मोबाइल में बिना इंटरनेट दिखेगा कॉलर का नाम, TRAI की नई सेवा

TRAI की नई कॉलर नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सेवा कॉल करते समय कॉलर का नाम दिखाएगी। इस सेवा को इंटरनेट या ऐप के बिना इस्तेमाल किया जा सकता है और यह फ्री है।

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Anjali Dwivedi
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पांच प्वाइंट में समझें पूरा मामला

  • कॉल करने वाले का नाम अब बिना इंटरनेट और ऐप के फोन पर दिखेगा।

  • सेवा पूरी तरह से फ्री है और सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध।

  • रजिस्टर्ड नाम दिखने से स्पैम और स्कैम कॉल्स की पहचान में परेशानी हो सकती है।

  • CNAP में रजिस्टर्ड नाम दिखता है, जबकि TrueCaller ऐप के जरिए नाम को एडिट किया जा सकता है।

  • CNAP 4G और 5G नेटवर्क पर काम करता है, पुराने नेटवर्क पर यह सेवा जल्द ही उपलब्ध हो सकती है।

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने हाल ही में एक नई सेवा शुरू की है, जो कॉल करते समय कॉलर का नाम दिखाती है। इस सेवा का नाम है कॉलर नेम प्रेजेंटेशन (CNAP)। इसमें कॉल करने वाले का नाम अब फोन पर दिखाई देगा, जिससे यूजर्स को कॉलर की पहचान में आसानी होगी।

खास बात यह है कि इस सर्विस को इस्तेमाल करने के लिए आपको internet, ऐप, या किसी सब्सक्रिप्शन की जरूरत नहीं है। यह पूरी तरह से फ्री है और सभी यूजर्स को इसका लाभ मिलेगा।

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CNAP कैसे काम करता है?

CNAP एक ऐसा सिस्टम है जो आपको कॉलर की आधिकारिक रजिस्टर नाम की जानकारी देता है। अगर आपने अपना नंबर परिवार के सदस्य के नाम पर रजिस्टर किया है, तो कॉल करते समय वही नाम दिखाई देगा। यानी कॉल करने पर वह नाम स्क्रीन पर दिखेगा। हालांकि, अगर आपके संपर्क में किसी के पास आपका नंबर सेव है, तो उनका फोन उसी नाम से आपका नंबर दिखाएगा, जिस नाम से आपने उसे सेव किया है।

इस सेवा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके लिए न तो इंटरनेट की जरूरत है और न ही कोई ऐप डाउनलोड करनी पड़ती है। यह पूरी तरह से फ्री है और सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध है। CNAP नेटवर्क लेवल पर काम करता है और सभी टेलीकॉम ऑपरेटर अपने नेटवर्क से जुड़े डेटा बेस में इस जानकारी को रखते हैं। जब कोई कॉल करता है, तो उस नंबर के रजिस्टर नाम के साथ कॉलर की पहचान स्क्रीन पर दिखती है।

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CNAP और TrueCaller में अंतर क्या है

कई लोग CNAP को TrueCaller जैसी सेवा समझ रहे हैं, लेकिन दोनों में महत्वपूर्ण अंतर हैं। TrueCaller एक ऐप आधारित सेवा है, जो कॉलर की पहचान के बारे में जानकारी दिखाती है। इसमें यूजर्स नामों को एडिट भी कर सकते हैं। जबकि CNAP में आपको कॉलर का नाम तब दिखता है, जब वह नंबर किसी रजिस्टर्ड नाम के तहत हो।

हालांकि, CNAP पर आपको कॉलर के नाम के बजाय रजिस्टर्ड नाम ही दिखेगा, जो कभी-कभी उपयोगकर्ताओं के लिए अजनबी हो सकता है। इससे स्पैम और स्कैम कॉल्स का खतरा भी हो सकता है, क्योंकि रजिस्टर्ड नाम से अनजान कॉलर का नाम आ सकता है।

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क्या हैं CNAP की चुनौतियां?

CNAP की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह रजिस्टर्ड नाम को दिखाता है, जो जरूरी नहीं कि वह व्यक्ति हो, जो उस नंबर का इस्तेमाल कर रहा हो। इससे कॉलर की पहचान में उलझन हो सकती है। कई बार कॉल करने वाले का नाम और नंबर से जुड़े नाम में अंतर हो सकता है।

इससे कॉल को लेकर गलतफहमी हो सकती है और यह फ्रॉड कॉल के रूप में गलत पहचान लिया जा सकता है। हालांकि, धीरे-धीरे लोग इस सिस्टम की आदत डाल लेंगे, फिर भी स्पैम कॉल्स की समस्या को हल करना आसान नहीं होगा।

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कैसे काम करेगा CNAP?

CNAP सिस्टम सभी 4G और 5G नेटवर्क पर काम करेगा। फिलहाल यह तकनीक पुराने नेटवर्क पर उपलब्ध नहीं है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यह तकनीक पुराने नेटवर्क पर भी उपलब्ध हो सकती है।

CNAP नेटवर्क के द्वारा टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा होता है, जो रजिस्टर्ड डेटा को लेकर कॉलर की जानकारी देता है। इस सेवा का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को अधिकतम सुरक्षा और सही कॉल पहचान की सुविधा देना है।

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