सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की प्राइवेट, डीम्ड यूनिवर्सिटी के ऑडिट का दिया आदेश, 8 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने देश की सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज का ऑडिट करने का आदेश दिया है। एक छात्रा के नाम बदलने के विवाद के बाद कोर्ट ने यह फैसला लिया। UGC, केंद्र और राज्यों को व्यक्तिगत एफिडेविट जमा करना होगा।

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Anjali Dwivedi
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सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षा के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब देशभर की सभी प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटीज का ऑडिट होगा। कोर्ट ने इसका सीधा आदेश दिया है। यह छात्रों के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम है।

SC का बड़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक आदेश दिया है। यह आदेश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी मिला है। UGC यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन को भी यह आदेश प्राप्त हुआ है। इन सभी को एक सिग्नेचर एफिडेविट जमा करना होगा। यह एफिडेविट ऑडिट (Supreme Court Audit) पूरा होने के बाद जमा करना है।

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UGC ने प्राइवेट यूनिवर्सिटीज से मांगी 10 जानकारियां

क्रम संख्याजानकारी (Information)
1यूनिवर्सिटी की स्थापना किन कानूनी प्रावधानों के तहत हुई है।
2सरकार से यूनिवर्सिटी को किस तरह के फायदे (Benefits) मिलते हैं।
3इंस्टीट्यूट चलाने वाली सोसायटी या संगठन के नियम और उद्देश्य क्या हैं।
4इंस्टीट्यूट से जुड़े बड़े फैसले लेने वाले लोगों का चुनाव कैसे होता है।
5यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट से जुड़े सभी अधिकारियों की पूरी जानकारी।
6यूनिवर्सिटी के संचालन में UGC का क्या रोल (भूमिका) है।
7क्या यूनिवर्सिटी नो-प्रॉफिट, नो-लॉस बेसिस पर ही चल रही है। सरकार यह सुनिश्चित कैसे करती है।
8स्टूडेंट्स और फैकल्टी की शिकायतों का निपटान करने का कोई तंत्र है या नहीं।
9क्या इंस्टीट्यूट्स फैकल्टी और स्टाफ को निर्धारित मिनिमम सैलरी दे रहे हैं।
10स्टूडेंट्स के एडमिशन और स्टाफ की हायरिंग (भर्ती) की क्या पॉलिसी है।

एफिडेविट में कई अहम जानकारियां देनी होंगी।

  • यूनिवर्सिटी की स्थापना कैसे हुई।

  • इन यूनिवर्सिटीज को कौन नियंत्रित करता है।

  • इन्हें किस तरह के नियम या अप्रूवल मिले हैं।

  • क्या ये यूनिवर्सिटीज वास्तव में लाभ के लिए नहीं चलती हैं।

  • यह सभी जानकारी एफिडेविट में देनी जरूरी है।

यह मामला कैसे शुरू हुआ?

यह पूरा मामला MBA स्टूडेंट आयशा जैन से जुड़ा है। आयशा जैन नाम की 23 साल की छात्रा ने पिटीशन लगाई थी। वह एमिटी यूनिवर्सिटी से Entrepreneurship की पढ़ाई कर रही हैं।

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नाम बदलने का विवाद

आयशा का नाम साल 2021 तक खुशी जैन था। उन्होंने पर्सनल कारणों से नाम बदल लिया। उन्होंने अपना नाम आयशा जैन रख लिया। यह कानूनी प्रक्रिया गजट ऑफ इंडिया में पब्लिश हुई। उनका नाम आधार कार्ड समेत सभी डॉक्यूमेंट्स पर आयशा जैन हो चुका था।

साल 2023 में आयशा ने एमिटी यूनिवर्सिटी में एक सर्टिफिकेट प्रोग्राम में एडमिशन लिया। उन्हें कोर्स पूरा होने पर सर्टिफिकेट मिला। साल 2024 में आयशा ने MBA प्रोग्राम में एडमिशन लिया। इसके लिए उन्होंने सभी कानूनी दस्तावेज जमा कराए।

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यूनिवर्सिटी ने क्या किया?

यूनिवर्सिटी ने रिकॉर्ड्स में नाम बदलने से साफ मना कर दिया। आयशा ने एक गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम नाम रखने के कारण उनके साथ बदसलूकी हुई।

इन वजहों से वह क्लास में कम हाजिर हो पाईं। वह मिनिमम अटेंडेस का क्राइटेरिया पूरा नहीं कर पाईं। वह एग्जाम नहीं दे सकीं। उनका पूरा साल बर्बाद हो गया। छात्रा ने शिक्षा मंत्रालय और UGC (university grants commission) से शिकायत की। यूनिवर्सिटी ने मेल्स पर ध्यान नहीं दिया।

कोर्ट ने दिया मुआवजा

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने Amity University के वाइस चांसलर डॉ. अतुल चौहान को बुलाया। कोर्ट ने कहा कि स्टूडेंट का पूरा साल खराब हुआ है। वाइस चांसलर को इसका समाधान निकालना चाहिए।

इस बीच आयशा ने दूसरी जगह एडमिशन ले लिया था। एमिटी यूनिवर्सिटी ने उनकी फीस वापस कर दी थी। कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को मुआवजा देने का आदेश दिया। छात्रा को 1 लाख रुपए का कंपनसेशन मिला।

केस PIL में बदला

20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया। कोर्ट ने इस केस को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन यानी PIL में बदल दिया। जस्टिस अमानुल्लाह और जस्टिस एन वी अंजरिया की बेंच थी।

बेंच ने कहा कि सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (Private University) की जांच की जाए। उनके बनने, स्थापित होने और चलने के सभी पहलुओं की जांच हो। कोर्ट ने इसे छात्रों के अधिकारों से जोड़ा है। उन्होंने Higher education में ट्रांसपेरेंसी को जरूरी बताया।

शीर्ष अधिकारी होंगे जिम्मेदार

कोर्ट ने साफ किया है कि यह काम किसी जूनियर अधिकारी को नहीं दिया जा सकता। इसके लिए शीर्ष अधिकारियों को ही जिम्मेदारी उठानी होगी।

गलत या अधूरी जानकारी देने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2026 को होगी। सभी एफिडेविट इससे पहले जमा करने होंगे।

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