यूपी के बर्खास्त सिपाही को शंकराचार्य ने दिया एक लाख की नौकरी का ऑफर

Pawan Modiya | Jul 24, 2026, 18:20 IST
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सिपाही को समर्थन
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यूपी पुलिस से बर्खास्त सिपाही सुनील शुक्ला को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 1 लाख रुपए प्रतिमाह वेतन पर नौकरी का प्रस्ताव दिया है। जून 2026 में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उन्हें बर्खास्त किया गया था।

समझें क्या है पूरा मामला

  • यूपी पुलिस से बर्खास्त सिपाही सुनील शुक्ला का मामला फिर चर्चा में है।
  • जून 2026 में उन्हें सेवा से बर्खास्त किया गया था।
  • बर्खास्तगी से पहले उन्होंने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे।
  • अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन्हें बड़ा ऑफर दिया है।
  • यह ऑफर 1 लाख रुपए प्रतिमाह वेतन का है।

बर्खास्त सिपाही की कहानी

यूपी पुलिस के 2015 बैच के बर्खास्त सिपाही सुनील शुक्ला फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह कोई विवाद नहीं है। इस बार वजह एक बड़ा जॉब ऑफर है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन्हें साथ काम करने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव 1 लाख रुपए प्रतिमाह वेतन पर आधारित है। सुनील शुक्ला अमेठी जिले के गौरीगंज क्षेत्र के रहने वाले हैं। पहले वे लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइंस में तैनात थे। जून 2026 में उन्हें सेवा से हटा दिया गया था। यह कार्रवाई कई गंभीर आरोपों के बाद हुई थी।

शंकराचार्य ने दिया नौकरी की ऑफर

बर्खास्तगी के कुछ समय बाद यह नया मोड़ सामने आया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती हाल के दिनों में कई मुद्दों पर मुखर रहे हैं। वे राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मुद्दों पर भी बयान देते रहे हैं। अब उन्होंने बर्खास्त सिपाही सुनील शुक्ला के समर्थन में कदम बढ़ाया है। उन्होंने सुनील शुक्ला को अपने साथ काम करने का ऑफर दिया है। यह ऑफर 1 लाख रुपए प्रतिमाह वेतन पर आधारित है। शंकराचार्य के इस कदम को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है। कई लोग इसे ईमानदारी को सम्मान देने वाला कदम बता रहे हैं। कुछ लोग इसे पुलिस विभाग पर परोक्ष टिप्पणी भी मान रहे हैं। हालांकि शंकराचार्य की तरफ से इस पर कोई अलग बयान नहीं आया है। सुनील शुक्ला की ओर से भी अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

क्या है वायरल वीडियो और आरोप

दरअसल, मई 2026 में सुनील शुक्ला ने कुछ वीडियो जारी किए थे। इन वीडियो में उन्होंने बड़े आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि ड्यूटी लगाने के नाम पर पैसे वसूले जाते हैं। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया था। इन वीडियो के वायरल होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया था। सुनील शुक्ला ने पुलिस विभाग को लेकर तीखी टिप्पणी भी की थी। उन्होंने विभाग को 'काले अंग्रेज' द्वारा चलाए जाने की बात कही थी। उनका आरोप था कि पुलिस लाइन में ड्यूटी के नाम पर वसूली होती है। इन आरोपों को लेकर पुलिस महकमे में भारी बवाल मचा था। मामला इतना बड़ा हुआ कि जांच के आदेश देने पड़े।

जांच में क्या मिला

आरोप गंभीर थे, इसलिए पुलिस कमिश्नर ने जल्द फैसला लिया। उन्होंने 7 मई 2026 को एक जांच समिति बना दी। इस समिति को आरोपों की सच्चाई परखने का काम सौंपा गया। जांच में समिति ने सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की। लेकिन जांच में आरोप साबित करने वाले कोई ठोस सबूत नहीं मिले। सुनील शुक्ला अपने दावों के समर्थन में सबूत पेश नहीं कर पाए। इसके बाद विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। कार्रवाई के बाद सुनील शुक्ला ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें सच बोलने की सजा मिली है। उनके मुताबिक यह कार्रवाई सच बोलने का इनाम थी।

बर्खास्तगी की वजह

पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार बर्खास्तगी के पीछे कई ठोस कारण थे। अधिकारियों के प्रति अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल एक बड़ी वजह रही। इसके अलावा सोशल मीडिया नीति-2023 का उल्लंघन भी हुआ था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली-1956 का भी उल्लंघन पाया गया। इन सभी बिंदुओं को आधार बनाकर 28 जून 2026 को कार्रवाई हुई। इसी दिन सुनील शुक्ला को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। यह पूरा घटनाक्रम कई हफ्तों तक चर्चा में रहा था।

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