OBC क्रीमी लेयर विवाद: IAS-IPS-IFS अफसरों के कैडर आवंटन पर SC 1 सितंबर को करेगा सुनवाई
Amresh Kushwaha | Aug 27, 2026, 08:45 IST
OBC क्रीमी लेयर विवाद
यूपीएससी 2025 के 958 आईएएस, आईपीएस, आईएफएस उम्मीदवारों का कैडर आवंटन ओबीसी क्रीमी लेयर विवाद में फंसा है। केंद्र पुराने नियम से आवंटन चाहता है। सुप्रीम कोर्ट अब 1 सितंबर को सुनवाई करेगा और मामले के लिए विशेष बेंच बनाएगा।
समझें क्या है पूरा मामला...
- यूपीएससी 2025 के 958 उम्मीदवारों का कैडर आवंटन अटका है।
- मामला ओबीसी क्रीमी लेयर के नए नियम से जुड़ा है।
- केंद्र सरकार पुराने नियम से आवंटन कराना चाहती है।
- सुप्रीम कोर्ट अब मामले के लिए विशेष बेंच बनाएगी।
- इस मामले पर अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।
अब इनका सेवा आवंटन सुप्रीम कोर्ट में उलझ गया है। वजह है ओबीसी क्रीमी लेयर का नया नियम। केंद्र सरकार चाहती है कि पुराने नियम से ही आवंटन हो।
इसी मुद्दे पर अब सुप्रीम कोर्ट 1 सितंबर को सुनवाई करेगा। कोर्ट इसके लिए एक विशेष बेंच भी बनाएगा। पूरे मामले पर हजारों उम्मीदवारों की नजर टिकी है।
ओबीसी क्रीमी लेयर का मतलब सीधा और आसान है। इससे तय होता है कि ओबीसी वर्ग का कौन उम्मीदवार आरक्षण का हकदार है। माता पिता की नौकरी और आय इसमें अहम भूमिका निभाती है। लंबे समय से इसे तय करने के नियम बदलते रहे हैं। इसी वजह से हर बार नई उलझन खड़ी होती है।
विशेष बेंच क्यों जरूरी
उनकी दलील थी कि मामला उसी बेंच में भेजा जाए। इसी बेंच ने पहले फैसला दिया था। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने अदालत को यह बात बताई। पुराना फैसला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने दिया था।
अब दोनों जज अलग अलग बेंच में बैठते हैं। इसलिए चीफ जस्टिस ने नई विशेष बेंच बनाने की बात कही। वे इस पर जल्द बाकी जजों से चर्चा करेंगे।
विवाद की शुरुआत कहां से
कोर्ट ने 2004 के स्पष्टीकरण पत्र पर बड़ी बात कही। यह पत्र 1993 के पुराने आदेश पर हावी नहीं हो सकता। कोर्ट ने एक और बात साफ की। सिर्फ माता पिता की आय से क्रीमी लेयर तय नहीं होगा।
उनके पद और नौकरी की श्रेणी को भी देखना जरूरी बताया गया। इसी फैसले के बाद पूरा विवाद खड़ा हुआ है।
भर्ती की पूरी टाइमलाइन
मुख्य परीक्षा अगस्त 2025 में आयोजित हुई थी। यूपीएससी ने 6 मार्च 2026 को फाइनल रिजल्ट घोषित किया।
इसमें कुल 958 उम्मीदवार आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और अन्य सेवाओं के लिए चुने गए। सुप्रीम कोर्ट का क्रीमी लेयर फैसला इसके सिर्फ पांच दिन बाद आया। यानी पूरी परीक्षा प्रक्रिया पहले ही खत्म हो चुकी थी।
पुराना नियम क्यों चाहिए
परीक्षा के समय जो नियम लागू थे, उम्मीदवारों ने उसी हिसाब से फैसले लिए। कुछ उम्मीदवारों के माता पिता पीएसयू (Public Sector Undertaking) या निजी क्षेत्र में काम करते थे।
ऐसे उम्मीदवार खुद को ओबीसी लाभ के लिए अयोग्य मान बैठे। इनमें से कई सामान्य वर्ग से परीक्षा में बैठे। कुछ ने ओबीसी कैटेगरी में आवेदन ही नहीं किया।
इन उम्मीदवारों ने उम्र में छूट या अतिरिक्त प्रयास का फायदा भी नहीं लिया। अब नए नियम से दोबारा आकलन होने पर कुछ को फायदा मिल सकता है। इससे समान स्थिति वाले उम्मीदवारों में भेदभाव की आशंका बन रही है।
देरी से क्या नुकसान होगा
जिन उम्मीदवारों ने ओबीसी में आवेदन नहीं किया, उन्हें शामिल करना मुश्किल है। ऐसा करने पर पूरी परीक्षा प्रक्रिया दोबारा खोलनी पड़ सकती है।
सरकार ने एलबीएसएनएए (Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration), मसूरी के फाउंडेशन कोर्स का भी जिक्र किया। यहीं नए आईएएस और आईपीएस अफसरों की ट्रेनिंग शुरू होती है। आवंटन में देरी से कई काम प्रभावित हो सकते हैं। ट्रेनिंग, कैडर और वेतन तय करने का काम अटक सकता है।
केंद्र की कोर्ट से मांग
केंद्र के मुताबिक सीएसई 2025 की चयन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी। यह प्रक्रिया 11 मार्च के फैसले से पहले ही खत्म हुई थी। सरकार यह साफ कर चुकी है। वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को कमजोर नहीं करना चाहती।
उसकी मांग सिर्फ इतनी है। सीएसई 2025 पर इसे कैसे लागू किया जाए, यह स्पष्ट हो। केंद्र ने अदालत से एक अनुरोध किया है। पुराने नियम के आधार पर ही 958 उम्मीदवारों का आवंटन पूरा हो।
कानूनी जानकारों का कहना है, यह मामला सिर्फ 958 उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है। इसका असर आगे की भर्तियों की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाले समय के लिए मापदंड बन सकता है। सरकारी और कानूनी हलकों में इस मामले पर लगातार चर्चा हो रही है।
अब सबकी नजर 1 सितंबर की सुनवाई और विशेष बेंच पर टिकी है। उम्मीदवार और उनके परिवार भी अदालत के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। जल्द ही इस लंबी खींचतान का कोई हल निकलने की उम्मीद है।
ये खबरें भी पढ़िए...
अब सोना-चांदी नहीं, तांबे के पीछे पागल हो रही दुनिया!
LPG, रेलवे से बस सेवा तक, 1 सितंबर से होंगे बड़े बदलाव, जेब पर पड़ेगा असर
खेत से सीधा आपकी थाली तक पहुंच रहा जहर: विदेश भी नहीं खरीद रहा भारतीय कृषि उत्पाद
OBC क्रीमी लेयर विवाद: IAS-IPS-IFS अफसरों के कैडर आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट बनाएगी स्पेशल बेंच
राजस्थान पुलिस की ऐतिहासिक पहल, हाइटेक होगी बीट पुलिसिंग, पहले चरण में 9 जिलों में होगी लागू
By Ashish Bhardwaj
जवाहर सर्किल के सब-वे की 20 दुकानें बनीं कबाड़घर: दो बार नीलामी फेल, अब बिजली पर ₹19.97 लाख का नया टेंडर
By Raghvendra Singh Rathore
पांच सितारा शेरेटन ग्रैंड पैलेस होटल ने गंदगी फैलाई, इंदौर नगर निगम ने किया ढाई लाख का स्पॉट फाइन
By Sanjay Gupta
सीएम मोहन यादव ने बोला हमला राहुल गांधी पर हमला, बोले-कांग्रेसी तब न सुधरे और ना अब सुधर रहे
By Sandeep Kumar
छत्तीसगढ़ सचिवालय में प्रमोशन की बड़ी खबर, एक अवर सचिव और दो अनुभाग अधिकारियों को मिली पदोन्नति
By VINAY VERMA
छत्तीसगढ़ पुलिस में 7 अधिकारियों की नई पोस्टिंग, CM सुरक्षा से राजभवन तक बदले अधिकारी, भाटापारा DSP भी बदले
By VINAY VERMA
3605 पंचायतों में चुनाव तारीख बदलने की तैयारी: 6 नवंबर को धनतेरस, आयुक्त बोले-कैलेंडर बनाते समय ध्यान नहीं रहा
By Jageshwar prasad