तिरुपति लड्डू विवाद में बड़ा खुलासा, CBI-SIT की रिपोर्ट ने खोल दी पोल

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के घी मिलावट घोटाले में CBI और SIT ने चार्जशीट पेश की है। जांच में ये सामने आया कि सिंथेटिक घी बनाने में पाम ऑयल, केमिकल्स और जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया गया था।

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Aman Vaishnav
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तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) से जुड़े घी मिलावट घोटाले में CBI औक एसआईटी ने जनवरी 2026 में फाइनल चार्जशीट दाखिल की है। नेल्लोर की ACB कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट में 36 आरोपियों को नामजद किया गया है।

जांच में हुआ खुलासा

जांच में यह सामने आया कि 2021 से 2024 के बीच मंदिर को 68 लाख किलोग्राम सिंथेटिक घी सप्लाई किया गया था। इसकी कीमत करीब 250 करोड़ रुपए थी।

फर्जी फ्लेवर से तैयार किया घी 

CBI-SIT के अनुसार, असली घी के बजाय पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और केमिकल एडिटिव्स से सिंथेटिक मिश्रण तैयार किया गया। इस घोटाले में दिल्ली के कारोबारी अजय कुमार सुगंध (A-16) की अहम भूमिका रही। उसने घी की खुशबू, स्वाद और लैब वैल्यू को असली दिखाने के लिए एसिटिक एसिड एस्टर और आर्टिफिशियल फ्लेवर सप्लाई किए।

जांच में यह खुलासा हुआ कि घोटाले में TTD के कुछ वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। तत्कालीन GM (Procurement) आरएसएसवीआर सुब्रह्मण्यम और बाहरी डेयरी एक्सपर्ट्स पर रिश्वत और तोहफों के बदले फर्जी क्वालिटी रिपोर्ट देने का आरोप है। इसके साथ ही, सबूत दबाने का भी आरोप है।

NDDB की रिपॉर्ट में दिखी सच्चाई

गुजरात स्थित नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की जुलाई 2024 की लैब रिपोर्ट में घी के सैंपल्स में S-Value 19.72 तक पाई गई थी। शुद्ध देसी घी का मानक 98-104 होता है। रिपोर्ट में बताया गया कि सैंपल्स में सूअर की चर्बी (Lard), बीफ टैलो, वेजिटेबल ऑयल और मछली के तेल जैसे बाहरी फैट मौजूद थे।

ISO 17678 मानक के अनुसार, S-4 वैल्यू जानवरों की चर्बी की पहचान करती है। SIT रिपोर्ट में बताया गया कि मुख्य मिलावट केमिकल स्लज से की गई थी। हालांकि, कुछ रिजेक्टेड टैंकरों में एनिमल फैट भी मिला। इन्हें फिर से सप्लाई चेन में डाला गया।

जानें तिरुपति प्रसाद घी मिलावट मामले की पूरी टाइमलाइन

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि तिरुपति के वेंकटेश्वर मंदिर में प्रसाद बनाने वाले घी में जानवरों की चर्बी और मछली के तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

9 जुलाई 2025: मंदिर बोर्ड ने घी के सैंपल गुजरात स्थित पशुधन लैब (NDDB CALF Ltd.) भेजे।

16 जुलाई 2025: पशुधन लैब से रिपोर्ट आई, जिसमें एक फर्म के घी में मिलावट पाई गई। लैब ने कहा कि घी जानवरों की चर्बी और मछली के तेल से तैयार किया गया था, जिससे प्रसाद के लड्डू बनाए जा रहे थे।

22 जुलाई 2025: मंदिर ट्रस्ट ने बैठक की और 23 जुलाई को प्रसाद वाले घी के सैंपल लिए गए और जांच के लिए लैब भेजे गए।

18 सितंबर 2025: लैब रिपोर्ट सामने आई, जिसमें फिर से मिलावट की पुष्टि हुई।

18 सितंबर 2025: मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जगन मोहन रेड्डी की सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि इस कृत्य से हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है और मंदिर की पवित्रता को ठेस पहुंची है।

क्या है तिरुपति लड्डू की खासियत

तिरुमाला मंदिर में रोजाना 3.5 लाख से ज्यादा लड्डू प्रसाद दिए जाते हैं। यह परंपरा 1715 से जारी है। प्रसाद मंदिर की रसोई पोट्टु में तैयार होता है। पारंपरिक समुदाय के कारीगर इसे बनाते हैं। लड्डू को पहले भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित किया जाता है।

लड्डू बनाने की प्रक्रिया को दित्तम कहा जाता है। इसमें सामग्री की मात्रा का सख्ती से पालन किया जाता है। लड्डू की रेसिपी में अब तक छह बार बदलाव किए गए हैं। पहले लड्डू बेसन और गुड़ की चाशनी से बनते थे। बाद में स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए बादाम, काजू और किशमिश मिलाए गए।

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