आवारा कुत्तों की वजह से कब तक परेशान होंगे लोग: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई की गई। कोर्ट ने पूछा कि कब तक लोग इस समस्या से परेशान होंगे। मामले की सुनवाई 8 जनवरी को जारी रहेगी।

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Sandeep Kumar
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NEW DELHI. सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़ी सुनवाई हुई। कोर्ट ने पूछा कि कुत्तों के कारण कब तक परेशानी होगी। अदालत ने कहा कि आदेश सड़कों के लिए नहीं है। यह केवल संस्थागत क्षेत्रों के लिए है। पीठ ने सवाल उठाया कि स्कूलों, अस्पतालों और अदालत परिसरों में कुत्तों की आवश्यकता क्यों है। मामले की सुनवाई ढाई घंटे तक चली। अगली सुनवाई 8 जनवरी को सुबह 10.30 बजे होगी।

क्या बोले जस्टिस विक्रम नाथ ?

यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच में था। जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते तब काट सकते हैं, जब व्यक्ति टू-व्हीलर या साइकिल पर हो। इस स्थिति में व्यक्ति गिर सकता है या एक्सीडेंट हो सकता है। जस्टिस नाथ ने कपिल सिब्बल से पूछा कि क्या आप टू-व्हीलर पर रहे हैं? सिब्बल ने जवाब दिया कि वह अपने करियर के शुरुआती दिनों में रहे थे।

जस्टिस नाथ ने कहा कि काटना अकेला मुद्दा नहीं है। कुत्ते साइकिल सवारों का पीछा भी करते हैं। इस पर सिब्बल, जो एक पार्टी की तरफ से पेश हुए थे। उन्होंने कहा कि इसकी पहचान करना जरूरी है।

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आप कैसे पहचानेंगे कुत्ता किस मूड में है?

जस्टिस नाथ ने कहा, आप कैसे पहचानेंगे कुत्ता किस मूड में है? सिब्बल ने सवाल किया, क्या सभी कुत्तों को शेल्टर देना सही है? बेंच ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक एक्सरसाइज होनी चाहिए कि सड़कें कुत्तों से मुक्त हों।

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क्या बहस हुई कोर्ट में

सिब्बल ने कहा कि कुत्ते कंपाउंड और यूनिवर्सिटी में रहते हैं। जब वे यूनिवर्सिटी में थे, तो कुत्ते थे और किसी ने नहीं काटा। सिब्बल ने कहा कि JNU में कई कुत्ते हैं। इस पर जस्टिस मेहता ने पूछा, "क्या वे गंभीर हैं?" जस्टिस मेहता ने सिब्बल से कहा कि उनकी जानकारी पुरानी हो चुकी है। एनएलएस बैंगलोर ने कई हमलों की रिपोर्ट की है।

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सड़कों को कुत्तों से खाली करना होगा

जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए एक एक्सरसाइज होनी चाहिए। उन्होंने कहा, कोई यह नहीं कह रहा कि आवारा कुत्ते को हटाकर गोली मार दो, सड़कों को कुत्तों से खाली करना होगा। सिब्बल ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए साइंटिफिक तरीका अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी कुत्तों को शेल्टर में रखना इसका हल नहीं है।

सिब्बल ने आवारा कुत्ता के काटने और बेकाबू कुत्तों के रिहैबिलिटेशन के लिए सुझाव दिए। जस्टिस मेहता ने कहा, बस एक चीज छूट गई है, कुत्ते को काउंसलिंग देना कि वापस छोड़े जाने के बाद कुत्ता काटे नहीं। सिब्बल ने कहा कि यह शायद हल्के-फुल्के अंदाज में कहा गया होगा और उनका मतलब ऐसा नहीं था।

यहां पर कुत्तों की जरूरत क्यों है?

जस्टिस मेहता ने सवाल किया कि जहां तक इंस्टीट्यूशन की बात है, वे सड़कें नहीं हैं। उन्होंने पूछा, कोर्ट परिसर और यूनिवर्सिटी में कुत्तों की जरूरत क्यों है? बेंच ने कहा कि नियम कहते हैं कि कुत्तों को उसी एरिया में वापस छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने पूछा कि फिर इंस्टीट्यूशन कुत्तों से कैसे मुक्त होंगे। क्या उन्हें सड़कों पर छोड़ दिया जाए? मामले पर सुनवाई जारी है।

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7 नवंबर को हुई थी पिछली सुनवाई

7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इंस्टीट्यूशनल एरिया में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ी हैं। कोर्ट ने पब्लिक सेफ्टी और हेल्थ के लिए निर्देश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कुत्तों को शेल्टर में भेजा जाए।

सुप्रीम कोर्ट एक स्वतः संज्ञान केस की सुनवाई कर रहा था। यह केस 28 जुलाई को दिल्ली में बच्चों में आवारा कुत्तों के काटने से रेबीज होने की मीडिया रिपोर्ट पर शुरू किया गया था। कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले का दायरा दिल्ली से बाहर बढ़ा दिया। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पार्टी बनाने का निर्देश दिया।

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