ओपेक छोड़ेगा यूएई, होर्मुज संकट में तेल बाजार पर बड़ा असर; जानिए भारत कितना प्रभावित होगा
Pawan Modiya | Apr 28, 2026, 23:32 IST
Photograph: (the sootr)
यूएई ने 1 मई 2026 से ओपेक और ओपेक प्लस छोड़ने का ऐलान किया। सऊदी अरब से उत्पादन कोटे को लेकर चले आ रहे मतभेद और होर्मुज जलसंधि संकट इसकी बड़ी वजह है। भारत पर तेल कीमतों के असर की आशंका बढ़ी है।
समझें क्या है पूरा मामला
यूएई का ओपेक छोड़ना: क्या है वजह
सऊदी अरब और यूएई के रिश्ते पिछले कुछ सालों में कई मोर्चों पर बिगड़े हैं। तेल से इतर, दोनों देशों ने यमन में अलग-अलग गुटों का साथ दिया और आर्थिक मोर्चे पर भी आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। यूएई के ऊर्जा मंत्री सुहैल अल-मज़रूई ने रॉयटर्स को बताया कि यह फैसला देश की राष्ट्रीय ऊर्जा नीति की गहरी समीक्षा के बाद लिया गया है और यह एक संप्रभु राष्ट्रीय निर्णय है। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला लेने से पहले सऊदी अरब समेत किसी भी दूसरे देश से सलाह नहीं ली गई।
होर्मुज बंद: तेल बाजार पहले से संकट में
पहले इस रास्ते से रोजाना कम से कम 130 जहाज गुजरते थे। लेकिन हाल ही में एक दिन में महज छह जहाज इस रास्ते से गुजर पाए। इससे सऊदी अरब, यूएई, इराक और कुवैत का निर्यात बुरी तरह चरमरा गया है। यूएई के ऊर्जा मंत्री ने सीएनएन को बताया कि यह ओपेक छोड़ने का सही वक्त है क्योंकि होर्मुज बंद होने से फिलहाल बाजार पर इसका असर सीमित रहेगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से दोस्त देशों पर कीमतों का दबाव कम होगा।
ओपेक क्या है और यह क्यों मायने रखता है
ओपेक प्लस (OPEC Plus) इसका विस्तारित समूह है। इसमें ओपेक देशों के साथ रूस जैसे गैर-सदस्य बड़े तेल उत्पादक भी शामिल हैं। यह समूह 2016 के बाद और ज्यादा सक्रिय हुआ जब तेल कीमतों को थामने के लिए बड़े उत्पादकों को एक साथ लाया गया। ओपेक देश जब उत्पादन घटाते या बढ़ाते हैं, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमत बदल जाती है।
यूएई के जाने से ओपेक कमजोर होगा
यूएई के ओपेक छोड़ने से उसे उत्पादन कोटे की पाबंदी से मुक्ति मिल जाएगी। वह अपना उत्पादन और निर्यात खुद तय कर सकेगा और कच्चे तेल के साथ पेट्रोकेमिकल और प्राकृतिक गैस के बाजार में भी अपनी भूमिका बढ़ा सकेगा।
भारत पर क्या होगा असर
यूएई के पास हबशान-फुजैरा (Habshan-Fujairah) पाइपलाइन है जो होर्मुज से पूरी तरह बाहर है। इसकी क्षमता 15 से 18 लाख बैरल प्रतिदिन है। ओपेक कोटे से मुक्त होने के बाद यूएई इसी पाइपलाइन के जरिए ज्यादा तेल बेच सकता है। भारत की रिफाइनरियां यूएई के मरबान (Murban) क्रूड को प्राथमिकता देती हैं और यह तेल होर्मुज के बिना आ सकता है।
अगर यूएई ज्यादा उत्पादन करता है और वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ती है, तो कीमतें कुछ नरम पड़ सकती हैं। इससे भारत का आयात बिल कम हो सकता है और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव घट सकता है। हालांकि, अगर ओपेक प्लस में फूट से वैश्विक तेल बाजार और अस्थिर हो गया तो कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
3 जरूरी FAQ
यूएई ने 28 अप्रैल 2026 को ऐलान किया कि वह 1 मई से ओपेक और ओपेक प्लस से बाहर हो जाएगा। इसकी सबसे बड़ी वजह उत्पादन कोटे को लेकर सऊदी अरब से लंबे समय से चला आ रहा मतभेद है। यूएई के पास बहुत ज्यादा तेल उत्पादन क्षमता है, लेकिन ओपेक का कोटा उसे पूरी क्षमता से उत्पादन करने से रोकता था। यूएई के ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यह एक संप्रभु नीतिगत फैसला है और इसे लेने से पहले किसी अन्य देश से सलाह नहीं ली गई।
सवाल 2: होर्मुज जलसंधि बंद होने से भारत पर क्या असर हुआ है?
होर्मुज जलसंधि दुनिया का सबसे अहम तेल और गैस मार्ग है। ईरान युद्ध की वजह से यह फरवरी 2026 से लगभग बंद है। इसके चलते मध्य पूर्व से भारत का तेल आयात करीब 60 फीसदी तक गिर गया है। भारत ने रूस से आयात बढ़ाकर इसकी भरपाई की कोशिश की है, लेकिन सप्लाई पर दबाव और तेल की ऊंची कीमतें अभी भी बनी हुई हैं। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें, महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार सब प्रभावित हो रहे हैं।
सवाल 3: यूएई के ओपेक छोड़ने के बाद क्या तेल की कीमतें घटेंगी?
यूएई के ओपेक छोड़ने के बाद उसे उत्पादन की सीमा से मुक्ति मिल जाएगी। वह अपनी पूरी क्षमता, यानी करीब 48 से 50 लाख बैरल प्रतिदिन तक उत्पादन बढ़ा सकता है। वह हबशान-फुजैरा पाइपलाइन के जरिए होर्मुज को बाईपास करके तेल बेच सकता है। ज्यादा सप्लाई से कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है, जो भारत जैसे बड़े आयातकों के लिए राहत की बात होगी। हालांकि, ओपेक में अस्थिरता से बाजार में उतार-चढ़ाव भी बढ़ सकता है।
ये खबरें भी पढ़ें...
घर लौट आओ, भारत को आपकी जरूरत है, Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू की अमेरिका में बसे भारतीयों से अपील
सबरीमाला सुनवाई: SC ने कहा- धर्म की आड़ में सार्वजनिक रास्ते नहीं रोके जा सकते
भारतमाला घोटाला: गोपाल गांधी से जुड़े ठिकानों पर ईडी का छापा, कई दतावेज और डेटा जब्त
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari