे बने रहते हैं।
इस कोर्स में नीतिगत निर्णयों का भी गहन अध्ययन शामिल किया गया है। नोटबंदी, डिजिटल इंडिया, स्वच्छता अभियान और जल शक्ति जैसे कार्यक्रमों के प्रभावों का विश्लेषण छात्रों को कराया जाएगा।
विभाग का मानना है कि इन नीतियों के माध्यम से यह समझा जा सकता है कि सरकार किस प्रकार समाज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेती है और उनका क्रियान्वयन करती है।
विश्वविद्यालय के इस कदम को उच्च शिक्षा में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है। यह कोर्स न केवल छात्रों को समकालीन राजनीति की बेहतर समझ देगा, बल्कि उन्हें आलोचनात्मक सोच विकसित करने में भी मदद करेगा।
शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह के पाठ्यक्रम छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों का विश्लेषण करने की क्षमता भी प्रदान करते हैं।
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विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा तैयार इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को समकालीन नेतृत्व के विभिन्न आयामों से परिचित कराना है। इसके अलावा कोर्स में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी शामिल किया जाएगा।
मोदी की लीडरशिप की पढ़ाई
नए नेतृत्व का समाज पर प्रभाव
मैक्स वेबर से मोदी की तुलना
मोदी तत्व का नया मॉड्यूल
पॉलिसी मेटर का भी एनालिसिस
विभाग का मानना है कि इन नीतियों के माध्यम से यह समझा जा सकता है कि सरकार किस प्रकार समाज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेती है और उनका क्रियान्वयन करती है।
यूनिवर्सिटी की नई पहल
शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह के पाठ्यक्रम छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थितियों का विश्लेषण करने की क्षमता भी प्रदान करते हैं।
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