वैभव कोकट की एक पोस्ट से खुली ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की पोल, जानें कौन है ये सोशल मीडिया यूजर
Shreya Nakade | Jul 21, 2024, 11:13 IST
वैभव कोकट
ट्रेनी IAS पूजा खेडकर का विवाद उजागर होने के बाद देशभर के IAS-IPS जांच के कठघरे में हैं। इस पूरी मुहिम की शुरुआत एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई थी। जानें कैसे...
ट्रेनी IAS पूजा खेडकर ( IAS Pooja Khedkar ) का विवाद पूरे देश में चर्चा में है। अफसर की नियुक्ति में संभावित गड़बड़ियों के चलते EWS या निशक्तता संबंधी आरक्षण से IAS-IPS बने सभी अधिकारियों पर जांच की तलवार लटक रही है।
पूजा खेडकर का विवाद उजागर होने के बाद, आए दिन ऐसे कई अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं जिनके IAS-IPS बनने में गड़बड़ियों की आशंका है। दूसरी तरफ पूजा खेडकर के केस को प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान में ले लिया है।
खास बात यह है कि इतना बड़ा विवाद उजागर हुआ तो एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए। ट्रेनी IAS पूजा खेडकर के बरताव और मनमानी के बारे में सबसे पहला खुलासा वैभव कोकट ( Vaibhav Kokat ) नाम के एक एक्स यूजर ने किया था।
अपने पोस्ट में वैभव ने पूजा खेडकर की ऑडी कार, कलेक्टर के बाजू में रूम की डिमांड और उनके पिता का कर्मचारियों को धमकाने का जिक्र किया था। यह पोस्ट वायरल हो गया और धीरे-धीरे पूजा खेडकर के कई राज खुलते गए।
ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की पोल वैभव कोकट के एक एक्स पोस्ट से खुली। 6 जुलाई को उन्होंने अपने अकाउंट पर पूजा की गाड़ी की फोटो के साथ एक लंबा मैसेज शेयर किया था। इस मैसेज में ट्रेनी IAS के व्यवहार, उन्हें मिलने वाली खास सुविधाओं और उनके रौब के बारे में लिखा था।
इस पोस्ट को मीडिया से लेकर सामाजिक संगठनों ने संज्ञान में लिया। वैभव को कई कॉल्स आने लगे और धीरे-धीरे ये पूरा विवाद और खुलता गया। पूजा खेडकर के बारे में धीरे-धीरे और जानकारियां सामने आने लगी। ऐसे ही उनके IAS बनने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट लगाने की बात भी उजागर हुई।
वैभव कोकट का एक्स पोस्ट-
ये खबर भी पढ़िए...
एससी कैटेगरी से IFS ऑफिसर कैसे बनी ज्योति मिश्रा ? सच जानकर रह जाएंगे हैरान
वैभव कोकट महाराष्ट्र के बीड जिले के रहने वाले हैं। वैभव एक पीआर कंपनी में भी काम कर चुके हैं। वे अपने एक्स अकाउंट पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर विचार रखते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वैभव के 32 हजार फॉलोअर्स हैं। अपने एक्स अकाउंट की प्रोफाइल में वैभव खुद को एक नास्तिक और महेंद्र सिंह धोनी का फैन बताते हैं।
![879bcd5b-ad9]()
ये खबर भी पढ़िए...
IAS पूजा खेडकर डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट विवाद के बीच जानिए UPSC में दिव्यांगों को कितनी छूट, क्या हैं नियम
वैभव की पोस्ट से पूजा खेडकर के बारे में कई खुलासे हुए। इनमें से कुछ खास खुलासे थे-
आंगनवाड़ी और सरकारी स्कूल में पढ़कर IAS बनी मनीषा धार्वे, प्रदेश की पहली आदिवासी महिला आईएएस
पूजा खेडकर का विवाद उजागर होने के बाद, आए दिन ऐसे कई अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं जिनके IAS-IPS बनने में गड़बड़ियों की आशंका है। दूसरी तरफ पूजा खेडकर के केस को प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान में ले लिया है।
खास बात यह है कि इतना बड़ा विवाद उजागर हुआ तो एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए। ट्रेनी IAS पूजा खेडकर के बरताव और मनमानी के बारे में सबसे पहला खुलासा वैभव कोकट ( Vaibhav Kokat ) नाम के एक एक्स यूजर ने किया था।
अपने पोस्ट में वैभव ने पूजा खेडकर की ऑडी कार, कलेक्टर के बाजू में रूम की डिमांड और उनके पिता का कर्मचारियों को धमकाने का जिक्र किया था। यह पोस्ट वायरल हो गया और धीरे-धीरे पूजा खेडकर के कई राज खुलते गए।
ऐसे खोली पोल
इस पोस्ट को मीडिया से लेकर सामाजिक संगठनों ने संज्ञान में लिया। वैभव को कई कॉल्स आने लगे और धीरे-धीरे ये पूरा विवाद और खुलता गया। पूजा खेडकर के बारे में धीरे-धीरे और जानकारियां सामने आने लगी। ऐसे ही उनके IAS बनने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट लगाने की बात भी उजागर हुई।
वैभव कोकट का एक्स पोस्ट-
प्रोबेशनरी IAS वापरतायेत AUDI कार ?
नियम सांगतो कि खासगी गाडीवर ‘महाराष्ट्र शासन’ अशी पाटी लावणे अयोग्य आहे. पण पुणे जिल्हाधिकारी कार्यालयात प्रोबेशनवर रुजू असणाऱ्या 2022 बॅच IAS डॉ. पूजा खेडकर यांनी VIP नंबर असलेल्या खासगी ऑडी गाडीला महाराष्ट्र शासन असा बोर्ड लाऊन घेतला. शिवाय… pic.twitter.com/DeVq4xpRKY
— Vaibhav Kokat (@ivaibhavk) July 6, 2024
ये खबर भी पढ़िए...
एससी कैटेगरी से IFS ऑफिसर कैसे बनी ज्योति मिश्रा ? सच जानकर रह जाएंगे हैरान
कौन है वैभव कोकट ?
879bcd5b-ad9
ये खबर भी पढ़िए...
IAS पूजा खेडकर डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट विवाद के बीच जानिए UPSC में दिव्यांगों को कितनी छूट, क्या हैं नियम
पोस्ट से हुआ खुलासा
- वैभव कोकट ने अपनी पहली एक्स पोस्ट में लिखा था कि प्रोबेशनरी आईएएस ऑडी कारों का उपयोग कर रहे हैं? नियम कहता है कि निजी वाहन पर 'महाराष्ट्र सरकार' का साइन बोर्ड लगाना अनुचित है।
- जब वरिष्ठ अधिकारी सरकारी काम के लिए मुंबई मंत्रालय गए, तो इस अधिकारी महोदया ने उनके ड्योढ़ी (ऑफिस) पर कब्जा कर लिया और वरिष्ठों के ऑफिस का सामान बाहर निकाल लिया। और वहां अपना ऑफिस बनाया और अपने नाम का एक बोर्ड भी लगाया।
- पुणे के कलेक्टर सुहास दिवासे ने इस व्यवहार को लेकर अपर मुख्य सचिव मंत्रालय को एक रिपोर्ट दायर की है और इस रिपोर्ट में कलेक्टर ने अधिकारी मैडम की जिद का जिक्र किया है कि 'मेरा कार्यालय कलेक्टर के कार्यालय के बगल में होना चाहिए और मुझे एक कांस्टेबल चाहिए और मुझे यह कार चाहिए'।
- अधिकारी मैडम के पिता कलेक्टर कार्यालय आते हैं और वहां के कर्मचारियों-अधिकारियों से कहते हैं कि, तुम सब मेरी बेटी को परेशान कर रहे हो, तुम्हें जीवन भर उसे ऐसा पद कभी नहीं मिलेगा। धमकी भी देते हैं कि अगर तुम मेरी बेटी को परेशान करोगे तो भविष्य में तुम्हें भी भुगतना पड़ेगा।
आंगनवाड़ी और सरकारी स्कूल में पढ़कर IAS बनी मनीषा धार्वे, प्रदेश की पहली आदिवासी महिला आईएएस
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj