एसबीआई की नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, अपराध घटने से बढ़ेगी देश की जीडीपी
Kaushiki | Jun 09, 2026, 11:30 IST
SBI Research Report
एसबीआई की ताजा स्टडी के मुताबिक देश में अपराध 1% कम होने से विकास दर 0.133% तक बढ़ जाती है। सुरक्षा पर प्रति व्यक्ति 1% खर्च बढ़ाने से अपराध दर में 0.36% की कमी आती है। सीसीटीवी वाले शहरों में क्राइम काफी कम हुआ है।
समझें क्या है पूरा मामला
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने देश के 28 राज्यों पर एक खास रिसर्च की है।
- इस स्टडी के अनुसार अपराध कम होने से देश की विकास दर बढ़ जाती है।
- अगर जुर्म सिर्फ 1% कम होता है, तो लंबे समय में जीडीपी 0.133% बढ़ती है।
- जिन शहरों में ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, वहां पर अपराध काफी कम हैं।
- महिला सुरक्षा बेहतर होने से नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।
इस रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, जब किसी राज्य में क्राइम रेट घटता है, तो वहां बिजनेस और इन्वेस्टमेंट के लिए एक सेफ एनवायरनमेंट बनता है। इससे देश की विकास दर तेजी से बूस्ट होती है।
इस रिपोर्ट में हाई-टेक सिक्योरिटी जैसे CCTV सर्विलांस सिस्टम्स, पुलिस बजट और वीमेन सेफ्टी का वर्कफोर्स पर पड़ने वाले इम्पैक्ट को डिटेल में एनालाइज किया गया है। आइए समझते हैं कि कैसे सुरक्षा पर होने वाला खर्च देश की आर्थिक तरक्की का रास्ता साफ करता है।
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सुरक्षा खर्च बढ़ाने से अपराध में कितनी कमी आती है
जब भी कोई सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा पर प्रति व्यक्ति 1% खर्च बढ़ाती है। तब उस राज्य की कुल अपराध दर में 0.36% की बड़ी गिरावट आती है। इसका सीधा और साफ मतलब यह हुआ कि सुरक्षा पर जितना ज्यादा बजट खर्च होगा। समाज में कानून व्यवस्था उतनी ही मजबूत होगी और जुर्म का ग्राफ नीचे जाएगा।
सीसीटीवी लगाने से क्राइम रेट पर क्या असर हुआ
चेन्नई में प्रति वर्ग मील 615 और हैदराबाद में 157 कैमरे लगे हैं। यही कारण है कि ज्यादा कैमरों की वजह से इन दोनों शहरों में क्राइम रेट बहुत कम है। हालांकि इंदौर और सूरत जैसे कुछ शहर इस मामले में अभी अपवाद बने हुए हैं।
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महिला सुरक्षा और वर्कफोर्स भागीदारी का कनेक्शन
इन राज्यों में नेशनल एवरेज 64.6 से ज्यादा महिला अपराध दर्ज हुए हैं। इस वजह से इन राज्यों के वर्कफोर्स यानी श्रम बल में महिलाओं की हिस्सेदारी कम हुई है। राजस्थान में क्राइम रेट ज्यादा होने के बाद भी महिला वर्कफोर्स 50% पर है।
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साल 2024 में अपराध के कुल कितने मामले आए
पूरे भारत की अपराध दर भी प्रति लाख आबादी पर 448.3 से गिरकर 418.9 हो गई है। राज्यों की बात करें तो केरल में प्रति लाख सबसे ज्यादा एक हजार 389 अपराध दर्ज किए गए। वहीं नगालैंड में सबसे सुरक्षित माहौल रहा, जहां यह आंकड़ा केवल 61.6 रहा।
क्या पुलिस के पास अपराध के सभी मामले दर्ज होते हैं
आंकड़ों के मुताबिक लगभग 80% मामले तो पुलिस के कागजों तक पहुंच ही नहीं पाते। अनुमान के मुताबिक करीब 5.94 लाख मामले दर्ज होने चाहिए थे, पर सिर्फ 1.21 लाख ही दर्ज हुए। पश्चिम बंगाल में भी चोरी और सेंधमारी के कई केस दर्ज नहीं कराए गए।
FAQ
- एसबीआई रिसर्च के अनुसार अपराध दर घटने से जीडीपी ग्रोथ पर क्या असर पड़ता है?
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार देश में अपराध दर में 1% की कमी आने से देश की अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा होता है। इससे शॉर्ट टर्म यानी अल्पकाल में वास्तविक जीडीपी 0.11% और लॉन्ग टर्म में देश की विकास दर 0.133% तक बढ़ जाती है। - सुरक्षा पर प्रति व्यक्ति खर्च बढ़ाने से अपराधों में कितने प्रतिशत की कमी आती है?
एसबीआई की स्टडी बताती है कि जब भी सरकार सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था पर अपना बजट बढ़ाती है, तो उसके अच्छे नतीजे मिलते हैं। यदि प्रति व्यक्ति सुरक्षा खर्च में 1% की बढ़ोतरी की जाती है, तो उस राज्य की अपराध दर में लगभग 0.36% की कमी आ जाती है। - सीसीटीवी कैमरों की संख्या का शहरों में अपराध के ग्राफ से क्या संबंध है?
जिन शहरों में प्रति वर्ग मील सीसीटीवी कैमरों की संख्या ज्यादा है, वहां सुरक्षा का बेहतर माहौल है और अपराध कम हैं। चेन्नई में सबसे ज्यादा 615 कैमरे हैं, जिससे वहां क्राइम रेट कम है। इसके विपरीत कम कैमरों वाले इलाकों में सुरक्षा का खतरा हमेशा बना रहता है।
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