सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा, जिसने सेना में 20 साल गुजारे उसे कोर्ट में क्यों घसीटा
Sandeep Kumar | Jan 30, 2025, 23:03 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त कर्मियों को अदालत में लाने के बजाय, केंद्र को एक नीति बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों में विवेकपूर्ण निर्णय लिया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है, जो सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त कर्मियों को अदालत में खींचने की प्रवृत्ति अपनाए हुए है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर एक स्पष्ट नीति बनाने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों में विवेकपूर्ण निर्णय लिया जा सके। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि सशस्त्र सेना न्यायाधिकरण से दिव्यांगता पेंशन पाने वाले सैनिकों को उच्चतम न्यायालय में लाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। इसके साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि वह ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील दायर करते समय लोक-लाज का ध्यान रखें।
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कोर्ट ने यह सवाल किया कि एक सैन्यकर्मी जो 15-20 साल तक सेवा करता है और दिव्यांग हो जाता है, उसे क्यों सुप्रीम कोर्ट में घसीटा जाना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में केंद्र सरकार को किसी भी कदम उठाने से पहले व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था। सैन्यकर्मियों की पेंशन से जुड़े मामलों में उन्हें कोर्ट में लाकर उन पर दबाव डालने के बजाय, एक उचित नीति बनानी चाहिए ताकि सैनिकों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
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कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दायर 'मनगढ़ंत अपील' की कड़ी आलोचना की और कहा कि इस तरह की याचिकाओं से सशस्त्र बलों का मनोबल गिर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह पूछा कि क्या वह इस मुद्दे पर कोई नीति बनाने के लिए तैयार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में ऐसी 'मनगढ़ंत' अपीलें दायर की जाती हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
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यह मामला एक अपील से जुड़ा था, जिसमें केंद्र सरकार ने सशस्त्र सेना न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत एक सेवानिवृत्त रेडियो फिटर को दिव्यांगता पेंशन प्रदान की गई थी। इस अपील पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था, और पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार के कदमों पर गंभीर सवाल उठाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर एक स्पष्ट नीति बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याओं का समाधान किया जा सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि सशस्त्र बलों के कर्मियों को अदालतों में लाने से पहले पूरी तरह से सोच-समझ कर निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि उनकी भावनाओं को आहत न किया जाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछे सवाल
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'मनगढ़ंत अपील' की कड़ी आलोचना
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