कैसे हुई थी छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु, जानें क्या कहते हैं इतिहासकार
Kaushiki | Apr 03, 2025, 10:45 IST
shivaji maharaj punyatithi
शिवाजी महाराज की मृत्यु के कारणों को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं। कुछ मानते हैं कि उन्हें जहर दिया गया, जबकि कुछ कहते हैं कि उनकी मृत्यु स्वाभाविक थी। जानें इस बारे में क्या कहा जाता है।
शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि: छत्रपति शिवाजी महाराज की आज (3 अप्रैल) को पुण्यतिथि मनाई जाती है। इतिहासकारों के मुताबिक उनका निधन 1680 में हुआ था और इसको लेकर कई विवाद उठे हैं।
कुछ इतिहासकार मानते हैं कि उनकी मृत्यु प्राकृतिक थी, जबकि कुछ का कहना है कि उन्हें जहर दिया गया था। इस आर्टिकल में हम दोनों पक्षों के दृष्टिकोण पर चर्चा करेंगे और शिवाजी महाराज के निधन के कारणों पर प्रकाश डालेंगे।
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कुछ इतिहासकारों का मानना है कि, शिवाजी महाराज को प्राकृतिक कारणों से मृत्यु आई थी। वे बीमार थे और उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी। उनका स्वास्थ्य तीन साल से खराब था और मृत्यु से तीन दिन पहले उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ गई थी।
इन इतिहासकारों के मुताबिक, शिवाजी महाराज को टाइफाइड हो गया था, जिसके कारण उन्हें तेज बुखार आया और खून की उल्टी भी हुई। उनकी तबीयत को देखकर डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन वह ठीक नहीं हो सके और 3 अप्रैल 1680 को उनकी मृत्यु हो गई।
वहीं, कुछ इतिहासकार मानते हैं कि शिवाजी महाराज (Chatrapati Shivaji Maharaj) की मृत्यु प्राकृतिक नहीं थी। उनके मुताबिक, उन्हें साजिश के तहत जहर दिया गया था।
यह साजिश उनके कुछ मंत्रियों और उनकी पत्नी सोयराबाई ने की थी। यह कहा जाता है कि सोयराबाई चाहती थीं कि उनके बेटे राजाराम को गद्दी मिले, जबकि शिवाजी के बड़े बेटे संभाजी को गिरफ्तार कर लिया गया था।
यह भी माना जाता है कि शिवाजी के निधन के दिन हनुमान जयंती थी और किले में सभी लोग उस समारोह में व्यस्त थे। इस मौके का फायदा उठाकर साजिशकर्ताओं ने उन्हें जहर दे दिया। इसके बाद, शिवाजी की तबीयत और बिगड़ी और अंत में उनकी मृत्यु हो गई।
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इतिहास के मुताबिक, शिवाजी महाराज की मृत्यु रायगढ़ किले में हुई थी। किले में उनकी समाधि भी है और इस किले से जुड़ी कुछ हड्डियां और अवशेष भी मिले हैं। हालांकि, इस बारे में भी इतिहासकारों में मतभेद हैं कि ये अवशेष वास्तव में शिवाजी के हैं या किसी और के।
1926-27 में किले की खुदाई के दौरान कुछ हड्डियां मिली थीं, जिनके बारे में इतिहासकारों का मानना था कि ये शिवाजी की थीं। बता दें कि, महाराष्ट्र के इतिहासकार इंद्रजीत सावंत ने इन अवशेषों के डीएनए टेस्ट की मांग की थी, ताकि यह पता चल सके कि ये वास्तव में शिवाजी के हैं या नहीं।
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शिवाजी महाराज एक महान मराठा शासक थे जिन्होंने 1674 में राज्याभिषेक कर अपना साम्राज्य स्थापित किया। उन्होंने मुगल साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष किया और स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। अपने शासन में उन्होंने न्याय, समानता और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा दिया। उनका सबसे प्रसिद्ध किला रायगढ़ किला था।
उन्हें एक साहसी योद्धा, रणनीतिकार और एक सशक्त शासक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपनी जिंदगी में कई युद्धों में भाग लिया और मुगलों को हराया। उनका शासन बहुत ही न्यायपूर्ण था और उन्होंने अपने राज्य में धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा दिया। उनका आदर्श और नेतृत्व आज भी लोगों के दिलों में जीवित है।
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कुछ इतिहासकार मानते हैं कि उनकी मृत्यु प्राकृतिक थी, जबकि कुछ का कहना है कि उन्हें जहर दिया गया था। इस आर्टिकल में हम दोनों पक्षों के दृष्टिकोण पर चर्चा करेंगे और शिवाजी महाराज के निधन के कारणों पर प्रकाश डालेंगे।
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शिवाजी महाराज की प्राकृतिक मृत्यु का दावा
इन इतिहासकारों के मुताबिक, शिवाजी महाराज को टाइफाइड हो गया था, जिसके कारण उन्हें तेज बुखार आया और खून की उल्टी भी हुई। उनकी तबीयत को देखकर डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन वह ठीक नहीं हो सके और 3 अप्रैल 1680 को उनकी मृत्यु हो गई।
क्या शिवाजी महाराज को जहर दिया गया था
यह साजिश उनके कुछ मंत्रियों और उनकी पत्नी सोयराबाई ने की थी। यह कहा जाता है कि सोयराबाई चाहती थीं कि उनके बेटे राजाराम को गद्दी मिले, जबकि शिवाजी के बड़े बेटे संभाजी को गिरफ्तार कर लिया गया था।
यह भी माना जाता है कि शिवाजी के निधन के दिन हनुमान जयंती थी और किले में सभी लोग उस समारोह में व्यस्त थे। इस मौके का फायदा उठाकर साजिशकर्ताओं ने उन्हें जहर दे दिया। इसके बाद, शिवाजी की तबीयत और बिगड़ी और अंत में उनकी मृत्यु हो गई।
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रायगढ़ किले में शिवाजी की मृत्यु
1926-27 में किले की खुदाई के दौरान कुछ हड्डियां मिली थीं, जिनके बारे में इतिहासकारों का मानना था कि ये शिवाजी की थीं। बता दें कि, महाराष्ट्र के इतिहासकार इंद्रजीत सावंत ने इन अवशेषों के डीएनए टेस्ट की मांग की थी, ताकि यह पता चल सके कि ये वास्तव में शिवाजी के हैं या नहीं।
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शिवाजी महाराज कौन थे
उन्हें एक साहसी योद्धा, रणनीतिकार और एक सशक्त शासक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपनी जिंदगी में कई युद्धों में भाग लिया और मुगलों को हराया। उनका शासन बहुत ही न्यायपूर्ण था और उन्होंने अपने राज्य में धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा दिया। उनका आदर्श और नेतृत्व आज भी लोगों के दिलों में जीवित है।
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