सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का हंगामा, कोर्ट रूम में फेंके कागज, CJI को कहे अपशब्द

Manya Jain | Jul 10, 2026, 18:19 IST
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supreme court petitioner ruckus cji react
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सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने जजों को आदेश देने की कोशिश की। सवाल पूछने पर भड़के शख्स ने कोर्ट रूम में पेपर फेंके और चीफ जस्टिस को अपशब्द कहे। सुरक्षाकर्मियों ने उसे बाहर निकाला।

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अजीब नजारा देखने को मिला। एक याचिकाकर्ता ने खुद कोर्ट में पेश होकर जज को आदेश देने की कोशिश की। जज ने जब सवाल पूछा तो याचिकाकर्ता भड़क गया। उसने केस पेपर कोर्ट रूम में फेंके और चीफ जस्टिस के खिलाफ अपशब्द बोले। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उसे पकड़कर बाहर निकाला।

जज को दिया आदेश

जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच के सामने प्रबल प्रताप नाम के व्यक्ति ने खुद पेश होकर अपनी बात रखी। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उनकी रिट पिटीशन खारिज किए जाने से जुड़ा था।

उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS – Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) की धारा 173(4) के तहत दी गई अपनी अर्जी को प्राइवेट कंप्लेंट केस में बदले जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

जब मामला सुनवाई के लिए बुलाया गया तो याचिकाकर्ता ने बेंच से असाधारण टिप्पणी की। उसने कहा कि लखनऊ के एसीपी विकास नगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए। इस पर जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता उन्हें आदेश दे रहा है।

अचानक भड़का याचिकाकर्ता

इसके बाद बिना किसी उकसावे के याचिकाकर्ता ने कोर्ट रूम में केस पेपर फेंक दिए। उसने चीफ जस्टिस के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया। सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत पकड़ लिया और कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया।

पूरी घटना के दौरान बेंच शांत बनी रही। जजों ने इस घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। कोर्ट ने बाकी बचे मामलों की सुनवाई सामान्य तरीके से जारी रखी। इस मामले का कॉज टाइटल है प्रबल प्रताप एंड अनदर बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश एंड अदर्स। इसकी डायरी नंबर 31367-2026 है।

पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना

सुप्रीम कोर्ट में इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई है। 6 अक्टूबर 2025 को एक वकील ने कोर्ट की सुनवाई के दौरान तत्कालीन चीफ जस्टिस बीआर गवई की तरफ अपना जूता निकालकर फेंकने की कोशिश की थी। उस समय भी सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप कर वकील को कोर्ट से बाहर निकाला था।

उस घटना के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI – Bar Council of India) ने वकील का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA – Supreme Court Bar Association) ने भी उसकी सदस्यता खत्म कर दी थी। हालांकि उस समय के चीफ जस्टिस बीआर गवई ने खुद जोर देकर कहा था कि आरोपी वकील के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए।

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