सरकार ने बताया कितना होगा स्कूल बैग का वजन, 10 दिन बिना बैग के स्कूल जाएंगे बच्चे
Aman Vaishnav | Dec 24, 2025, 14:34 IST
school-bag-weight-limit-new-education-policy-india
केंद्र सरकार ने स्कूल के बच्चों के बैग का वजन तय कर दिया है। अब बच्चों को अपनी उम्र और क्लास के हिसाब से बैग लाना होगा। स्कूलों को साल में 10 दिन बैगलेस डे भी मनाना पड़ेगा।
छोटे बच्चों के कंधों पर भारी बैग अब नहीं दिखेंगे। सरकार ने नई शिक्षा नीति 2020 में बड़े बदलाव किए हैं। अब हर क्लास के लिए बैग का वजन तय कर दिया है। इसका मकसद बच्चों को शारीरिक दिक्कतों से बचाना है। स्कूलों को अब इन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
![_f27acdac-3323-11e8-a509-12b0194ead35]()
शिक्षा मंत्रालय ने वजन की एक लिस्ट तैयार की है। यह लिस्ट बच्चों की क्लास के हिसाब से बनी है।
National Education Policy-2020 (NEP-2020) में एक और मजेदार बात शामिल है।10 दिन बिना बैग के स्कूल जाएंगे बच्चे। इन्हें बैगलेस डेज कहा गया है। इन दिनों में बच्चे सिर्फ किताबी पढ़ाई नहीं करेंगे। वे आर्ट, स्पोर्ट्स और नई स्किल सीखेंगे।
स्कूल को अपने कैलेंडर में यह दिन शामिल करने होंगे। यह नियम क्लास 6 से 8 के लिए अनिवार्य है। इसमें बच्चे ग्राफिक डिजाइन या फैशन डिजाइनिंग भी सीख सकते हैं। इससे बच्चों का मानसिक विकास बेहतर तरीके से होगा।
ये खबर भी पढ़िए-NEP 2020 में बड़ा बदलाव: अब 22 भाषाओं में होगी पढ़ाई, NCERT और IIT मद्रास लेंगे AI का सहारा
विशेषज्ञों का कहना है कि भारी बैग बहुत खतरनाक हैं। इससे बच्चों की पीठ और कंधों में दर्द होता है। कई बच्चे तो छोटी उम्र में ही बीमार पड़ रहे हैं। भारी वजन के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी झुक सकती है।
सांसद रामवीर सिंह विधूड़ी ने भी यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूल और पब्लिशर इसमें मिले होते हैं। वे ज्यादा किताबें लगवाकर बच्चों पर बोझ डालते हैं।
ये खबर भी पढ़िए-राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के एक दिवसीय कार्यशाला में होंगे शामिल, बालाघाट-खजुराहो में रहेगा सीएम मोहन यादव का दौरा
सिर्फ नियम बनाना ही काफी नहीं है। स्कूलों को इसे ईमानदारी से लागू करना होगा। दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन ने भी इस पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि विभाग को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
पैरेंट्स को भी जागरूक होना पड़ेगा। उन्हें देखना चाहिए कि बच्चा फालतू सामान न ले जाए। पानी की बोतल और टिफिन का वजन भी कम रखें। स्कूल को भी टाइम-टेबल के हिसाब से किताबें मंगवानी चाहिए।
ये खबर भी पढ़िए-Best Student Cities: विदेश में पढ़ाई के लिए ये 6 शहर हैं स्टूडेंट्स की पहली पसंद, एडमिशन से पहले जानें
नई शिक्षा नीति 2020 का पैरा 4.33 बहुत जरूरी है। इसमें NCERT और स्कूलों को मिलकर काम करना होगा। बैग का वजन शरीर के वजन का 10% होना चाहिए। इससे ज्यादा वजन बच्चे की सेहत बिगाड़ सकता है।
सरकार का लक्ष्य शिक्षा को बोझ मुक्त बनाना है। अब रटने के बजाय सीखने पर जोर दिया जाएगा। बैगलेस डेज इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उम्मीद है कि अब बच्चों का बचपन भारी नहीं होगा।
_f27acdac-3323-11e8-a509-12b0194ead35
कितना होगा बैग का वजन?
प्राइमरी और मिडिल स्कूल के नियम
- प्री-प्राइमरी: इन छोटे बच्चों के लिए कोई बैग जरूरी नहीं है।
- क्लास 1 और 2: बैग का वजन 1.6 से 2.2 किलो होगा।
- क्लास 3 से 5: इनके लिए वजन 1.7 से 2.5 किलो तय है।
- क्लास 6 और 7: बैग का वजन 2 से 3 किलो के बीच रहेगा।
हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के नियम
- क्लास 8: इस क्लास के लिए वजन 2.5 से 4 किलो होगा।
- क्लास 9 और 10: बैग 2.5 से 4.5 किलो तक हो सकता है।
- क्लास 11 और 12: इनके लिए अधिकतम वजन 5 किलो तय है।
बच्चों के लिए नया बैग नियम👉 प्री-प्राइमरी बच्चों के लिए अब बैग ले जाना जरूरी नहीं है।👉 क्लास 1-2 के लिए बैग का वजन सिर्फ 2.2 किलो तक रहेगा। 👉 छात्र साल में 10 दिन बिना बैग के स्कूल जाएंगे । 👉बैग का वजन बच्चे के कुल वजन का 10% ही होगा। 👉नियम न मानने वाले स्कूलों पर सरकार कड़ी नजररखेगी। | |
10 दिन बैगलेस डे
स्कूल को अपने कैलेंडर में यह दिन शामिल करने होंगे। यह नियम क्लास 6 से 8 के लिए अनिवार्य है। इसमें बच्चे ग्राफिक डिजाइन या फैशन डिजाइनिंग भी सीख सकते हैं। इससे बच्चों का मानसिक विकास बेहतर तरीके से होगा।
ये खबर भी पढ़िए-NEP 2020 में बड़ा बदलाव: अब 22 भाषाओं में होगी पढ़ाई, NCERT और IIT मद्रास लेंगे AI का सहारा
बच्चे हो रहे बीमार
सांसद रामवीर सिंह विधूड़ी ने भी यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूल और पब्लिशर इसमें मिले होते हैं। वे ज्यादा किताबें लगवाकर बच्चों पर बोझ डालते हैं।
ये खबर भी पढ़िए-राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के एक दिवसीय कार्यशाला में होंगे शामिल, बालाघाट-खजुराहो में रहेगा सीएम मोहन यादव का दौरा
बच्चों के बस्ते, सबकी जिम्मेदारी
पैरेंट्स को भी जागरूक होना पड़ेगा। उन्हें देखना चाहिए कि बच्चा फालतू सामान न ले जाए। पानी की बोतल और टिफिन का वजन भी कम रखें। स्कूल को भी टाइम-टेबल के हिसाब से किताबें मंगवानी चाहिए।
ये खबर भी पढ़िए-Best Student Cities: विदेश में पढ़ाई के लिए ये 6 शहर हैं स्टूडेंट्स की पहली पसंद, एडमिशन से पहले जानें
नई शिक्षा नीति उद्देश्य
सरकार का लक्ष्य शिक्षा को बोझ मुक्त बनाना है। अब रटने के बजाय सीखने पर जोर दिया जाएगा। बैगलेस डेज इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उम्मीद है कि अब बच्चों का बचपन भारी नहीं होगा।
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava