सोनम वांगचुक अस्पताल में भी जारी रखेंगे अनशन, छात्रों को लिखी चिट्ठी में रखी शर्तें
Pawan Modiya | Jul 20, 2026, 22:10 IST
सोनम वांगचुक का अनशन
सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है। उन्होंने छात्र नेताओं और सांसदों की मुलाकात को अनशन खत्म करने की शर्त बताया। वांगचुक फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। सीजेपी के संसद मार्च के दौरान तनाव भी हुआ।
समझें क्या है पूरा मामला
- सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है।
- उन्होंने अस्पताल से हाथ से लिखी चिट्ठी जारी की है।
- वांगचुक छात्र नेताओं और सांसदों के बीच बातचीत चाहते हैं।
- सीजेपी कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर से संसद मार्च की कोशिश की।
- पुलिस कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
चिट्ठी में क्या लिखा
Day #23
I'll continue my fast........... pic.twitter.com/rfohA8iMkx
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 20, 2026
पहले खत्म होना था अनशन
संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद तस्वीर बदल गई। वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित सख्ती पर चिंता जताई। इसके बाद उन्होंने अनशन जारी रखने का फैसला किया। उनका कहना है कि युवाओं को बातचीत का अवसर मिलना चाहिए। आंदोलन का समाधान शांतिपूर्ण संवाद से निकाला जा सकता है। केवल पुलिस कार्रवाई से मांगें समाप्त नहीं होंगी।
सीजेपी का संसद मार्च
संसद मार्च
दिल्ली पुलिस ने मार्च को अनुमति नहीं देने की जानकारी दी थी। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से लोगों को दूर रहने कहा। संसद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस में धक्का-मुक्की हुई।
संसद मार्च
सीजेपी ने पुलिस पर बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। संगठन ने आंसू गैस छोड़ने का दावा भी किया। पुलिस कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इन वीडियो के पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। पुलिस का विस्तृत पक्ष भी सामने आना जरूरी है। कार्रवाई के अलग-अलग दावों की जांच होनी चाहिए।
कई प्रदर्शनकारी हिरासत में
संसद मार्च
वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों के व्यवहार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि युवाओं ने धैर्य नहीं छोड़ा। कथित सख्ती के बावजूद उन्होंने शांति बनाए रखी। उन्होंने युवाओं से हिंसा से दूर रहने की अपील की। आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखना उनकी प्रमुख अपील रही। उनकी पत्नी भी ऐसी अपील कर चुकी हैं।
आंदोलन की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
संगठन का आरोप है कि परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां हुईं। इससे विद्यार्थियों का भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ। सरकार से ठोस सुधारों की मांग की गई है। ये आरोप सीजेपी और प्रदर्शनकारी छात्रों की तरफ से लगाए गए हैं। संबंधित मामलों में सरकारी जांच और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। हर आरोप की पुष्टि प्रमाणों से होनी चाहिए।
वांगचुक अस्पताल में भर्ती, नमक मिला पानी पी रहे
लंबे अनशन के कारण उनका वजन घटा है। शरीर की मांसपेशियों पर भी असर पड़ा है। डॉक्टरों ने लगातार अनशन को स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण बताया। वांगचुक ने अस्पताल में पाबंदियां लगाए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने बोलने और संवाद करने की स्वतंत्रता सीमित बताई। प्रशासन का विस्तृत जवाब इस आरोप पर जरूरी है। अस्पताल में भर्ती होना किसी हिरासत की पुष्टि नहीं करता। इसके लिए प्रशासनिक और कानूनी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। सभी पक्षों का आधिकारिक बयान महत्वपूर्ण रहेगा।
20 जून से जारी है आंदोलन
प्रदर्शनकारियों ने मानसून सत्र का पहला दिन चुना। उनका उद्देश्य सांसदों तक अपनी मांग पहुंचाना था। इसी कारण 20 जुलाई को संसद मार्च बुलाया गया। वांगचुक खुद मार्च में शामिल होना चाहते थे। स्वास्थ्य बिगड़ने से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन का समर्थन जारी रखा।
पत्नी गीतांजलि बोलीं- मुहिम चलती रहेगी
आंग्मो ने संसद मार्च को आंदोलन की शुरुआत बताया। उनके अनुसार, शिक्षा सुधार की मुहिम आगे भी चलेगी। देशभर के लोग इसमें अपने तरीके से जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सांसदों को शिक्षा नीति पर ध्यान देना चाहिए। युवाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। संवाद से ही भरोसा लौट सकता है।
दिल्ली पुलिस ने नहीं दी थी मार्च की मंजूरी
पुलिस ने संसद और आसपास सुरक्षा बढ़ाई थी। बैरिकेडिंग और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। वाहनों और संदिग्ध गतिविधियों की जांच भी बढ़ाई गई। पुलिस का कहना था कि संसद उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है। बिना अनुमति वहां मार्च नहीं किया जा सकता। प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर पर रहने की अपील की गई थी।
सरकार से क्या चाहते हैं
अस्पताल में होने के कारण उन्होंने दूसरा विकल्प दिया है। सांसद और युवा नेता उनसे अस्पताल में मिल सकते हैं। इस बातचीत के बाद अनशन खत्म हो सकता है। उनकी चिट्ठी में तत्काल नीति समाधान का पूरा खाका नहीं है। इसमें संवाद शुरू करने पर ज्यादा जोर दिया गया है। आगे का फैसला सरकारी प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
आगे क्या हो सकता है
दूसरी तरफ, सीजेपी अपना आंदोलन जारी रख सकती है। संगठन ने शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों की मांग की है। हिरासत और पुलिस कार्रवाई भी नया मुद्दा बन सकती है। शांतिपूर्ण संवाद से टकराव कम किया जा सकता है। प्रशासन को कानून और नागरिक अधिकारों में संतुलन रखना होगा। प्रदर्शनकारियों को भी सार्वजनिक सुरक्षा का ध्यान रखना होगा।
जरूरी FAQ
वांगचुक ने छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ कथित पुलिस सख्ती पर चिंता जताई है। वे चाहते हैं कि युवा नेता सांसदों से मिलें। सांसद उनकी मांगें संसद में उठाने का भरोसा दें। ऐसा होने तक उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखने की बात कही है।
सोनम वांगचुक अनशन कब समाप्त करेंगे?
वांगचुक के अनुसार, छात्र नेताओं और सांसदों के बीच बातचीत होनी चाहिए। स्वास्थ्य के कारण बाहर जाना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में सांसद और युवा प्रतिनिधि अस्पताल आ सकते हैं। शिक्षा से जुड़े मुद्दे संसद में उठाने का भरोसा मिलने पर अनशन समाप्त हो सकता है।
सीजेपी आंदोलन की मुख्य मांगें क्या हैं?
सीजेपी परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों पर जवाबदेही मांग रही है। संगठन पेपर लीक और विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान चाहता है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी मांग रहे हैं। इन मांगों पर सरकार की औपचारिक प्रतिक्रिया अपेक्षित है।
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