मैच्योरिटी से पहले क्यों बंद हो रही हैं इंश्योरेंस पॉलिसी, जानें वजह
Kaushiki | Jul 12, 2026, 16:43 IST
IRDAI Data 2026
देश में मैच्योरिटी से पहले लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी सरेंडर करने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। IRDAI के आंकड़ों के मुताबिक, कुल पेआउट में सरेंडर का हिस्सा 38.3% तक पहुंच गया है। इसके पीछे वित्तीय तंगी, मिस-सेलिंग और एफडी पर बेहतर रिटर्न मुख्य वजह हैं।
RBI Financial Report: आजकल लोग अपनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को समय से पहले बंद कर रहे हैं। पिछले पांच सालों का डेटा यही कहानी बयां कर रहा है। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने इस पर चिंता जताई है।
लोग मैच्योरिटी से पहले ही अपना पैसा निकाल रहे हैं। फाइनेंसियल ईयर 2022 में यह आंकड़ा 30% के करीब था। लेकिन फाइनेंसियल ईयर 2026 में यह बढ़कर 38.3% हो गया है। यह बदलाव बेहद हैरान करने वाला है। आइए IRDAI की इस रिपोर्ट को डिटेल से जानें...
![RBI Financial Report]()
इसके अपोजिट, पूरी अवधि तक चलने वाली पॉलिसी कम हुई हैं। साल 2021-22 में करीब 48% लोग पूरी पॉलिसी चलाते थे। लेकिन साल 2025-26 में ये संख्या घटकर 36।9% रह गई है।
इसका मतलब है कि लोग बीच में ही बाहर निकल रहे हैं। यह स्थिति किसी भी तरह से अच्छी नहीं मानी जा सकती। अधिकारियों के मुताबिक, इससे ग्राहकों को बड़ा नुकसान होता है। उन्हें पॉलिसी का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
साल 2025-26 में कंपनियों ने कुल 7.3 लाख करोड़ रुपए बांटे। इसमें से 38.3% हिस्सा सिर्फ पॉलिसी सरेंडर करने वालों का था। इस तरह करीब 2।8 लाख करोड़ रुपए समय से पहले बांटे गए।
वहीं, मैच्योरिटी पूरा होने पर सिर्फ 2.69 लाख करोड़ रुपए ही दिए गए। यानी मैच्योरिटी से ज्यादा पैसा लोग बीच में ही निकाल रहे हैं। यह अंतर इंश्योरेंस सेक्टर की चिंता को बढ़ा रहा है।
![RBI Financial Report]()
पॉलिसी को समय से पहले बंद करने के कई कारण हैं। आजकल महंगाई और रहने का खर्च बहुत बढ़ गया है। लोन की किस्तें भी लगातार महंगी हो रही हैं।
ऐसे में लोग अपनी नकदी की जरूरत के लिए ऐसा कर रहे हैं। वे अपनी पुरानी ट्रेडिशनल इंश्योरेंस पॉलिसी को सरेंडर कर रहे हैं। ताकि तुरंत हाथ में कुछ पैसा आ सके।
दूसरा बड़ा कारण कंपनियों द्वारा की जा रही मिस-सेलिंग है। कई लोग इंश्योरेंस को बैंक एफडी की तरह समझकर खरीद लेते हैं। उन्हें लगता है कि वे कम समय में अच्छा रिटर्न पा लेंगे।
लेकिन बाद में उन्हें लंबे लॉक-इन पीरियड का पता चलता है। साथ ही समय से पहले पैसे निकालने पर पेनल्टी भी लगती है। निराश होकर लोग फिर पॉलिसी को बीच में ही बंद कर देते हैं।
![RBI Financial Report]()
इसके अलावा निवेश के दूसरे विकल्प भी अब काफी बेहतर हुए हैं। आजकल बैंक एफडी पर ब्याज दरें काफी अच्छी मिल रही हैं। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड भी लोगों को खूब लुभा रहे हैं।
इन विकल्पों में इंश्योरेंस के मुकाबले कहीं ज्यादा रिटर्न मिल रहा है। इसी वजह से कई ग्राहक बीमा पॉलिसी से अपना पैसा निकाल रहे हैं। वे इस पैसे को दूसरी जगहों पर निवेश कर रहे हैं।
![RBI Financial Report]()
आरबीआई की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में भी इस पर बात हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, समय से पहले पैसे निकालना कंपनियों के लिए ठीक नहीं है। इससे कंपनियों के निवेश के प्लान खराब हो जाते हैं।
उन्हें तय समय से पहले अपनी प्रॉपर्टी बेचनी पड़ती हैं। यह स्थिति बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकती है। लगातार बढ़ता सरेंडर रेट ग्राहकों की नाराजगी को भी दिखाता है।
इसी तरह, जनरल इंश्योरेंस सेक्टर में भी दावों की संख्या बढ़ी है। साल 2021-22 में नेट इनकर्ड क्लेम 1।4 लाख करोड़ रुपए थे। साल 2025-26 में यह बढ़कर 2।1 लाख करोड़ रुपए हो गए।
पांच सालों में इसमें करीब 50% की बढ़ोतरी हुई है। इनमें सबसे ज्यादा क्लेम हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस में आए हैं। कुल क्लेम में इनका हिस्सा 95।3% के करीब है।
अकेले हेल्थ इंश्योरेंस का हिस्सा कुल दावों में 55% तक पहुंच गया है। मेडिकल महंगाई और अस्पतालों के बढ़ते खर्च इसके बड़े कारण हैं। लोग अब ज्यादा से ज्यादा इलाज के लिए क्लेम कर रहे हैं।
वहीं मोटर इंश्योरेंस के क्लेम का हिस्सा 40.3% दर्ज किया गया है। इन दो सेक्टर में बढ़ते दावों से इंश्योरेंस कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्हें अपनी पूरी व्यवस्था को नए सिरे से सुधारना होगा।
यह खबर हमारे लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि यह हमारी मेहनत (इंश्योरेंस का लाभ) की कमाई से जुड़ी है। अक्सर लोग बिना सोचे-समझे या एजेंट के दबाव में आकर गलत पॉलिसी खरीद लेते हैं। बाद में उन्हें भारी नुकसान उठाकर उसे बंद करना पड़ता है।
यह खबर हमें सिखाती है कि इंश्योरेंस को कभी भी शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट या एफडी (इंश्योरेंस कवर) न समझें। बीमा खरीदने से पहले उसके नियमों, लॉक-इन पीरियड और सरेंडर चार्ज को अच्छी तरह समझना बहुत जरूरी है। ऐसा करने से हम अपनी जमा-पूंजी को डूबने से बचा सकते हैं और सही फाइनेंसियल फैसले ले सकते हैं।
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लोग मैच्योरिटी से पहले ही अपना पैसा निकाल रहे हैं। फाइनेंसियल ईयर 2022 में यह आंकड़ा 30% के करीब था। लेकिन फाइनेंसियल ईयर 2026 में यह बढ़कर 38.3% हो गया है। यह बदलाव बेहद हैरान करने वाला है। आइए IRDAI की इस रिपोर्ट को डिटेल से जानें...
RBI Financial Report
बीच में ही बाहर निकल रहे लोग
इसका मतलब है कि लोग बीच में ही बाहर निकल रहे हैं। यह स्थिति किसी भी तरह से अच्छी नहीं मानी जा सकती। अधिकारियों के मुताबिक, इससे ग्राहकों को बड़ा नुकसान होता है। उन्हें पॉलिसी का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
सरेंडर पेआउट का आंकड़ा
वहीं, मैच्योरिटी पूरा होने पर सिर्फ 2.69 लाख करोड़ रुपए ही दिए गए। यानी मैच्योरिटी से ज्यादा पैसा लोग बीच में ही निकाल रहे हैं। यह अंतर इंश्योरेंस सेक्टर की चिंता को बढ़ा रहा है।
RBI Financial Report
आखिर लोग क्यों बंद कर रहे हैं पॉलिसी
ऐसे में लोग अपनी नकदी की जरूरत के लिए ऐसा कर रहे हैं। वे अपनी पुरानी ट्रेडिशनल इंश्योरेंस पॉलिसी को सरेंडर कर रहे हैं। ताकि तुरंत हाथ में कुछ पैसा आ सके।
गलत तरीके से बेची जा रही पॉलिसी
लेकिन बाद में उन्हें लंबे लॉक-इन पीरियड का पता चलता है। साथ ही समय से पहले पैसे निकालने पर पेनल्टी भी लगती है। निराश होकर लोग फिर पॉलिसी को बीच में ही बंद कर देते हैं।
RBI Financial Report
शेयर बाजार का अट्रैक्शन
इन विकल्पों में इंश्योरेंस के मुकाबले कहीं ज्यादा रिटर्न मिल रहा है। इसी वजह से कई ग्राहक बीमा पॉलिसी से अपना पैसा निकाल रहे हैं। वे इस पैसे को दूसरी जगहों पर निवेश कर रहे हैं।
RBI Financial Report
आरबीआई ने जताई बड़ी चिंता
उन्हें तय समय से पहले अपनी प्रॉपर्टी बेचनी पड़ती हैं। यह स्थिति बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकती है। लगातार बढ़ता सरेंडर रेट ग्राहकों की नाराजगी को भी दिखाता है।
जनरल इंश्योरेंस में दावों की संख्या बढ़ी
पांच सालों में इसमें करीब 50% की बढ़ोतरी हुई है। इनमें सबसे ज्यादा क्लेम हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस में आए हैं। कुल क्लेम में इनका हिस्सा 95।3% के करीब है।
हेल्थ और मोटर क्लेम में भारी उछाल
वहीं मोटर इंश्योरेंस के क्लेम का हिस्सा 40.3% दर्ज किया गया है। इन दो सेक्टर में बढ़ते दावों से इंश्योरेंस कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्हें अपनी पूरी व्यवस्था को नए सिरे से सुधारना होगा।
यह खबर हमारे लिए क्यों जरूरी है
यह खबर हमें सिखाती है कि इंश्योरेंस को कभी भी शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट या एफडी (इंश्योरेंस कवर) न समझें। बीमा खरीदने से पहले उसके नियमों, लॉक-इन पीरियड और सरेंडर चार्ज को अच्छी तरह समझना बहुत जरूरी है। ऐसा करने से हम अपनी जमा-पूंजी को डूबने से बचा सकते हैं और सही फाइनेंसियल फैसले ले सकते हैं।
FAQ
- लोग मैच्योरिटी से पहले अपनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी क्यों सरेंडर कर रहे हैं?
मुख्य वजहें बढ़ती महंगाई, लोन की किस्तें, और वित्तीय तंगी हैं। इसके अलावा, बैंक एफडी और म्यूचुअल फंड में बेहतर रिटर्न मिलने के कारण भी लोग बीमा से पैसा निकाल रहे हैं। - इंश्योरेंस पॉलिसी को बीच में बंद करने या सरेंडर करने से क्या नुकसान होता है?
समय से पहले पॉलिसी सरेंडर करने पर ग्राहकों को भारी वित्तीय नुकसान होता है क्योंकि उन्हें पूरा लाभ नहीं मिलता और कंपनियों द्वारा भारी सरेंडर पेनल्टी भी काटी जाती है। - क्या कंपनियों द्वारा पॉलिसी की गलत बिक्री भी सरेंडर बढ़ने की वजह है?
हां, कई बार एजेंट इंश्योरेंस को शॉर्ट-टर्म प्लान या एफडी की तरह बेच देते हैं। बाद में जब ग्राहकों को लंबे लॉक-इन पीरियड का पता चलता है, तो वे पॉलिसी बंद कर देते हैं।
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