NCERT का विवादित चैप्टर अब पूरी तरह बैन, CJI बोले- दोषियों पर होगी कार्रवाई
Anjali Dwivedi | Feb 26, 2026, 12:58 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने NCERT के विवादित चैप्टर को न्यायपालिका के खिलाफ गहरी साजिश बताया है। CJI ने सख्त लहजे में कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पूरे मामले की जांच कर जवाबदेही तय की जाएगी।
News In Short
- CJI सूर्यकांत ने इसे पूरी न्यायपालिका की छवि खराब करने की सोची-समझी साजिश बताया है।
- दोषियों की पहचान के लिए गहन जांच होगी, मामला अभी बंद नहीं होगा।
- कोर्ट ने कहा कि अधिकारी अपनी गलती मानने के बजाय उसका बचाव कर रहे थे।
- इंटरनेट से विवादित किताब के सभी डिजिटल वर्जन हटाने के आदेश दिए गए हैं।
- NCERT की सभी नई किताबों की अब दोबारा समीक्षा की जाएगी।
News In Detail
उन्होंने कहा कि यह न्यायपालिका को बदनाम करने की एक गहरी और सोची-समझी साजिश लगती है। कोर्ट ने कहा कि बच्चों और अभिभावकों के मन में यह जहर घोलना कि भारतीय न्यायपालिका भ्रष्ट है, एक सुनियोजित कदम है।
माफी के नाम पर बचाव का खेल
इसके बजाय, एनसीईआरटीके अधिकारी और UGC के निदेशक अपनी गलती का बचाव कर रहे थे। कोर्ट ने इसे लापरवाह और आपत्तिजनक व्यवहार बताया है।
𝐏𝐫𝐞𝐬𝐬 𝐑𝐞𝐥𝐞𝐚𝐬𝐞 : 𝐀𝐧 𝐢𝐦𝐩𝐨𝐫𝐭𝐚𝐧𝐭 𝐮𝐩𝐝𝐚𝐭𝐞 𝐛𝐲 𝐍𝐂𝐄𝐑𝐓 𝐰𝐢𝐭𝐡 𝐫𝐞𝐬𝐩𝐞𝐜𝐭 𝐭𝐨 𝐂𝐥𝐚𝐬𝐬 𝟖 𝐒𝐨𝐜𝐢𝐚𝐥 𝐒𝐜𝐢𝐞𝐧𝐜𝐞 𝐓𝐞𝐱𝐭 𝐁𝐨𝐨𝐤 (𝐏𝐚𝐫𝐭 𝟐)
As per the extant procedure, NCERT brought out the Social Science textbook, Exploring Society:… pic.twitter.com/ahHSiT8MaP
— NCERT (@ncert) February 25, 2026
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने क्या कहा
यह पूरे ज्यूडीशियल इंस्टीट्यूशन के लिए चिंता की बात है। यह सोचा-समझा कदम लग रहा है। मैं किसी को भी, चाहे वे कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, इंस्टीट्यूशन को बदनाम नहीं करने दूंगा। मैं इस मामले पर खुद नोटिस ले रहा हूं।
जिम्मेदार लोगों पर होगी सख्त कार्रवाई
इसके साथ ही कोर्ट ने इसकी गहन जांच के आदेश दिए हैं। बेंच का कहना है जो लोग इस विवादित कंटेंट को तैयार करने में शामिल थे, उनकी जवाबदेही तय की जाएगी और उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी।
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डिजिटल कंटेंट हटाने का सख्त आदेश
क्या था विवादित चैप्टर में?
न्यायपालिका की समस्याएं, भ्रष्टाचार और केसों का दबाव
भ्रष्टाचार के हिस्से में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट के तहत बंधे होते हैं, जो न केवल कोर्ट के भीतर बल्कि बाहर भी उनके व्यवहार को नियंत्रित करता है। ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम का भी उल्लेख किया गया है, और सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें दर्ज करने की प्रक्रिया को बताया गया है।
किताब के अनुसार, 2017 और 2021 के बीच CPGRAMS के जरिए 1,600 से अधिक शिकायतें आई थीं। इसके अलावा, किताब में जजों को हटाने के संवैधानिक नियमों के बारे में बताया गया है, जिसमें पार्लियामेंट द्वारा इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटाने का प्रावधान है। यह बताया गया है कि इस मोशन पर गंभीर जांच के बाद ही विचार किया जाता है और जज को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है।
किताब में यह भी कहा गया है कि लोग न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार का सामना करते हैं, जिससे गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच और भी कठिन हो सकती है। अंत में, यह भी बताया गया है कि राज्य और केंद्र सरकारें पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं, जिसमें टेक्नोलॉजी का उपयोग और भ्रष्टाचार के मामलों पर त्वरित कार्रवाई शामिल है।
इस पर सरकार और पूर्व CJI का संदर्भ क्या है
किताब में पूर्व CJI बीआर गवई के जुलाई 2025 के भाषण का हवाला देकर यह जताने की कोशिश की गई कि न्यायपालिका ने खुद अपना भ्रष्टाचार स्वीकार किया है, जिसे कोर्ट ने गलत संदर्भ बताया।
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