संविधान नहीं मान सकते, तो भारत छोड़ दें: मेटा और व्हाट्सएप को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

Aman Vaishnav | Feb 04, 2026, 10:19 IST
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supreme court meta whatsapp privacy policy
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सुप्रीम कोर्ट ने मेटा और व्हाट्सएप को उनकी प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि आपको एक भी जानकारी शेयर करने की इजाजत नहीं देंगे। CJI सूर्यकांत ने कहा कि भारत में नागरिकों की प्राइवेसी से कोई समझौता नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा को खूब फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि वह व्हाट्सएप को भारतीयों के पर्सनल डाटा का गलत इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देगा।

CJI सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आप इस देश के संवैधानिक मूल्यों का मजाक उड़ा रहे हैं। कोर्ट ने व्हाट्सएप से ये भी पूछा कि आप इस तरह लोगों की प्राइवेसी के अधिकार के साथ कैसे खेल सकते हैं?

संविधान का पालन करो, नहीं तो भारत छोड़ दो

सुप्रीम कोर्ट ने मेटा और व्हाट्सएप को उनके प्राइवेसी पॉलिसी पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि भारत में नागरिकों की प्राइवेसी से कोई समझौता नहीं होगा। CJI सूर्यकांत ने मेटा और व्हाट्सएप से यह भी कहा कि यदि आप संविधान का पालन नहीं कर सकते तो भारत छोड़ दें।

मेटा पर क्यों लगाया था जुर्माना?

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच मेटा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका व्हाट्सएप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ी है। इसमें CCI (कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया) ने नवंबर 2024 में मेटा पर 213.14 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था।

इस फैसले को NCLAT (राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण) ने भी बरकरार रखा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में IT मंत्रालय को भी शामिल करने की बात कही है। कोर्ट 9 फरवरी को इस मामले पर अपना अंतरिम आदेश देगा।

CJI सूर्यकांत बोले कि....

CJI सूर्यकांत ने कहा कि देश में लोगों की प्राइवेसी के अधिकारों की सख्ती से सुरक्षा की जाती है। कोर्ट ने ये भी कहा कि इन एप्स की गोपनीयता से जुड़ी शर्तें इतनी सूझबूझ से लिखी जाती हैं कि आम आदमी समझ ही नहीं पाता। ये लोगों की निजी जानकारी चुराने का एक चालाक तरीका है।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि हम आपको ऐसा करने की इजाजत नहीं देंगे। आपको इस पर पूरी तरह से भरोसा दिलाना होगा नहीं तो कोर्ट को आदेश जारी करना पड़ेगा।

सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपना पक्ष रखा है। वहीं, मेटा की ओर से सीनियर लॉयर मुकुल रोहतगी और व्हाट्सएप की तरफ से अखिल सिब्बल ने कोर्ट में आकर बताया कि जुर्माने की रकम जमा कर दी गई है।

कोर्ट रूम में क्या बातचीत हुई

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमारा पर्सनल डेटा सिर्फ बेचा नहीं जाता, बल्कि उससे पैसे कमाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

इस पर CJI सूर्यकांत बोले किसड़क पर ठेला लगाने वाली महिला इन नियमों को कैसे समझेगी? क्या आपने सोचा है कि आप कितनी कठिन भाषा लिखते हैं?

सीजेआई सूर्यकांत ने ये भी कहा कि आप सिर्फ अपना फायदा जानते हो। यह भी जानते हो कि आपने लोगों को ऐप का आदी बना दिया है। हर कोई इसका इस्तेमाल करता है।

मेटा की तरफ से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी बोले कि क्या मैं कोर्ट को यह बताने के लिए एक पेज का एफिडेविट फाइल कर सकता हूं कि हम क्या कर रहे हैं? कोर्ट इसे देख सकता है और फिर फैसला ले सकता है।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि जब हम डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) एक्ट की जांच करते हैं, तो EU सिर्फ प्राइवेसी ही नहीं बल्कि वैल्यू की भी जांच करते हैं। जब डेटा की प्राइवेसी खत्म हो जाती है तो वे कहते हैं कि उसकी कोई वैल्यू नहीं रहती। कृपया इसकी जांच करें।

पूरे मामले को टाइमलाइन से समझें

जनवरी 2021 में व्हाट्सएप ने अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी लागू की थी।

मार्च 2021 में CCI (कंज्यूमर कॉम्पिटीशन आयोग) ने व्हाट्सएप की पॉलिसी की जांच शुरू की थी।

नवंबर 2024 मेंCCI ने मेटा-व्हाट्सएप पर 213.14 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था।

दिसंबर 2024 में मेटा-व्हाट्सएप ने CCI के फैसले के खिलाफ NCLAT में अपील की थी।

नवंबर 2025 में NCLAT ने कुछ मामलों में मेटा-व्हाट्सएप को राहत दी, लेकिन जुर्माना बरकरार रखा था।

जनवरी 2026 में मेटा-व्हाट्सएप ने NCLAT के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

3 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मेटा-व्हाट्सएप को कहा, या तो कानून मानो या भारत छोड़ दो।

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