सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाएं जरूरी

Manya Jain | Jun 21, 2026, 16:15 IST
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supreme court women advocates bar facility
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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों में महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी पर केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।

    समझें क्या है पूरा मामला

    • सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में महिला वकीलों के लिए सुविधाओं की कमी पर नाराजगी जताई है।
    • कोर्ट ने इस गंभीर मुद्दे पर केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस भेजा है।
    • एक राष्ट्रीय सर्वे में सामने आया कि अदालतों में महिला बार रूम गायब हैं।
    • अदालत ने कहा कि महिलाओं को काम करने के लिए सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है।
    • इस बेहद महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब आने वाली 17 जुलाई को होगी।
    सुप्रीम कोर्ट ने देश की अदालतों में महिला वकीलों के लिए जरूरी सुविधाओं की कमी को गंभीरता से लिया है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र, सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है।

    सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सिर्फ दरवाजे खोलना काफी नहीं, महिला वकीलों को काम करने की सही परिस्थितियां भी मिलनी चाहिए।

    सर्वे में सामने आया कि ज्यादातर अदालती परिसरों में महिला बार रूम या तो हैं ही नहीं या फिर बेहद खराब हालत में हैं। इस मामले को लेकर कोर्ट ने सख्त आदेश दिए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने साफ कहा कि पिछले कुछ दशकों में कानूनी पेशे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। लेकिन यह काफी नहीं है।

    पीठ ने कहा कि इस भागीदारी को सार्थक बनाने के लिए ऐसी परिस्थितियां बनानी होंगी। महिला वकीलों को अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से, सुरक्षित तरीके से और बराबरी के आधार पर निभाने का मौका मिलना चाहिए।

    याचिका में क्या उठाया गया मुद्दा

    महिला वकीलों के एक समूह ने यह याचिका दायर की है। इसमें देशभर की अदालतों, ट्रिब्यूनल और आयोगों में महिला बार रूम और जरूरी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया है।

    याचिकाकर्ताओं ने एक सर्वे भी करवाया। इसके लिए एक संरचित प्रश्नावली (structured questionnaire) तैयार की गई जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रही महिला वकीलों के बीच बांटा गया। कई अदालती परिसरों का दौरा भी किया गया।

    सर्वे में क्या सामने आया

    सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले हैं। ज्यादातर अदालती परिसरों में या तो महिलाओं के लिए अलग बार रूम है ही नहीं, या जो है वह बेहद खराब हैं।

    बैठने की पर्याप्त जगह नहीं है। साफ शौचालय नहीं है। कपड़े बदलने की जगह नहीं है। स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए कोई सुविधा नहीं है। यानी पेशेवर जिम्मेदारी निभाने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा ही नहीं है।

    अदालत काम की जगह है, सिर्फ इमारत नहीं

    पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अदालती परिसर सिर्फ एक जगह नहीं है जहां मुकदमे चलते हैं। वकीलों के लिए यह एक कार्यस्थल है जहां वे अपने पेशेवर जीवन का बड़ा हिस्सा गुजारते हैं।

    कोर्ट ने कहा कि जब महिला वकीलों को घंटों अदालत परिसर में रहना पड़ता है, तो उनके आराम, निजता, सुरक्षा और काम के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं बहुत जरूरी हो जाती हैं।

    संविधान का सवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला केवल सुविधाओं का नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा की गारंटी से सीधे जुड़ा है।

    कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 (आर्टिकल 21 – Article 21) में जीवन के अधिकार को हमेशा व्यापक अर्थों में समझा गया है। इसमें वे सभी परिस्थितियां शामिल हैं जो किसी व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने और काम करने का मौका देती हैं।

    पीठ ने यह भी कहा कि इन सुविधाओं की कमी महिला वकीलों को प्रभावित करती है। कुछ मामलों में यह उन्हें कानूनी पेशा छोड़ने पर मजबूर कर सकती है।

    नोटिस और अगला कदम

    पीठ ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। उनसे जवाब मांगा गया है।

    17 जुलाई की सुनवाई में अटॉर्नी जनरल (AG – Attorney General) आर वेंकटरमणि, सभी राज्यों के एडवोकेट जनरल और केंद्रशासित प्रदेशों के स्थायी वकील मौजूद रहेंगे।

    एक्सपर्ट कोट्स

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने कहा कि महिला वकीलों की भागीदारी को सार्थक बनाने के लिए ऐसी परिस्थितियां बनानी होंगी जिनमें वे अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से, सुरक्षित तरीके से और बराबरी के आधार पर निभा सकें। पीठ ने यह भी कहा कि यह मुद्दा प्रशासनिक सुविधा की सीमा से आगे जाता है। यह संवैधानिक गरिमा और सार्वजनिक जीवन में बराबर भागीदारी की मूल भावना से जुड़ा है।

    FAQ

    1. सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस क्यों जारी किया?
      एक याचिका में देशभर की अदालतों में महिला वकीलों के लिए जरूरी सुविधाओं की कमी उठाई गई थी। सर्वे में सामने आया कि ज्यादातर जगह महिला बार रूम नहीं हैं या अपर्याप्त हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस दिया।
    2. महिला बार रूम में कौन-कौन सी सुविधाएं होनी चाहिए?
      सर्वे के मुताबिक महिला वकीलों को पर्याप्त बैठने की जगह, साफ शौचालय, कपड़े बदलने की जगह और स्तनपान की सुविधा जैसी बुनियादी चीजें चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें पेशेवर जिम्मेदारी निभाने के लिए अनिवार्य बताया।
    3. इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
      सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 के लिए तय की है। उस दिन अटॉर्नी जनरल, सभी राज्यों के एडवोकेट जनरल और केंद्रशासित प्रदेशों के स्थायी वकील मौजूद रहेंगे।

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